जंग सिर्फ बर्बादी लाती है… 12 दिन में कितना बदला इजरायल? देखिए वहां की इमारतों की पुरानी और अब की तस्वीरें

इस युद्ध को शुरू हुए 12 दिन हो चुके हैं और इन दिनों में हालात पूरी तरह बदल गए हैं. दोनों पक्षों ने भारी जान-माल का नुकसान झेला है. किसी की स्पष्ट जीत या हार तो तय नहीं हुई, लेकिन यह साफ है कि किसी पक्ष का नुकसान थोड़ा कम रहा और किसी का बेहद ज्यादा. आइये कुछ तस्वीरों से इसका अंदाजा लगाते हैं.

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12 दिनों बाद दोनो देशों में तबाही के निशान (फोटो: रॉयटर्स) 12 दिनों बाद दोनो देशों में तबाही के निशान (फोटो: रॉयटर्स)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जून 2025,
  • अपडेटेड 8:51 AM IST

13 जून को इज़राइल ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ शुरू किया. इस ऑपरेशन के तहत इजरायली वायुसेना ने तेहरान, इस्फहान और नातांज जैसे क्षेत्रों में ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया. इस हमले में 200 से ज्यादा फाइटर जेट्स और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. इज़रायल ने ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम, मिसाइल निर्माण इकाइयों और सैन्य कमांडरों को सीधे टारगेट किया.

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इस हमले के जवाब में ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3’ की शुरुआत की और इजरायल पर मिसाइलों की बारिश कर दी. यह सिलसिला पिछले 12 दिनों से लगातार जारी है. दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों का तीखा दौर देखने को मिला है, जिसने पूरे मध्य-पूर्व को तनाव में डाल दिया है.अब जब डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान किया है, दोनों देशों में हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है.

12 दिन, बदल गया इजरायल का नक्शा
इस युद्ध को शुरू हुए 12 दिन हो चुके हैं और इन दिनों में हालात पूरी तरह बदल गए हैं. दोनों पक्षों ने भारी जान-माल का नुकसान झेला है. किसी की स्पष्ट जीत या हार तो तय नहीं हुई, लेकिन यह साफ है कि किसी पक्ष का नुकसान थोड़ा कम रहा और किसी का बेहद ज्यादा.

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इजरायल से सामने आईं कई तस्वीरें यह बयां कर रही हैं कि किस तरह युद्ध ने देश के बड़े शहरों को खंडहर में तब्दील कर दिया है. तेल अवीव जैसी ऊंची इमारतों वाली नगरी, कई जगह मलबे के ढेर में बदल गई. सिर्फ मलबा नजर आता है, शहर की रफ्तार थम गई है.

आइये देखते हैं 12 दिनों के बाद की तस्वीर.

यह तस्वीर इज़राइल के स्टॉक एक्सचेंज की है. एक समय था जब इस चमचमाती इमारत की रौशनी इजरायली कंपनियों की ताकत का प्रतीक थी, लेकिन अब, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने इसे पूरी तरह तबाह कर दिया है.

 ये इजरायल का स्टॉक एक्सचेंज की पुरानी फोटो है. ये बिल्डिंग 1953 में बनाई गई थी और इसे तेल अवीव स्टॉक एक्सचेंज (TASE) के शुरुआती मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया था.

 

 ये दक्षिण इस्राएल का सोरोका हॉस्पिटल है, जिसे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने खंडहर बना दिया.सोरोका मेडिकल सेंटर के महानिदेशक प्रो. श्लोमी कोडेश ने ईरान की सर्जिकल वार्ड को पूरी तरह तबाह कर दिया. देखिए ये एक तस्वीर., जो पहले और अब के हालात बताती है.

 

 

(Image Credit: Reuters)

तेल अवीव के कई हिस्सों—जैसे रिशोन लेजियन, पेटाह तिक्वा और बेत यम में कई आवासीय इमारतें आंशिक या पूरी तरह से नष्ट हो गईं. रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 61 से अधिक इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि हुई है, जिनमें कई बहुमंजिला अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स भी शामिल हैं.

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ये तस्वीरें इज़राइल के बीर्शेबा शहर स्थित माइक्रोसॉफ्ट बिल्डिंग की हैं, जहां ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले में पूरी इमारत तबाह हो गई. पहले और अब की तस्वीरें यह साफ दिखाती हैं कि नुकसान कितना भयावह था.

 


ईरान की मिसाइलों के निशाने पर इज़राइल का हाइफ़ा शहर भी आया, जहां ऐतिहासिक अल-जरीना ग्रैंड मस्जिद को गंभीर नुकसान पहुंचा. 1775 में बनी यह मस्जिद 1901 में ओट्टोमन साम्राज्य द्वारा विस्तारित की गई थी. हाइफा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की यह अहम पहचान बिल्कुल ही बदल चुकी है. इसकी तस्वीरें इजरायल के राष्ट्रपति ने अपने इंस्टा अकाउंट पर शेयर की.

 

 

वहीं ईरान में तबाही की कई तस्वीरें सामने आई. इजरायल की सबसे बड़ी कामयाबी फोर्डो भूमिगत परिसर के उपग्रह चित्रों को दिखाती है.अमेरिका द्वारा इस भूमिगत परमाणु केंद्र पर हमला करने से पहले और बाद की स्थिति देखिए. (फोटो: रॉयटर्स)


इस वक्त के ताजा हालात यह हैं कि इजरायल और ईरान के बीच 12 दिन से जारी संघर्ष मंगलवार को थम गया, जब दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर सीजफायर की घोषणा की. हालांकि, दोनों ही पक्षों ने इस युद्ध को अपनी जीत बताया है.

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ईरान के खिलाफ एक ऐतिहासिक विजय करार दिया और कहा कि "यह जीत आने वाली पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी. हमने शेर की तरह जवाब दिया और हमारी दहाड़ ने तेहरान की नींव हिला दी.

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वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया कि ईरान किसी भी हाल में अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम नहीं रोकेगा उन्होंने कहा कि इस तकनीक को हासिल करने के लिए हमने सालों की मेहनत की है. हमारे वैज्ञानिकों ने इसके लिए बलिदान दिए हैं और हम अपने रास्ते से पीछे नहीं हटेंगे.

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