यहां चमकते सफेद दांतों को नहीं, ब्लैक टीथ को मानते हैं ब्यूटी! महिलाएं ऐसे करती हैं काले दांत

चीन में एक ऐसा समुदाय है जहां महिलाएं चमचमाते मोतियों से दांत नहीं रखतीं. टीनएज से ही अपने दांतों को काला करने लगती हैं. ऐसे में समझते हैं कि इनलोगों में ऐसा करने की वजह क्या है.

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यहां महिलाओं की खूबसूरती का पैमाना हैं काले दांत (Photo - X/ @fasc1nate) यहां महिलाओं की खूबसूरती का पैमाना हैं काले दांत (Photo - X/ @fasc1nate)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:56 PM IST

मोतियों से सफेद और चमचमाते दांत खूबसूरती का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. कई बार मुस्कुराते चेहरे पर सुंदर दंत पंक्तियां खूबसूरती का पैमाना बन जाती है. मगर दुनिया में ऐसे लोग भी हैं, जिनके बीच काले दांतों का मतलब असली ब्यूटी होता है. चलिए जानते हैं ये लोग कौन हैं और ऐसा क्यों करते हैं. 

चीन के युन्नान के बुलंग जातीय समूह के लोग किशोरावस्था में पहुंचने पर अपने दांत काले क्यों कर लेते हैं? इन पर्वतीय लोगों में लकड़ी जलाने से निकलने वाले धुएं का इस्तेमाल कर दांतों को काला करने की परंपरा है. हालांकि, अब ये रिवाज लुप्त हो रहा है. फिर भी इस रस्म की विरासत आज भी कायम है.

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साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के बुलंग लोगों में रांची नामक एक असामान्य रस्म होती है. इसमें वे वयस्क होने और सामाजिक अधिकारों के प्रतीक के रूप में अपने दांतों को काले रंग से रंग लेते हैं. एक हजार साल से भी अधिक के इतिहास वाला यह जातीय समूह मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत में पाए जाते हैं.आज बुलंग समुदाय के लगभग 127,000 लोग हैं.

सुंदरता और शक्ति का प्रतीक हैं काले दांत
पहाड़ों और जंगलों में रहने वाले ये लोग काले रंग के दांत को सुंदरता और शक्ति का प्रतीक मानते हैं, उनका मानना ​​है कि यह बुराई और आपदा से बचाता है. 14 या 15 वर्ष की आयु में, लड़के और लड़कियां रांची नामक एक रस्म से गुजरते हैं. इसमें वे एक-दूसरे के दांतों को रंगते हैं.

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इस प्रक्रिया में अम्लीय फल खाना या दांतों पर खट्टा रस लगाना शामिल है. फिर जलती हुई लकड़ी या चीड़ की राल के धुएं से दांतों को रंगते हैं. कुछ लोग तंबाकू और चूने के साथ सुपारी भी चबाते हैं, ताकि इनके दांत काले हो जाएं. यह अनुष्ठान, जो कई दिनों तक चल सकता है. यह एक महत्वपूर्ण संस्कार है, जो बच्चों को गांव के जीवन में पूरी तरह से शामिल होने के लिए तैयार होने का प्रतीक है. जो बच्चे अपने दाँत काले नहीं करते, उनके सामाजिक अधिकार सीमित हो जाते हैं.

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प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करने वाली यह परंपरा दांतों को मजबूत बनाने और पाचन में सहायता करने के लिए भी जानी जाती है.बड़े होने पर लड़कों को लंबी छुरी, थैला और कंबल जैसी चीजें दी जाती हैं, जबकि लड़कियों को नए कपड़े, एक स्टूल और बांस की टोकरी मिलती है.

युन्नान के कुछ क्षेत्रों में, बुजुर्ग लोगों को अभी भी काले दांतों के साथ देखा जा सकता है, जो इस लुप्त होती प्रथा का एक जीवंत प्रमाण हैं. दांतों को काला करना केवल बुलंग लोगों तक ही सीमित नहीं है. जापान और वियतनाम जैसे देशों में भी एक समय इसे सुंदरता के साथ जोड़कर देखा जाता था. 

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जापान और वियतनाम में भी दांत काला करते थे लोग
जापान में, प्राचीन कुलीन लोग अपने दांतों को रंगने के लिए सिरका और लोहे के बुरादे का इस्तेमाल करते थे. क्योंकि काले दांत सुंदरता और कुलीनता का प्रतीक माने जाते थे. समुराई योद्धाओं में, काले दांतों को वफादारी का प्रतीक भी माना जाता था.

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वियतनाम में, यह प्रथा हजारों साल पुरानी है. जहां लोग अपने दांतों को काला करने के लिए पान, कोयला और मोम का इस्तेमाल करते थे. यह मानते हुए कि सफेद दांत जानवरों और राक्षसों का प्रतीक हैं. दुनिया के कई ऐसे देशों में ऐसे रिवाज प्रचलित हैं, जिनके बारे में जानकर हमें हैरानी हो सकती है, लेकिन वहां के लोगों के लिए ये सामान्य बातें हैं.

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