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मुश्किल में मोदी का हमशक्ल, लोग पूछते हैं अच्छे दिन कब आएंगे?

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 13 मई 2019,
  • अपडेटेड 6:14 PM IST
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सफेद दाढ़ी और पारंपरिक भारतीय शर्ट के ऊपर स्लीवलेस जैकेट में अभिनंदन पाठक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमशक्ल लगते हैं. वही कद, चलने का वैसा ही अंदाज उन्हें पीएम मोदी के बाकी हमशक्लों से अलग कतार में खड़ा कर देता है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादों से दुखी पाठक इस चुनाव में बीजेपी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें खूब समर्थन भी मिल रहा है. वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहते हैं.

58 वर्षीय अभिनंदन पाठक एएफपी से इंटरव्यू में कहते हैं, मोदी के प्रति गुस्सा असली है, मैं जहां भी जाता हूं, इसे महसूस कर सकता हूं.

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जब 2014 में मोदी को चुना गया था तो पाठक उनके समर्थक थे.  वह याद करते हुए कहते हैं, पीएम मोदी से समानता की वजह से लोग मुझे मानते थे, सेल्फी के लिए कहते थे और मुझे गले लगाते थे.

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पाठक कहते हैं, मुझ पर प्यार की बरसात होती थी. लोगों को लगता था कि वे असली मोदी से नहीं मिल सकते लेकिन मुझसे आसानी से मिल सकते हैं. लेकिन अब जब वे मुझे देखते हैं तो गुस्सा हो जाते हैं. वे मुझसे पूछते हैं कि अच्छे दिन कहां हैं?

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पाठक की जिंदगी में तब ऐतिहासिक क्षण आया था जब मई 2014 में पीएम मोदी ने वाराणसी में एक परेड में उन्हें गले लगा लिया था.

पाठक ने कहा कि उसके बाद उन्हें पार्टी ने नजरअंदाज कर दिया और उन्होंने मोदी को कई पत्र लिखे लेकिन किसी का जबाव नहीं आया.

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मुंबई में मोदी के एक और हमशक्ल विकास महंते बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं और कैंपेन कर रहे हैं.

57 वर्षीय बिजनेसमैन विकास महंते ने 2017 में आई एक बायोपिक में मोदी की भूमिका भी अदा की थी. वह रैलियों में अक्सर भीड़ के आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं.

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लेकिन कई बार मोदी का हमशक्ल होना भारी भी पड़ जाता है. एक बार उन पर लोगों ने पत्थर फेंक दिए और उन्हें अपने बचाव के लिए भागना पड़ा. अब उनके पास खुद का बॉडीगार्ड है.

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हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में उन्होंने बताया था, जब मैं एक बार रैली से लौट रहा था तो आधी रात को एक गैंग मेरा पीछा करने लगा था. मैं एक्सीलरेटर पर चढ़ गया, सारे सिग्लन तोड़े और कहीं नहीं रुका, बस चलता चला गया.

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प्रशांत सेठी गुजरात के सूरत में फ्राइड चिकन बेचते हैं और वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हमशक्ल हैं. उन्हें कई बार फिल्मों में ऑफर भी मिले. लेकिन प्रशांत मोदी समर्थक हैं और उन्होंने वजन-दाढ़ी बढ़ाकर अपना लुक ही बदल लिया. राहुल गांधी से अलग दिखने के लिए प्रशांत ने अपनी हेयरस्टाइल भी बदलवा ली.

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सेठी ने एएफपी से बातचीत में कहा, मैं और मेरा परिवार हमेशा से बीजेपी का समर्थक रहा है लेकिन मुझे मेरे लुक की वजह से चिढ़ाया जाता था. लोग मुझे 'पप्पू' बुलाने लगे थे इसलिए मुझे अपना लुक बदलना पड़ा.

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लेकिन लखनऊ में रहने वाले पीएम मोदी के हमशक्ल पाठक खुद को बिल्कुल नहीं बदलना चाहते हैं. वह कहते हैं, मैं क्यों बदलूं? मैं 1990 से राजनीति में सक्रिय रहा हूं. मैं हमेशा से दाढ़ी रखता था और कुर्ता पहनता था. वह अपने पुराने दिनों की तस्वीरें दिखाते हैं, 'मैं ही ओरिजनल हूं, मोदी मेरे कॉपी हैं.'


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