ईरान में लोग सड़कों पर उतर कर सरकार का विरोध कर रहे हैं. सरकार आंदोलनकारियों पर गोली चला रही है. वहीं देश के कुछ सबसे धनी लोग ऐसे समय तुर्किए भाग गए, ताकि वे वहां पार्टी कर सकें. इन पर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये वही लोग हैं जो खामेनेई शासन में चांदी काट रहे हैं. जबकि, उनके देश में दमनकारी सरकार प्रदर्शनों के दौरान हजारों निवासियों का नरसंहार कर रही है.
ईरान में जिस आर्थिक संकट ने राष्ट्रीय आक्रोश को जन्म दिया, उसका असर वहां के कुछ सबसे धनी लोगों पर कोई असर नहीं है. इसलिए वेलोग ईरान की सीमा से मात्र 60 मील दूर स्थित तुर्की के एक शहर वान में शरण लिए हुए हैं. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, द टेलीग्राफ के पत्रकारों ने एक नाइटक्लब में अभिजात वर्ग के ईरानी लोगों को इकट्ठा होते देखा.
खामेनेई शासन में चांदी काट रहे ये लोग
ये लोग शासन से लाभान्वित होते हैं. सबसे ज्यादा सरकारी मलाई खाने वाले लोगों में से हैं. वे फिलहाल ईरान छोड़कर चले गए हैं, क्योंकि उन्हें वहां रहने पर खुद के लिए खतरनाक माहौल बन जाने का डर था. तुर्की वे सुरक्षित महसूस कर सकते हैं. यह बातें क्लब में मौजूद एक ईरानी ने उस आउटलेट को बताई.
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने ईरान में अपने कारोबार से बहुत पैसा कमाया है. वे इसे खर्च करने के लिए यहां आते हैं, ताकि आराम से यहां पार्टी कर सके. ईरान और तुर्किए को अलग करने वाली पर्वत श्रृंखला के दूसरी ओर, हजारों प्रदर्शनकारी हफ्तों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों को जारी रखे हुए हैं.
ईरान में मुर्दाघरों के बाहर पड़े हैं अनगिनत शव
ईरान में हुए प्रदर्शनों से सामने आए भयावह फुटेज में कई मुर्दाघरों के बाहर कतारों में पड़े अनगिनत शव दिखाई दे रहे थे. बचे हुए लोगों ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उन्होंने राज्य की प्रमुख सैन्य शाखा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को हर किसी पर गोलियों की बौछार करते और शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों के सिर पर निशाना साधने की कोशिश करते देखा.
ईरान की न्यायपालिका ने संकेत दिया है कि मोहरेब (ईश्वर के विरुद्ध युद्ध छेड़ना) के आरोप में गिरफ्तार लोगों को मृत्युदंड का सामना करना पड़ सकता है. गिरफ्तार किए गए अनुमानित 24,000 प्रदर्शनकारियों में से कई पर यही आरोप है.
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कार्यकर्ता समूहों का अनुमान है कि 28 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से 3,100 लोगों की हत्या की जा चुकी है. हालांकि, डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि मरने वालों की संख्या 16,000 के करीब हो सकती है क्योंकि शासन डिजिटल ब्लैकआउट की आड़ में नरसंहार किया जा रहा है.
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