मास्टर डिग्री कर रहा छात्र बना साइकिल कोच, लोगों को साइकिल सिखाकर 2 साल में कमाए 35 लाख

चीन में पढ़ाई कर रहे ली नाम के एक छात्र ने अपने खाली समय का सही इस्तेमाल करते हुए वयस्कों और बच्चों को साइकिल चलाना सिखाना शुरू किया. लोगों की जरूरत को समझकर उसने ट्रेनिंग पैकेज बनाया और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार किया. सिर्फ दो साल में उसने करीब 700 लोगों को साइकिल चलाना सिखाया और 35 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली.

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कहानी दिखाती है कि सही आइडिया, मेहनत और समझदारी से पढ़ाई के साथ भी अच्छी कमाई की जा सकती है. ( Photo: Pexels) कहानी दिखाती है कि सही आइडिया, मेहनत और समझदारी से पढ़ाई के साथ भी अच्छी कमाई की जा सकती है. ( Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:56 AM IST

चीन में पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने साइकिल चलाना सिखाकर ऐसी कमाई की, जिसकी अब हर तरफ चर्चा हो रही है. शंघाई यूनिवर्सिटी ऑफ स्पोर्ट में मास्टर डिग्री कर रहा ली नाम का छात्र पिछले दो सालों में यंग प्रोफेशनल और बच्चों को साइकिल चलाना सिखाकर 35 लाख रुपये से ज्यादा कमा चुका है. ली ने यह काम अपने खाली समय में शुरू किया. उसने देखा कि बड़े शहरों में बहुत से लोग साइकिल खरीद तो रहे हैं, लेकिन उन्हें चलानी ठीक से नहीं आती. इसी जरूरत को समझते हुए उसने साइकिल ट्रेनिंग देना शुरू किया. पहले उसने सोशल मीडिया पर साइकिल चलाने से जुड़े आसान वीडियो डाले और सिर्फ दो महीने में उसे पहला पेड ऑर्डर मिल गया. इसके बाद उसका यह साइड बिजनेस लगातार बढ़ता चला गया.

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800 युआन का ‘सफलता गारंटी’ पैकेज
ली अपने छात्रों को 800 युआन (करीब 110 डॉलर) का एक खास पैकेज देता है. इसमें वह गारंटी देता है कि कोर्स खत्म होते-होते व्यक्ति साइकिल चलाना सीख जाएगा. आमतौर पर यंग प्रोफेशनल लोग 1.5 से 2 घंटे की दो क्लास में साइकिल चलाना सीख लेते हैं. बच्चों को थोड़ा ज्यादा समय लगता है, क्योंकि उनका ध्यान जल्दी भटकता है और उनकी शारीरिक क्षमता कम होती है. अब तक ली 4 साल से लेकर 68 साल तक के करीब 700 लोगों को साइकिल चलाना सिखा चुका है. इनमें से ज्यादातर लोग 20 से 30 साल की उम्र के हैं और करीब 70 फीसदी महिलाएं हैं. ली खुद मानता है कि उसे अंदाजा नहीं था कि साइकिल सिखाने का इतना बड़ा बाजार होगा.

ऑफिस जाने और टीम-बिल्डिंग के लिए सीख रहे लोग
कई लोग ऑफिस आने-जाने के लिए साइकिल चलाना सीखते हैं, तो कुछ कंपनियां टीम-बिल्डिंग एक्टिविटी के लिए अपने कर्मचारियों को साइकिल ट्रेनिंग दिलवाती हैं. एक महिला छात्रा ने बताया कि उसने अपनी जिंदगी का एक पुराना अफसोस खत्म करने के लिए साइकिल सीखने का फैसला किया. बचपन में उसे कभी साइकिल चलाने का मौका नहीं मिला था, लेकिन बेटी को साइकिल सीखते देखकर उसे भी हिम्मत मिली. सिर्फ एक घंटे की ट्रेनिंग के बाद वह खुद साइकिल चलाने लगी.

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बचपन के डर को पहले करता है दूर
ली का कहना है कि स्पोर्ट्स एजुकेशन की पढ़ाई से उसे काफी फायदा मिलता है. वह थोड़े समय में समझ जाता है कि किसी व्यक्ति को साइकिल सीखने में कितना वक्त लगेगा. उसका मानना है कि कई लोग बचपन में गिरने के डर की वजह से साइकिल से डरते हैं, इसलिए वह पहले उनके मन का डर दूर करता है. पढ़ाई पूरी होने के बाद ली अपनी ट्रेनिंग को और बेहतर बनाना चाहता है और शंघाई के बाहर झेजियांग और जियांग्सू जैसे इलाकों में भी अपनी सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहा है. यह कहानी दिखाती है कि सही आइडिया और मेहनत से पढ़ाई के साथ-साथ अच्छी कमाई भी की जा सकती है.

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