विदेश में पढ़ाई का सपना अक्सर चमकदार तस्वीरों के साथ देखा जाता है—बड़े कैंपस, नई लाइफ और बेहतर मौके। लेकिन इस सपने के पीछे एक ऐसी सच्चाई भी छिपी होती है, जहां रूटीन कभी रुकता नहीं। कनाडा में पढ़ रही भारतीय छात्रा ज्योति खरायत के एक वीडियो ने इसी हकीकत को सामने ला दिया है, जिसने हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
ज्योति ने अपने रोजमर्रा के जीवन की एक सच्ची झलक साझा की है. वीडियो में वह कॉलेज खत्म होते ही सीधे स्टारबक में अपनी शिफ्ट के लिए जाती नजर आती हैं. उनके पास आराम करने का लगभग कोई समय नहीं होता. यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को बेहद असली और जुड़ा हुआ महसूस हुआ.
वीडियो में ज्योति बताती हैं कि वह एक ऐसे चक्र में फंसी हुई हैं, जहां पढ़ाई और काम एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते, वह कहती हैं कि स्कूल जाने के लिए फीस चाहिए, और फीस के लिए नौकरी चाहिए. यह एक ऐसा चक्र है, जो हर दिन उनके जीवन को तय करता है. क्लास, काम, सफर और फिर वही रूटीन दोहराना. इस व्यस्त दिनचर्या में ठहरने की गुंजाइश बहुत कम है, फिर भी वह इसे लगातार निभा रही हैं.
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ज्योति का अनुभव केवल उनकी अपनी कहानी नहीं है, बल्कि विदेश में पढ़ने वाले कई छात्रों की हकीकत है. ऐसे छात्रों के लिए पार्ट-टाइम नौकरी सिर्फ अतिरिक्त कमाई का जरिया नहीं होती, बल्कि जरूरत बन जाती है. ट्यूशन फीस, किराया और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए उन्हें पढ़ाई के साथ लंबे समय तक काम करना पड़ता है. ऐसे में हर दिन एक संतुलन बनाने की चुनौती बन जाता है.
हालांकि इस वीडियो में सिर्फ संघर्ष ही नहीं, बल्कि एक सकारात्मक सोच भी नजर आती है. थकान और दबाव के बावजूद ज्योति इस सफर में खुशी ढूंढने की बात करती हैं. यही नजरिया लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है और उन्हें इस कहानी से जोड़ता है.
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर लोगों ने सहानुभूति जताई है. कई यूजर्स ने इसे अपनी जिंदगी से जुड़ा हुआ बताया, तो कुछ ने इसे विदेश में छात्र जीवन की सच्ची तस्वीर कहा. लोगों ने खासतौर पर इस बात की सराहना की कि बिना किसी दिखावे के इस सच्चाई को सामने रखा गया.
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