राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने एक फैसले में कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए और गोहत्या करने वालों को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए.
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा- 'हमने मोर को राष्ट्रीय पक्षी क्यों घोषित किया. इसलिए क्योंकि मोर आजीवन ब्रह्मचारी रहता है. इसके जो आंसू आते हैं, मोरनी उसे चुग कर गर्भवती होती है. मोर कभी भी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता.
हालांकि ये कहना बात बिल्कुल निराधार है. मोरनी सहवास के जरिए ही अंडे देती हैं. बता दें मोर-मोरनी ज्यादातर जनवरी से अक्टूबर के बीच सहवास करते हैं.
यही नहीं, मोर सेक्स के दौरान अलग-अलग आवाजों के जरिए मोरनी को आकर्षित करता है. अमेरिकन नेचुरलिस्ट की रिसर्च में छपी रिपोर्ट के मुताबिक बायोलॉजिस्ट ने नर पक्षी की आवाज रिकॉर्ड की है.
यदि मोर मोरनी को आकर्षित करने में सफल हो जाता है तो वह सहवास करने से पहले वह एक अजीब सी आवाज भी निकालता है. इस आवाज को दूर से भी सुना जा सकता है.
पिछले साल मोरों का सेक्स करना ब्रिटेन के एक गांव के लिए परेशानी का सबब बन गया था. दरअसल, इंग्लैंड के उशॉ मूर गांव में मोरों और मोरनियों के सेक्स के दौरान होने वाले शोर-शराबे ने गांव के लोगों की नींद उड़ा दी थी.
गांव के लोगों के मुताबिक ये पक्षी उनकी कारों पर हमला करते हैं और अपने पंजों और चोंच से उनकी कीमती गाड़ियों को खरोंच देते हैं.
इसके अलावा जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक मोर अपनी चमकदार पंखों वाली पूंछ का इस्तेमाल मोरनी को आकर्षित करने के लिए करते हैं.
मोरनी एक बार में तीन से पांच अंडे देती है. ये अंडे सफेद व पीले होते हैं. प्रजनन के मौसम के बाद, झुंड में केवल मादा और युवा ही रहते हैं. यह सुबह खुले में पाए जाते हैं और दिन की गर्मी के दौरान छायादार जगह में रहते हैं.
मोर को 26 जनवरी 1963 को इसे राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया था. मोर को राष्ट्रीय पक्षी इसलिए बनाया गया, क्योंकि सबसे पहले वे भारत में ही पाए जाते थे. भारत के अलावा म्यांमार का भी नेशनल बर्ड मोर ही है.