ड्रोन, मिसाइल और जंग के बीच 80 दिन...  मौत के साए में फंसे कैप्टन ने शेयर किया अनुभव

ईरान के पास समुद्र में फंसे भारतीय नाविकों ने 80 दिनों तक ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच खौफनाक हालात झेले. उपकरण खराब होने और युद्ध शुरू होने के बीच उनकी जिंदगी हर पल खतरे में थी, लेकिन आखिरकार उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया.

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ड्रोन और मिसाइलों के बीच 80 दिन तक मौत के साए में फंसे रहे भारतीय. ( Photo: India Today) ड्रोन और मिसाइलों के बीच 80 दिन तक मौत के साए में फंसे रहे भारतीय. ( Photo: India Today)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:07 AM IST

हाल ही में भारतीय नौसेना के एक कप्तान ने अपनी लाइफ का ऐसा एक्सपीरियंस शेयर किया, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया. यह घटना उस समय की है जब ईरान के पास समुद्र में हालात बेहद तनावपूर्ण थे और US और इजरायल से जुड़े हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही थीं. इस दौरान भारतीय नाविकों की एक टीम समुद्र के बीच अपने जहाज पर फंस गई थी और करीब 80 दिनों तक डर, अनिश्चितता और खतरे के बीच जीती रही.

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80 दिन का दर्दनाक इंतजार
जहाज पर फंसे इंडियन नेवी के कैप्टन ने बताया कि वे और उनके साथ मौजूद कुल 5 लोग लगभग 80 दिनों तक एक जहाज पर फंसे रहे.  यह समय उनके लिए बेहद कठिन और डरावना था. उन्होंने कहा कि उन्हें यह तक समझ नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है. हर दिन एक नई चिंता और डर लेकर आता था. बाहर की दुनिया से संपर्क सीमित था. इस दौरान वे पूरी तरह अनिश्चितता में जी रहे थे और हर पल यह डर था कि कुछ भी गलत हो सकता है.

जब मिलने वाला था निकलने का मौका
काफी समय बाद जब उनका 'डिटेंशन' खत्म हुआ और उन्हें वहां से निकलने का आदेश मिला, तो उन्हें थोड़ी राहत मिली. उन्होंने तुरंत योजना बनानी शुरू की कि जहाज को कैसे सुरक्षित बाहर निकाला जाए. लेकिन जैसे ही उन्होंने जहाज को तैयार करने की कोशिश की, उन्हें एक बड़ा झटका लगा. जहाज के जरूरी उपकरण खराब हो चुके थे. कैप्टन ने बताया कि उनके जहाज के कई जरूरी उपकरण खराब कर दिए गए थे. GPS काम नहीं कर रहा था, रडार बंद था और नेविगेशन चार्ट उपलब्ध नहीं थे. इन उपकरणों के बिना समुद्र में जहाज चलाना बेहद खतरनाक होता है.

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उन्होंने कहा कि अगर किसी तरह जहाज चला भी लिया जाए, तो वह भी एक तरह से नियमों के खिलाफ (क्राइम) माना जाता है. यानी उनके सामने दो ही रास्ते थे—या तो वहीं फंसे रहें या खतरा उठाकर जहाज चलाएं.

तभी शुरू हो गया युद्ध
इसी बीच हालात और बिगड़ गए. कप्तान ने बताया कि अचानक आसपास के इलाके में युद्ध जैसे हालात बन गए. उन्होंने कहा कि आसमान से कुछ गिरने की आवाजें आने लगीं. चारों तरफ धमाके सुनाई देने लगे, इसी बीच किसी ने कहा कि अमेरिका ने हमला किया. किसी ने कहा कि इजरायल ने हमला किया. फिर कुछ ही देर में यह साफ हो गया कि आसपास के इलाके में असली हमला हो रहा है और स्थिति बेहद खतरनाक हो चुकी है.

सबसे बड़ा सवाल – कहां जाएं?
उस समय उनके सामने सबसे बड़ा सवाल था. क्या जहाज पर रहना सुरक्षित है या जमीन पर जाना? कप्तान ने बताया कि जमीन पर लगातार मिसाइलें गिर रही थी और समुद्र में भी जहाजों पर हमले हो रहे थे. ऐसे में यह तय करना बहुत मुश्किल हो गया कि कौन सी जगह ज्यादा सुरक्षित है.

मदद के लिए भारतीय दूतावास से संपर्क
इन खतरनाक हालात में कप्तान ने Indian Embassy Tehran से संपर्क किया. उन्होंने मदद मांगते हुए कहा कि “हम 5 लोग यहां फंसे हुए हैं. हमारे पास कुछ भी नहीं है. जहाज में बहुत दिक्कत हैं. अगर आग लग जाए, तो उसे बुझाने का भी कोई साधन नहीं है.”

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लेकिन उस समय हालात इतने खराब थे कि तुरंत कोई सुरक्षित ठिकाना (सेफ हाउस) उपलब्ध नहीं था. अगले ही दिन हालात और खराब हो गए. कैप्टन ने बताया कि लगातार हमले होने लगे.आसपास के कई जहाजों को निशाना बनाया गया. हर पल ऐसा लग रहा था कि अगला हमला उनके जहाज पर हो सकता है. इस डर ने सभी को अंदर तक हिला दिया था.

आखिरकार मदद मिली
जब हालात और ज्यादा बिगड़ गए, तो कप्तान और उनकी टीम ने फिर से मदद के लिए संपर्क किया. इस बार उन्होंने तुरंत वहां से निकालने की अपील की. आखिरकार कई प्रयासों के बाद उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकाला गया. कप्तान ने इसके लिए देश के पीएम नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस.जयशंकर, अन्य अधिकारियों सहित मीडिया का भी धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि इन सभी की मदद से ही वे आज सुरक्षित वापस आ पाए हैं.

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