27 साल के लाल चंद राबड़ी की सीमा पर तैनाती के समय मौत हो गई. लाल चंद हिंदू थे और उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी जॉइन की थी लेकिन इस महीने ड्यूटी के समय उनकी मौत हो गई. इसके बाद से ये ट्विटर पर वायरल हो गया है. पाकिस्तानिों ने लाल चंद के लिए ट्वीट कर उन्हें अपना हीरो बताया.
लांस नाइक लाल चंद राबड़ी की उस समय मौत हो गई जब वो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मंगला फ्रंट पर तैनात थे. लाल चंद की मौत ड्यूटी के समय हुई है इसलिए उनकी मौत के कारण का अभी पता नहीं लग पाया है. (प्रतीकात्मक फोटो)
लाल चंद के लिए पाकिस्तानी लगातार सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए उन्हें हीरो बता रहे हैं. कुछ का कहना है कि हमारा हीरो देश की रक्षा करते हुए इस दुनिया से चला गया.
लाल चंद सिंध के बदिन डिस्ट्रिक्ट के इस्माइल खान नौटकानी गांव के रहने वाले थे.
लाल चंद 11 भाई-बहनों में 5वें नंबर पर थे. उनके पिता चरवाहे और मां किसान हैं.
उनके बड़े भाई भीमन राबड़ी ने बताया कि लाल चंद पहले वजीरिस्तान आदिवासी क्षेत्र में तैनात थे जहां वो उन आतंकियों को मारना चाहते थे जिन्होंने देश को नुकसान पहुंचाया. (प्रतीकात्मक फोटो)
वजीरिस्तान से आने के बाद कहा कि मेरे देश के लोगों और बच्चों को मुकसान
पहुंचाने वालों से मैं खून की एक-एक बूंद का बदला लूंगा. (प्रतीकात्मक
फोटो)
लाल चंद ने साल 2009 में मैट्रिक की परीक्षा पास की थी. इसके बाद अपने परिवार को बताए बिना लाल चंद बदिन चले गए थे और आर्मी जॉइन करने के लिए अप्लाई किया था. उनकी ग्रैजुएशन उस समय पूरी हुई थी जब वो आर्मी में रहते हुए देश की सेवा कर रहे थे. (प्रतीकात्मक फोटो)
लाल चंद ने अपने दो छोटे भाइयों को भी आर्मी जॉइन करने के लिए प्रोत्साहित
किया था. लाल चंद के छोटे भाई 7वीं और 11वीं क्लास में पढ़ते हैं. खबरों के
मुताबिक लाल चंद ने कहा था कि जिस देश में हम रहते हैं वो हमारे घर की तरह
है और जो भी इस पर हमला करेगा उससे मैं अपनी आखिरी सांस तक बदला लूंगा.
(प्रतीकात्मक फोटो)
लाल चंद के भाई भीमन का कहना है कि हम राजपूत हैं और हमारे वंश के लोग अपने
शरीर की आखिरी बूंद तक दुश्मन से लड़ने के लिए तैयार रहते हैं.
(प्रतीकात्मक फोटो)
भीमन ने कहा कि हमारी मां देश की रक्षा के लिए अपने सभी बेटों और पोतों को कुर्बान करने को तैयार हैं और उन्हें देश की रक्षा करते हुए अपने बेटे को खो देने का कोई मलाल नहीं है. (प्रतीकात्मक फोटो)