सिर्फ 9 रुपये हाइक पर भड़का इंजीनियर, कहा- गुलाम की तरह काम कर रहा हूं

दिल्ली-एनसीआर के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने रेडिट पर पोस्ट कर बताया कि 2025 में उन्हें सिर्फ ₹9 का इंक्रीमेंट मिला, जबकि इस साल कोई हाइक नहीं मिला. उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी में 2 साल का सर्विस बॉन्ड है.

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 2 साल से पहले नौकरी छोड़ने पर 1.5 लाख रुपये देने होंगे. ( Photo: Pexels) 2 साल से पहले नौकरी छोड़ने पर 1.5 लाख रुपये देने होंगे. ( Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी नौकरी से जुड़ी परेशानियों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसकी काफी चर्चा हो रही है. इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि उन्हें 2025 में सिर्फ 9 रुपये की सैलरी हाइक मिली, जबकि 2026 में उन्हें कोई इंक्रीमेंट नहीं दिया गया. इस वजह से वे खुद को बेहद निराश और फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं. इंजीनियर ने बताया कि उन्होंने मई 2024 में एक कंपनी में इंटर्नशिप शुरू की थी. यह इंटर्नशिप 6 महीने की थी, जिसके बाद उन्हें वहीं फुल-टाइम नौकरी मिल गई. उनका शुरुआती पैकेज 4.25 लाख रुपये सालाना था, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी उम्मीद से काफी कम थी. उन्होंने यह नौकरी इसलिए स्वीकार की क्योंकि उस समय जॉब मार्केट कमजोर था और उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं थे.

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कई वजहों से नहीं छोड़ पा रहे नौकरी
उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी में 2 साल का सर्विस बॉन्ड है. यानी अगर वे 2 साल से पहले नौकरी छोड़ते हैं, तो उन्हें 1.5 लाख रुपये देने होंगे. इसके अलावा, नौकरी छोड़ने के लिए 6 महीने का नोटिस पीरियड भी देना पड़ता है. इन नियमों के कारण वे चाहकर भी आसानी से नौकरी नहीं छोड़ पा रहे हैं. सबसे ज्यादा हैरानी वाली बात उनकी सैलरी बढ़ोतरी को लेकर है. उन्होंने बताया कि पहले साल उन्हें सिर्फ 9 रुपये का इंक्रीमेंट मिला. उन्होंने कहा और इस साल तो वह भी नहीं मिला. यानी दो साल काम करने के बाद भी उनकी सैलरी लगभग वही की वही बनी हुई है.

इंजीनियर ने अपने काम के माहौल को भी काफी मुश्किल बताया. उनका कहना है कि उन्हें बहुत ज्यादा काम करना पड़ता है. उन्हें ऑफिस के काम के साथ-साथ क्लाइंट साइट पर भी जाना होता है, जिससे उनका काम और बढ़ जाता है. उन्होंने लिखा कि वे गुलाम की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें ट्रेवलिंग के लिए कोई एक्स्ट्रा पैसा नहीं दिया जाता. बल्कि जब वे कंपनी के मुख्य दफ्तर जाते हैं, तो शटल के किराए के नाम पर उनके वेतन से पैसे काट लिए जाते हैं. इससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है.

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मेहनत के अनुसार नहीं मिल रही सैलरी
इंजीनियर के अनुसार, उन्हें अक्सर वीकेंड यानी शनिवार-रविवार को भी काम करना पड़ता है. हालांकि कंपनी उन्हें इसके बदले छुट्टी देती है, लेकिन उनका मानना है कि इतनी मेहनत के मुकाबले उन्हें सही वेतन और सम्मान नहीं मिल रहा. उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने प्रोजेक्ट बदलने की कोशिश की, तो कंपनी ने उन्हें प्रमोशन दे दिया, लेकिन उनकी असली समस्या कम वेतन और ज्यादा काम वैसी ही बनी रही. उनका कहना है कि वे अपने काम में कोई समझौता नहीं करना चाहते, लेकिन उन्हें जिस तरह का व्यवहार और सैलरी मिल रही है, उससे वे काफी परेशान हैं. अपनी पोस्ट में उन्होंने अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए लिखा कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वे एक ऐसे गड्ढे में फंस गए हैं, जहां से निकलना मुश्किल है वे न तो पैसे बचा पा रहे हैं और न ही संतुष्ट जीवन जी पा रहे हैं. 

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