प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार सरोवर बांध परियोजना को देश को समर्पित कर दिया है. इस बांध से कई गांवों को पानी मिलेगा और बिजली उत्पादन में भी बांध काफी योगदान करेगा. साल 1961 में पूर्व जवाहरलाल नेहरू ने इसकी नींव रखी थी. आइए जानते हैं यह बांध क्यों खास है और इससे क्या लाभ होगा... (फोटो- sardarsarovardam.org)
यह देश का पहला और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है (इसमें इस्तेमाल कंक्रीट के आधार पर). इस बांध की ऊंचाई 138 मीटर है और लंबाई 1.2 किलोमीटर है. इस बांध की गहराई 163 मीटर है. (फोटो- sardarsarovardam.org)
2016-17 के दौरान बांध से 320 करोड़ यूनिट बिजली पैदा की गई. अब ज्यादा पानी जमा होने से 40 फीसदी ज्यादा बिजली पैदा की जा सकती है.(फोटो- sardarsarovardam.org)
इस परियोजना से 18.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, जिसमें गुजरात के 15 जिलों के 3112 गांव शामिल है.(फोटो- sardarsarovardam.org)
गुजरात के हजारों गांवों के साथ महाराष्ट्र के 37, 500 हेक्टेयर इलाके तक सिंचाई की सुविधा होगी. राजस्थान के दो सूखा प्रभावित जिले जालौर और बाड़मेर तक 2,46,000 हेक्टेयर जमीन की प्यास बुझेगी.(फोटो-ट्विटर)
इससे बांध की स्टोरेज क्षमता 1.27 मिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 4.73 मिलियन क्यूबिक मीटर हो गई. (फोटो-ट्विटर)
सिंचाई के साथ साथ कई गांवों को इससे पेयजल आपूर्ति भी की जाएगी. इससे गुजरात के 131 शहरी केंद्र और 9633 गांवों को पानी उपलब्ध करवाया जाएगा. इस क्षेत्र में 2 करोड़ 80 लाख लोग रहते हैं और 2021 तक यह जनसंख्या 4 करोड़ हो जाएगी. (फोटो-ट्विटर)
इस बांध की क्षमता 4,25,780 करोड़ लीटर हो चुकी है. बता दें कि इससे पहले ये पानी बह कर समुद्र में चला जाया करता था. (फोटो-ट्विटर)
बांध के दो पावर हाउसों बेड पावर हाउस और कैनाल हेड पावर हाउस की क्षमता क्रमशः 1,200 मेगावॉट और 250 मेगावॉट है. सरदार सरोवर बांध से अब तक 16,000 करोड़ से ज्यादा की कमाई हो चुकी है, जो लागत से अधिक है. (फोटो-ट्विटर)
इस बांध से कई गांवों पर बाढ़ का खतरा भी कम हो जाएगा. इससे 210 गांव को बाढ़ से निजात मिलेगी, जहां करीब 4 लाख की आबादी रहती है. हालांकि कई गांवों के इससे डूबने का खतरा भी है.
बताया जा रहा है कि इससे कई गांवों में सूखे का संकट कम हो जाएगा.
इस बांध के 30 दरवाजे हैं और प्रत्येक दरवाजे का वजन 450 टन है. हर दरवाजे को बंद करने में करीब एक घंटे लगते हैं.