एक तरफ करोड़ों की कमाई, दूसरी तरफ बेहद सादा जीवन. यह कहानी एक ऐसे भारतीय CTO (चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर) की है, जो अमेरिका की एक फॉर्च्यून 500 कंपनी में काम करते हैं, लेकिन दिखावे से दूर रहते हैं. बेंगलुरु के एक बिजनेसमेन अभिनव खरे ने बताया कि उनके दोस्त एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में CTO हैं और भारत में कंपनी के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को संभालते हैं. उनकी फिक्स सैलरी करीब 3 करोड़ रुपये सालाना है. इसके अलावा उन्हें स्टॉक ऑप्शन भी मिलते हैं. कुल मिलाकर उनकी सालाना कमाई 8 से 9 करोड़ रुपये के बीच है.
चलाते हैं 12 साल पुरानी कार
इतनी बड़ी कमाई के बावजूद 46 साल के यह अधिकारी बहुत सादा जीवन जीते हैं. वे 12 साल पुरानी फिएट लीनिया कार चलाते हैं. कोई लग्जरी ब्रांड के कपड़े या घड़ी नहीं पहनते. डिजाइनर ब्रांड पर पैसा खर्च नहीं करते. वे अपनी ज्यादातर कमाई निवेश कर देते हैं.
घरेलू स्टाफ पर खुलकर खर्च
हालांकि, वे अपने घरेलू कर्मचारियों (House Helper) पर दिल खोलकर खर्च करते हैं. उनके घर में 5 फुल-टाइम हेल्पर काम करते हैं. सभी हेल्पर को अच्छा वेतन दिया जाता है. उनके जुड़वां बच्चे हैं और वे जहां भी जाते हैं, बच्चों की नैनी को साथ ले जाते हैं. यानी वे फैशन और ब्रांड्स पर पैसा नहीं खर्च करते, लेकिन परिवार के आराम पर कोई समझौता नहीं करते. यूजर ने आगे बताया कि मॉरीशस की छुट्टियों के दौरान उन्होंने बच्चों और नैनी के लिए अलग सुइट बुक कराया, जिसका किराया लगभग 35 हजार रुपये प्रति रात था. इससे साफ है कि वे दिखावे पर नहीं, बल्कि सुविधा और आराम पर पैसा खर्च करना पसंद करते हैं.
काम के प्रति जुनून
उनके पास 23 साल का अनुभव है. टेक्नोलॉजी, बड़े प्लेटफॉर्म और डेटा आर्किटेक्चर में उनकी गहरी रुचि है. यहां तक कि वीकेंड पर क्रिकेट खेलते समय भी वे टेक्निकल विषयों पर चर्चा करते रहते हैं.
रिटायरमेंट का विकल्प, फिर भी काम जारी
46 साल की उम्र में वे आराम से रिटायर हो सकते हैं, लेकिन उन्हें अपना काम पसंद है और वे उसे एंजॉय करते हैं. यह कहानी बताती है कि ज्यादा कमाई का मतलब हमेशा दिखावा नहीं होता. कुछ लोग ब्रांड्स के बजाय सादगी, निवेश और परिवार की सुविधा को प्राथमिकता देते हैं.
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