'कुछ लाइट सी आई और...' शख्स ने बताया- ईरान के हमले के वक्त दुबई के आसमान में कैसा था माहौल?

वह बताते हैं कि वे बीस साल पहले काम के सिलसिले में दुबई आए थे और अब यह शहर उनका घर बन चुका है. शनिवार की दोपहर हमेशा की तरह ही शुरू हुई थी. वे बिजनेस बे के अपने अपार्टमेंट में थे, जब खिड़कियों से दूर-दूर तक धमाके जैसी आवाजें आने लगीं.

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 हमलों के दौरान शहर का माहौल कैसा था  (Photo:Reuter) हमलों के दौरान शहर का माहौल कैसा था (Photo:Reuter)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:30 PM IST

दुबई पर ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद जहां पूरी दुनिया चिंता में थी, वहीं दुबई में रह रहे लोगों ने इसे बेहद करीब से महसूस किया. खलीज टाइम्स में एक भारतीय प्रवासी ने अपना अनुभव शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि हमलों के दौरान शहर का माहौल कैसा था और लोगों ने इस तनावपूर्ण स्थिति को कैसे जिया.

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वह बताते हैं कि वे बीस साल पहले काम के सिलसिले में दुबई आए थे और अब यह शहर उनका घर बन चुका है. शनिवार की दोपहर हमेशा की तरह ही शुरू हुई थी. वे बिजनेस बे के अपने अपार्टमेंट में थे, जब खिड़कियों से दूर-दूर तक धमाके जैसी आवाजें आने लगीं. पहले लगा कि ये किसी निर्माण कार्य की आवाज है.दुबई में यह आम बात है. लेकिन जल्द ही व्हॉट्सऐप पर संदेश आने लगे- पहले ड्रोन का जिक्र, फिर मिसाइलों का.

उसी दिन उन्हें मडोन में एक रिश्तेदार के यहां इफ्तार पर जाना था. घर में माहौल तनावपूर्ण था. उनकी मां बार-बार मैसेज पढ़कर पूछ रहीं थीं-बेटा, जाना ठीक रहेगा? उधर उनकी पत्नी एरम ने हंसते हुए कहा-अगर अभी कैंसिल किया, तो दोबारा रोजा रखना पड़ेगा. कुछ पकाया भी नहीं है. आखिरकार उन्होंने आधिकारिक अपडेट देखकर निकलने का फैसला किया.

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दुबई मेंं ईरानी मिसाइल (Photo:AFP)

वे लिखते हैं कि रास्ते में ट्रैफिक सामान्य था. डिलीवरी बाइक्स पहले की तरह सड़क पर दौड़ती रहीं, रेस्तरां भरे हुए थे.किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही किलोमीटर दूर आसमान में इंटरसेप्ट चल रहे हैं. इफ्तार में माहौल सामान्य था.ज्यादा खाना, ज्यादा बातें और टीवी पर चल रहा पाकिस्तान–श्रीलंका का टी20 मैच.

मगरिब के बाद जैसे ही वे बैकयार्ड में पहुंचे, आसमान साफ था. तभी एक चमकता हुआ तेज रौशनी की धार आसमान काटता हुआ निकला और कुछ सेकंड बाद हल्की गड़गड़ाहट सुनाई दी. किसी ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा-इंटरसेप्ट काम कर रहे हैं. सब लोग आसमान की तरफ देखने लगे. कुछ देर बाद बातचीत फिर शुरू हो गई, लेकिन माहौल बदल चुका था.

Photo: Reuters

इस प्रवासी का फोन लगातार बज रहा था. रिश्तेदार पूछ रहे थे-ठीक हो न? वीडियो देखे? भारत से पुराने साथी लाइव जुड़ने को कह रहे थे. वे कहते हैं कि पत्रकार होने का एक नुकसान यह है कि लोग मान लेते हैं कि आपके पास गुप्त जानकारी होती है. एक व्यक्ति ने रात में फोन करके पूछा-अगला हमला कब होगा?” उन्होंने जवाब दिया-मैं ऑपरेशन रूम में नहीं, घर पर हूं.

वे बताते हैं कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो घूम रहे थे,लेकिन उनमें से कई AI जनरेटेड निकले. स्थिति 2024 की बारिश जैसी लग रही थी, जब अफवाहें असली खबरों से तेज़ फैल रही थीं. इसी बीच आधिकारिक अपडेट लगातार लोगों से अपील कर रहे थे कि सिर्फ वैरिफाइड जानकारी पर भरोसा करें.

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कुछ घटनाएँ हुईं.एयरपोर्ट पर गिरे मलबे से चार कर्मचारी घायल हुए, पाम जुमेरा के पास लगी आग में चार और लोग ज़ख्मी हुए. लेकिन कुल मिलाकर शहर की स्थिति नियंत्रित रही. कई दोस्त कुछ दिनों के लिए दूसरे अमीरात जाने की सोच रहे थे, लेकिन अधिकांश लोग रुके रहे.
 

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