यही है जिंदगी... आयरलैंड में रह रहे इंडियन की कहानी वायरल

बेंगलुरु के एक IIT ग्रेजुएट सुरास नायक ने अमेजन में इंटरनल ट्रांसफर लेकर आयरलैंड के डबलिन में नौकरी शुरू की, जहां उनकी सालाना सैलरी करीब ₹1.3 करोड़ है. हालांकि वहां रहने का खर्च ज्यादा है, फिर भी उनका कहना है कि उनकी लाइफ क्वालिटी पहले से बेहतर हो गई है.

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और वे फिलहाल भारत लौटने की योजना नहीं बना रहे हैं. ( Photo: X/ @Suras Kumar Nayak) और वे फिलहाल भारत लौटने की योजना नहीं बना रहे हैं. ( Photo: X/ @Suras Kumar Nayak)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:34 AM IST

आज के समय में भारत के कई युवा बेहतर लाइफ स्टाइल, ज्यादा कमाई और अच्छे अवसरों की तलाश में विदेश का रुख कर रहे हैं. उनका मानना है कि बाहर जाकर न सिर्फ प्रोफेशनल ग्रोथ मिलती है, बल्कि लाइफस्टाइल, वर्क-लाइफ बैलेंस और सुविधाएं भी पहले से बेहतर हो जाती हैं. खासकर आईटी और टेक सेक्टर से जुड़े लोग यूरोप, अमेरिका जैसे देशों में जाकर अपने करियर को नई ऊंचाई देना चाहते हैं. ऐसी ही एक कहानी एक भारतीय इंजीनियर की है, जिसने बेंगलुरु से आयरलैंड जाकर न सिर्फ अपनी सैलरी दोगुनी की, बल्कि अपनी जिंदगी की गुणवत्ता में भी बड़ा बदलाव महसूस किया.

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विदेश जाने के बाद जिंदगी काफी बेहतर 
बेंगलुरु से आयरलैंड जाने वाले एक भारतीय इंजीनियर की कहानी इन दिनों चर्चा में है. 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर Suras Nayak का कहना है कि विदेश जाने के बाद उनकी जिंदगी बेहतर हो गई है, भले ही वहां खर्च ज्यादा है. सुरास अमेडन में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के तौर पर काम करते हैं. उन्होंने कंपनी के अंदर ट्रांसफर लेकर मार्च 2025 में आयरलैंड में काम शुरू किया. अब उनकी सालाना सैलरी करीब 1.3 करोड़ रुपये (लगभग 1.22 लाख यूरो) है, जो भारत में उनकी पहले की करीब 68 लाख रुपये की सैलरी से लगभग दोगुनी है. उन्होंने बताया कि विदेश में रहने का सपना उनका बचपन से था. हॉलीवुड फिल्में देखकर वे हमेशा दूसरे देश में रहने और वहां की लाइफस्टाइल को करीब से देखना चाहते थे.

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कंपनी ने उठाया पूरा खर्च
सुरास ने Indian Institute of Technology (IIT) Allahabad से पढ़ाई की और 2020 में अमेजन में नौकरी शुरू की. कुछ साल काम करने के बाद उन्हें पता चला कि कंपनी के कर्मचारी विदेश में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके बाद उन्होंने यूके, जर्मनी और आयरलैंड में मौके तलाशे और आखिरकार डबलिन को चुना. उन्होंने बताया कि जॉब मिलने के बाद उन्हें 6–8 हफ्तों में वर्क वीजा मिल गया. कंपनी ने उनका ट्रैवल, रहने की शुरुआती व्यवस्था और सामान भेजने का खर्च भी उठाया.

शुरुआत में दोस्त बनाना मुश्किल
हालांकि, ज्यादा सैलरी के बावजूद डबलिन में रहना आसान नहीं है. वहां किराया और रोजमर्रा का खर्च भारत के मुकाबले काफी ज्यादा है. सुरास अभी दो लोगों के साथ एक घर शेयर करते हैं, जिसका कुल किराया करीब 4,000 यूरो है, जिसमें उनका हिस्सा लगभग 1,450 यूरो है. उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में ठंडे मौसम और नए लोगों से जुड़ने में थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन बाद में सोशल ऐप्स और इवेंट्स के जरिए उन्होंने नए दोस्त बना लिए. अब सुरास को डबलिन की लाइफस्टाइल पसंद आने लगी है. खासकर प्रकृति के करीब रहना और यूरोप घूमने के मौके उन्हें काफी अच्छे लगते हैं. उनका कहना है कि फिलहाल वे 10–15 साल तक भारत लौटने की योजना नहीं बना रहे हैं. उनके मुताबिक, “मेरी लाइफ क्वालिटी पहले से बेहतर हो गई है और मैं यहां की लाइफ को काफी एंजॉय कर रहा हूं.”

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