सोशल मीडिया पर एंप्लॉयी की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें उसने अपने ऑफिस में हुए एक ऐसे अनुभव को शेयर किया है. इस पोस्ट के वायरल होने के बाद से ऑफिस वर्क कल्चर को लेकर बहस तेज हो गई है. इस पोस्ट में एंप्लॉयी ने बताया कि कंपनी ने उसकी पीठ दर्द की समस्या को नजर अंदाज कर दिया, जबकि उसी समय कंपनी के सीईओ ने हजारों डॉलर की लग्जरी कुर्सी खरीदी और उसे मीटिंग में दिखाया.
यह पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर शेयर की गई थी. पोस्ट का टाइटल था—“सीईओ ने ऑल-हैंड्स मीटिंग में 3,000 डॉलर (लगभग 2.7 लाख रुपये) की कुर्सी दिखाई, लेकिन एचआर ने कहा कि मेरे लिए नई कुर्सी के लिए बजट नहीं है. पोस्ट सामने आने के बाद इंटरनेट पर वर्क प्लेस पर कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कंपनियों की प्राथमिकताओं को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है.
2019 से कंपनी में काम कर रहा युवक
पोस्ट लिखने वाले एंप्लॉयी ने बताया कि वह साल 2019 से कंपनी में काम कर रहा है. उसकी नौकरी ऐसी है जिसमें उसे रोजाना लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना पड़ता है. उसने कहा कि वह आमतौर पर हर दिन लगभग 8 से 10 घंटे डेस्क पर बैठकर काम करता है. लगातार लंबे समय तक बैठने की वजह से पिछले कुछ महीनों में उसकी कमर में दर्द काफी बढ़ गया. दर्द इतना ज्यादा हो गया कि उसे अपने काम करने के तरीके में बदलाव की जरूरत महसूस होने लगी. इसलिए उसने कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) विभाग से संपर्क किया और अनुरोध किया कि उसे एक आरामदायक और एर्गोनॉमिक कुर्सी या कमर के लिए सपोर्ट दिया जाए, ताकि वह बिना दर्द के काम कर सके.
लेकिन कर्मचारी को जो जवाब मिला, उससे वह काफी निराश हो गया. एचआर विभाग ने उसे साफ शब्दों में कहा कि कंपनी के बजट में अभी एर्गोनॉमिक अपग्रेड के लिए पैसे उपलब्ध नहीं हैं. यानी कंपनी फिलहाल कर्मचारियों को ऐसी सुविधाएं देने की स्थिति में नहीं है.
सीईओ की महंगी कुर्सी ने बढ़ाया सवाल
एंप्लॉयी के अनुसार, इसी दौरान कंपनी की एक ऑल-हैंड्स मीटिंग हुई. इस मीटिंग में कंपनी के सीईओ ने अपनी नई लग्जरी ऑफिस चेयर सबको दिखाई. बताया गया कि इस कुर्सी की कीमत करीब 3,000 डॉलर यानी लगभग 2.7 लाख रुपये है. यह देखकर कर्मचारी और भी हैरान रह गया. उसने कहा कि उसे इस बात से कोई समस्या नहीं है कि सीईओ अपने निजी पैसों से महंगी चीजें खरीदते हैं. लेकिन उसे यह समझ नहीं आया कि अगर कंपनी के पास इतनी महंगी कुर्सी खरीदने की क्षमता है, तो एंप्लॉयी के लिए कम से कम बुनियादी आराम की सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती.
खुद कुर्सी खरीदने की पेशकश भी ठुकराई
एंप्लॉयी ने पोस्ट में लिखा कि एक साधारण कमर के कुशन या बेहतर कुर्सी की व्यवस्था करने से कर्मचारियों की सेहत पर पॉजिटिव असर पड़ सकता है. लेकिन कंपनी ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया. निराश होकर एंप्लॉयी ने एक और तरीका अपनाने की कोशिश की. उसने एचआर से कहा कि अगर कंपनी खर्च नहीं कर सकती, तो वह खुद अपने पैसे से एक बेहतर कुर्सी खरीदकर ऑफिस में इस्तेमाल कर लेगा. उसने यह भी प्रस्ताव दिया कि अगर वह भविष्य में नौकरी छोड़ देता है, तो वह कुर्सी ऑफिस में ही छोड़ देगा.
लेकिन कर्मचारी के अनुसार एचआर विभाग ने इस प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया. इससे वह और ज्यादा परेशान हो गया. उसके मन में यह सवाल उठने लगा कि आखिर वह ऐसी कंपनी के लिए क्यों काम कर रहा है जो अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य की परवाह नहीं करती.
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
जब यह पोस्ट Reddit पर वायरल हुई, तो कई यूजर्स ने इस पर अपनी राय दी. बहुत से लोगों ने कर्मचारी का समर्थन किया और कहा कि कंपनियों को कर्मचारियों की सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए. कुछ यूजर्स ने सलाह दी कि एंप्लॉयी को अपनी सेहत से समझौता नहीं करना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक खराब कुर्सी पर बैठने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कई कंपनियां कर्मचारियों के स्वास्थ्य से ज्यादा अपनी छवि और दिखावे पर ध्यान देती हैं. कुल मिलाकर यह मामला एक बार फिर इस बात पर चर्चा शुरू कर देता है कि वर्क प्लेस पर एंप्लॉयी के स्वास्थ्य और आराम को कितना महत्व दिया जाना चाहिए.
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