ऑफिस को आमतौर पर एक पेशेवर और सुरक्षित माहौल माना जाता है, लेकिन कई बार कर्मचारियों को कार्यस्थल पर मानसिक दबाव, ताने और अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ता है. कुछ मामलों में बॉस या सहकर्मी मजाक के नाम पर ऐसी टिप्पणियां करते हैं, जो धीरे-धीरे मानसिक उत्पीड़न का रूप ले लेती हैं. लगातार ताने सुनने और अपमान झेलने से कर्मचारियों का आत्मविश्वास टूटने लगता है और उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है. हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक महिला कर्मचारी को उसके बॉस द्वारा बार-बार अपमानजनक शब्द कहकर चिढ़ाया गया. मामला इतना बढ़ गया कि यह अदालत तक पहुंचा और कर्मचारी को लाखों रुपये का मुआवजा मिला.
आलू-आलू कहकर चिढ़ाता था बॉस
एक महिला कर्मचारी को अपने बॉस द्वारा बार-बार नस्लीय मजाक उड़ाने के मामले में लगभग 29 लाख रुपये का मुआवजा मिला है. रोजगार न्यायाधिकरण ने पाया कि महिला को उसके आयरिश मूल की वजह से ऑफिस में बार-बार “आलू” कहकर चिढ़ाया जाता था. महिला का नाम Bernadette Hayes बताया गया है. उसने आरोप लगाया कि उसके बॉस Mick Atkins लगातार उसे 'आलू' कहकर बुलाते थे और उसकी विरासत का मजाक उड़ाते थे.
कई लोगों को पैनिक अटैक की समस्या
हेज़ ने बताया कि बॉस अक्सर यह बात ऑफिस के बाकी कर्मचारियों के सामने कहते थे. यहां तक कि उन्होंने व्हाट्सऐप मैसेज में भी उसे 'आलू' लिखकर भेजा. इससे वह खुद को अपमानित, असुरक्षित और बेहद परेशान महसूस करने लगी. महिला का कहना है कि ऑफिस का माहौल इतना खराब हो गया था कि उसे पैनिक अटैक और अनिद्रा की समस्या होने लगी. कई बार वह काम पर जाने से पहले अपनी कार में बैठकर खुद को हिम्मत देती थी ताकि ऑफिस में जा सके.
कोर्ट ने दिया 29 लाख मुआवजे का ऐलान
जब उससे पूछा गया कि उसने नौकरी क्यों नहीं छोड़ी, तो उसने बताया कि उसकी निजी परिस्थितियां ऐसी थीं कि उसे नौकरी की बहुत जरूरत थी. इसी वजह से वह मजबूरी में काम करती रही. मामले की सुनवाई के बाद जज ने माना कि यह सिर्फ मजाक या आपसी नोकझोंक नहीं थी, बल्कि कर्मचारी के साथ गलत व्यवहार किया गया. इसलिए अदालत ने महिला को कुल 23,526 पाउंड (करीब 29 लाख रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया. हालांकि, मिक एटकिंस ने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि पूरा मामला बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है.
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