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कैसे कहें डॉक्टर? टूटा हाथ छोड़कर दूसरे में चढ़ा दिया प्लास्टर

aajtak.in
  • 17 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 8:10 AM IST
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इस धरती पर डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है और हम जब भी कष्ट में होते हैं तो डॉक्टर के पास इस उम्मीद में जाते हैं कि वो हमारा इलाज कर हमें उस बीमारी से निजात दिला देंगे. लेकिन झारखंड के कैमूर जिले में एक निजी अस्पताल के डॉक्टर ने बच्चे की तकलीफ को कम करने की जगह लापरवाही की वजह से और बढ़ा दिया जिससे मासूम की तबियत और बिगई गई.

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दरअसल कैमूर के लालापुर में सीढ़ी से गिरने की वजह से एक 6 साल के मासूम बच्चे का हाथ टूट गया. आनन फानन में परिजनों ने अपने बच्चे को पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया जहां एक्सरे के बताया गया कि चोट लगने की वजह से बच्चे का हाथ टूट गया है और जल्द से जल्द उसका प्लास्टर करना जरूरी है.

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परिजनों ने तुरंत पैसे का इंतजाम किया और राज भारती अस्पताल में बच्चे को भर्ती कराया. परिजनों ने डॉक्टर से बच्चे के टूटे हुए हाथ का प्लास्टर करने को कहा. लेकिन अस्पताल के लापरवाह डॉक्टरों ने टूटे हाथ के प्लास्टर की जगह दूसरे हाथ का प्लास्टर कर दिया जिसमें कोई चोट नहीं थी.

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जब परिजन बच्चे को लेकर घर आए तो रात में उसकी तबियत बिगड़ गई और उन्हें इस बात का पता चला कि डॉक्टर ने लापरवाही करते हुए टूटे हाथ का नहीं बल्कि दूसरे हाथ में प्लास्टर चढ़ा दिया. बच्चे के माता-पिता फिर बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर से इसकी शिकायत की. इस पर अस्पताल के डॉक्टर अपनी गलती छुपाते हुए उनसे बदतमीजी और दबंगई करने लगे. परिजन जिस मोबाइल से इसका वीडियो बना रहे थे उसे छीनकर वीडियो को डिलीट कर दिया.

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परिजनों ने अपने बच्चे की तकलीफ को देखते हुए दूसरे अस्पताल में जाकर फिर से उसके टूटे हाथ का प्लास्टर करवाया तब जाकर बच्चे की तकलीफ थोड़ी कम हुई. वहीं इस मामले को लेकर कैमूर के सिविल सर्जन ने बताया कि मेडिकल ऑफिसर को अस्पताल में भेजकर मामले की पूरी रिपोर्ट ली गई है और अगर मासूम के परिजन अस्पताल के खिलाफ शिकायत करते हैं तो फिर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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