गुजरात के वेरावल में एक मुस्लिम शादी की शुरुआत गणेश पूजा से हुई. शबनम का निकाह उसे पालने वाले हिंदू परिवार ने करवाया था. उसकी अब्बास से हुए निकाह से पहले गणेश वंदना भी हुई. हालांकि गुजरात में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल का यह पहला मामला नहीं है. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
गुजरात में एक ऐसा इलाका भी है, जहां निकाह में कई हिंदू रीति रिवाजों को फॉलो किया जाता है. इसमें गणेश पूजा, गाय पूजा और फुलेकू भी. फुलेकू में दूल्हा दुल्हन को शादी के बाद पूरे गांव में घुमाया जाता है. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
गुजरात के कच्छ का रण के बन्नी इलाके में रहने वाला मल्धारी मुस्लिम समुदाय इस तरह के हिंदू रीति रिवाजों का पालन करता है. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
पशु पालने वाला ये समुदाय बंटवारे के समय पाकिस्तान के सिंध इलाके से आकर बसा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार इस समुदाय पर एक रिसर्च हुआ, जिसपर यह निकलकर आया कि इनकी शादियों में हिंदू रीति रिवाज आम हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
18 हजार से ज्यादा जनसंख्या वाले बन्नी इलाके में हिंदू मुस्लिम मिलकर सारे त्योहार भी मनाते हैं. साथ ही अगर कोई हिंदू मुस्लिम समारोह में पहुंचता है तो समुदाय नॉनवेज भी नहीं खाता है. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
बन्नी या पिरांजा पट नाम से जाने जाने वाले इस इलाके में शादी समारोह में गणेश पूजा के अलावा हल्दी और मंडप जैसी हिंदू रीति रिवाज भी होते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
आपको बता दें कि टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के वेरावल में शबनम की शादी में भी निकाह से पहले गणेश पूजा की रस्म हुई.(प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
शबनम को उसके पिता ने हिंदू परिवार को सौंप दिया था. 20 साल के होने पर मेरामन जोरा के हिंदू परिवार ने उसकी शादी अब्बास नाम के युवक से करवा दी. जोरा के मुताबिक शबनम नियमित तौर पर नमाज पढ़ती है लेकिन हिंदू त्योहारों को भी उसी शिद्दत और उत्साह से मनाती है.(प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)
जोरा के बेटे गोपाल ने बताया कि उन्होंने हमेशा से शबनम को अपने परिवार का हिस्सा माना और उसे हर तरह की आजादी दी गई. शबनम के ससुरालवाले भी निकाह के दौरान हिंदू रीति रिवाजो के लिए मान गए थे. (प्रतीकात्मक फोटो: GETTY)