बेंगलुरु के एक कपल इन दिनों चर्चा में हैं, क्योंकि वे अपने पालतू कुत्ते पर हर महीने करीब 12,000 से 15,000 रुपये खर्च करते हैं. इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि यह कपल बेंगलुरु के इंदिरा नगर में रहता है और दोनों अच्छी नौकरी करते हैं. उनके बच्चे नहीं हैं, लेकिन उनके पास एक गोल्डन रिट्रीवर कुत्ता है, जिसका वे बहुत ध्यान रखते हैं. इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस चल रही है. इस ट्रेंड को DINKWAD (Double Income, No Kids, With A Dog) कहा जा रहा है, जिसमें लोग पालतू जानवरों को परिवार की तरह मानकर उन पर खुलकर खर्च करते हैं.
खाना, ग्रूमिंग से लेकर कुत्ते के कई खर्च
एक स्टार्टअप फाउंडर गगन अरोड़ा ने लिंक्डइन पर इस बारे में पोस्ट शेयर किया. उन्होंने बताया कि जब वह कपल से मिले, तो उन्होंने देखा कि कुत्ते के लिए घर में महंगे प्रोडक्ट्स रखे हुए थे. जैसे ₹2400 का डॉग फूड, खास सप्लीमेंट्स और ग्रूमिंग के सामान. यहां तक कि फ्रिज में कुत्ते के खाने के लिए अलग से जगह भी बनाई गई थी. जब उनसे खर्च के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि हर महीने 12 से 15 हजार रुपये सिर्फ कुत्ते पर खर्च हो जाते हैं. इसमें खाना, ग्रूमिंग (साफ-सफाई), डॉक्टर के पास जाना, खिलौने और ट्रीट शामिल हैं. मजेदार बात यह रही कि जब उनसे पूछा गया कि वे अपने खाने पर कितना खर्च करते हैं, तो वे हंस पड़े और बोले- शायद उससे कम.
खुद से ज्यादा कुत्ते पर खर्च
इस तरह के लोगों को आजकल DINKWAD कहा जाता है, यानी Double Income, No Kids, With A Dog (दो कमाने वाले, बच्चे नहीं, लेकिन कुत्ता है). ऐसे लोग अपने पालतू जानवरों पर बिना ज्यादा सोचे खर्च करते हैं, क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ जानवर नहीं, परिवार का हिस्सा होता है. गगन अरोड़ा के अनुसार, जब लोग अपने लिए खरीदते हैं तो कीमत देखते हैं, लेकिन जब किसी अपने के लिए खरीदते हैं, जैसे पालतू जानवर तो वे क्वालिटी और भरोसे को ज्यादा महत्व देते हैं. एक यूजर ने लिखा- हम वही कपल हैं. हमारा कुत्ता ऑर्गेनिक खाना खाता है जबकि हम साधारण खाना खाते हैं. दवाइयों और एनिमल डॉक्टर पर होने वाले खर्च की तो बात ही मत कीजिए. उसके पास मुझसे कहीं ज़्यादा खिलौने हैं और फिर भी हमें लगता है कि हम उसके लिए कम ही कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस पर अलग-अलग राय दी. कुछ ने कहा कि यह सही है, क्योंकि पालतू जानवर भी परिवार का हिस्सा होते हैं. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि बच्चों की जिम्मेदारी न होने की वजह से लोग पालतू जानवरों पर ज्यादा खर्च कर पा रहे हैं. कुल मिलाकर, यह मामला दिखाता है कि आजकल शहरों में लोगों का पालतू जानवरों के प्रति प्यार और खर्च दोनों तेजी से बढ़ रहा है.
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