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इस गांव का नाम है रावण, नई गाड़ियों पर लिखवाते हैं 'जय लंकेश'

aajtak.in
  • 08 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 11:02 AM IST
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दशहरा पर जहां बुराइयों का प्रतीक मानकर सारे देश में रावण के पुतले का दहन किया जाता है तो ठीक इसके विपरीत विदिशा जिले की नटेरन तहसील के रावण गांव में रावण की पूजा अर्चना पूरे श्रद्धा भाव से की जाती है. वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को ग्रामवासी पूरी भक्ति से पूरा कर रहे हैं. व‍िद‍िशा, मध्य प्रदेश में स्थ‍ित है.

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रावण नाम के इस छोटे से गांव में रावण को देवताओं की तरह पूजा जाता है. गांव में कोई भी शुभ कार्य हो, शादी-विवाह या बच्चों का जन्मोत्सव हो तो सबसे पहले यहां आकर ग्रामीण दंडवत होते हैं,  फिर काम की शुरुआत करते हैं.

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व‍िजयादशमी पर इस मंदिर में पूजा अर्चना भंडारे का आयोजन किया जाता है. राबण बब्बा के नाम से रावण का का मंद‍िर फेमस है. यहां जो भी कोई नया वाहन खरीद कर लाते हैं, वह उस पर 'जय लंकेश' ल‍िखवाते हैं.

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ग्रामवासियों की यह धारणा है कि अगर कोई भी कार्य करने से पहले यदि रावण की पूजा अर्चना नहीं की तो कोई ना कोई अनर्थ अवश्य हो जाता है.

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रावण पूजा को लेकर इस गांव में कई प्रकार की किंवदंती और कहानियां प्रचलित हैं. ग्रामीण कहते हैं कि पास ही की पहाड़ी पर रहने वाला एक राक्षस, रावण के बल को बार-बार चुनौती देता था और उससे लड़ने लंका जाता था. रावण ने उससे एक बार कहा कि तुम अपने ही क्षेत्र में एक रावण की प्रतिमा बनवा लो और वहीं उस से युद्ध किया करो. राक्षस का कहना था कि जब मैं आपके सामने आता हूं तो मेरा बल कम हो जाता है.

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