सूरत अग्निकांड में हुई 20 छात्रों की मौत ने पूरे देश को दहला दिया है. सूरत के सरथाणा जकात नाका स्थित तक्षशिला आर्केड में चल रहे एक इंस्टीट्यूट में शुक्रवार शाम को आग लग गई थी जिसमें 20 छात्रों की मौत हो गई. कुछ छात्रों की मौत आग में जलने से तो कुछ की चौथी मंजिल से नीचे छलांग लगाने पर हुई. चौथी मंजिल से 17 बच्चों ने छलांग लगाई थी जिसमें तीन की मौत हो गई. जिस छात्र ने जान बचाने के लिए पहली छलांग लगाई, उसने पूरे खौफनाक मंजर के बारे में आज तक की टीम को बताया.
सूरत अग्निकांड हादसे में बचे और अब अस्पताल में भर्ती रुसित ने इस पूरे खौफनाक मंजर का आंखों देखा हाल बताया. रुसित ने कहा, "हम सब ऑफिस में बैठे थे, तभी धीरे-धीरे धुआं अंदर आने लगा. सबको लगा कि नीचे किसी ने प्लास्टिक जलाया होगा लेकिन धीरे-धीरे एसी में से भी धुआं आने लगा. तभी नीचे से दूसरी क्लासेस वाले सर कुछ बच्चों के साथ आए और कहने लगे कि नीचे आग लग गई है."
रुसित ने आगे कहा, "हमें कहा गया कि सब पीछे चलो. हम पीछे गए तो वहां भी धुआं इतना होने लगा कि दम घुटने के हालात बनने लगे. हमने उस मंजिल की सारी खिड़कियां तोड़ दीं. हमें अब ये लगने लगा कि शायद हम रहेंगे या नहीं रहेंगे. नीचे छलांग लगाने के बारे में भी सोचना शुरू कर दिया. मैंने सोचा कि यहां रहा तो भी जल जाउंगा और नीचे कूदा तो भी मर जाउंगा. फिर सोचा कि नीचे ही छलांग लगा देनी चाहिए."
रुसित ने बताया, "आग की सूचना के बाद जब फायर ब्रिगेड पहुंची तो तब तक हालात बिगड़ चुके थे. फायर ब्रिगेड की गाड़ियां जब तक सेट होतीं, सीढ़ियां लगतीं, तब तक काफी देर हो जानी थी. इसलिए हमने नीचे कूदने का फैसला किया. मेरे साथ क्लास में 8-9 छात्र थे, दूसरी क्लास में भी कुछ छात्र थे."
और फिर सबने नीचे छलांग लगाना शुरू कर दी. सबसे पहली छलांग रुसित ने ही लगाई थी. इसके बाद 13 छात्र-छात्राएं गिरते हुए नीचे आए. इनमें से 3 की मौत हो गई. रुसित वहां नाटक की तैयारी के लिए पिछले डेढ़ साल से जा रहा था.
तक्षशिला शॉपिंग सेंटर की चौथी मंजिल पर अवैध रूप से फायबर का एसी हॉल बनाया गया था जिसमें कोचिंग चल रही थी. यहां तक पहुंचने के लिए लकड़ी की सीढ़ी बनाई गई थी जो आग में सबसे पहले जली. इसी वजह से चौथी मंजिल से कोई भी छात्र नीचे नहीं उतर सका.
बता दें कि शुक्रवार शाम 3 बजकर 40 मिनट पर सूरत के तक्षशिला शॉपिंग सेंटर में आग लग गई थी जिसपर 4 घंटे बाद काबू पाया जा सका. लेकिन तब तक 20 छात्रों की मौत हो गई जो यहां के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर रहे थे. 20 छात्रों में से 10 छात्रों की 17 साल, 5 छात्रों की 18 साल उम्र थी. बाकी 5 छात्रों की 15, 16, 19, 21 और 22 साल उम्र थी. मरने वालों में 20 में से 16 लड़कियां थीं.