AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने स्टार्टअप दुनिया का काम करने का तरीका बदल दिया है. पहले जिन कामों के लिए पूरी टीम की जरूरत होती थी, अब वही काम सॉफ्टवेयर कुछ मिनटों में कर देता है. इसी कारण कई फाउंडर अब टीम बढ़ाने के बजाय ऑटोमेशन और कम खर्च में काम चलाने पर ध्यान दे रहे हैं.लेकिन एक फाउंडर के लिए यह बदलाव फायदे का होने के साथ-साथ बहुत दर्दनाक भी साबित हुआ.
कनाडा में रहने वाले फाउंडर रियैलिटी के संस्थापक जॉर्ज प्यू ने एक्स पर एक पोस्ट में अपनी सबसे मुश्किल कहानी शेयर की. उन्होंने लिखा कि हम 2023 में 14 लोगों से 5 लोग रह गए. यह मेरे करियर का सबसे दर्दनाक पल था.
उन्होंने बताया कि टीम कम करना किसी योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि बढ़ते खर्च और कम होती कमाई के कारण कंपनी को बचाने के लिए यह कदम उठाना पड़ा.
पैसा बचा, लेकिन भावनाएं टूट गईं
जॉर्ज प्यू ने एक साल में अपनी टीम को 14 से घटाकर 5 कर दिया. इसके बाद पूरे दो साल किसी को नई नौकरी पर नहीं रखा.उन्होंने लिखा कि AI ने उन कई कामों को संभाल लिया जिनके लिए पहले उन्हें लोगों की जरूरत लगती थी. उन्होंने कहा कि हमने हर वह काम AI से करवाया, जिसके लिए हमें लगता था कि इंसान चाहिए.
27 साल के प्यू ने माना कि यह उनके लिए सबसे अच्छा आर्थिक फैसला था, लेकिन लोगों को हटाना उन्हें अंदर से तोड़ गया. उन्होंने लिखा कि सबसे अच्छा फाइनैंशियल फैसला, लेकिन मेरे करियर का सबसे बुरा भावनात्मक अनुभव. कोई नहीं बताता कि कम लोगों की टीम पर चलना कितना अकेला कर देता है.
देखें पोस्ट
एआई के दौर की कड़वी सच्चाई
उनकी पोस्ट पर एक्स यूजर्स ने अलग–अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं. कई लोगों ने कहा कि वे इस दर्द और दबाव को समझते हैं.एक यूजर ने लिखा कि मैं भी इसी दौर से गुजरा. तीसरे महीने में मुझे बहुत अकेलापन महसूस होने लगा. बाद में पता चला कि मैं 11 हफ्तों तक असल में किसी से बात ही नहीं कर पाया था. सारी बातें एक बॉट से हो रही थीं.
दूसरे ने कमेंट करते हुए लिखा कि AI की जीत सबको दिखती है, लेकिन उसकी कीमत कोई नहीं बताता. आप दक्षता का जश्न नहीं मना सकते, जब आपकी पुरानी टीम नौकरी ढूंढ रही हो.एक यूजर ने कहा कि AI ने काम तो कर दिया, लेकिन उन लोगों की वाइब्स नहीं दे पाया जो दिल से कंपनी के लिए मेहनत करते थे.एक और ने लिखा कि कम लोग मतलब ज्यादा जिम्मेदारी आपके ऊपर. AI मदद करता है, लेकिन बोझ फिर भी आप पर बढ़ जाता है.
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