दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की मौत की जांच अभी जारी है. पूरे परिवार के सामूहिक आत्महत्या करने की आशंका भी जताई जा रही है. कई रिपोर्टों में इसे धर्मांधता से भी जोड़ा जा रहा है. हालांकि, अगर इतिहास की घटनाओं को देखें तो पहले भी धर्मांधता की वजह से सामूहिक आत्महत्याएं सामने आई हैं. इसके अलावा कई बार सेवा और शोषण की वजह से भी सामूहिक आत्महत्या लोगों ने की है. नजर डालते हैं ऐसे कुछ मामलों पर...
इसी साल जनवरी में राजस्थान के नागौर में एक पुलिस कॉन्सटेबल ने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या कर ली. उनके साथ पत्नी और दो बच्चे मारे गए. रिपोर्ट के मुताबिक, गना राम अपने एक वरिष्ठ साथी से उत्पीड़न का सामना कर रहा था. पुलिस ने कहा था कि एक सब इंस्पेक्टर ने 40 साल के गना राम के खिलाफ केस कर दिया था और इसकी वजह से वह डिप्रेशन में चले गए थे. सामूहिक आत्महत्या से पहले परिवार ने अपने एक रिश्तेदार को सुसाइड नोट भेजा था जिसमें सभी सदस्यों से हस्ताक्षर थे.
इसी साल 18 अप्रैल को 29 साल की एक महिला ने अपने 8 महीने के बेटे की हत्या कर दी और इसके बाद दिल्ली के अमन विहार इलाके में खुद भी सुसाइड का प्रयास किया.
उदयपुर में अक्टूबर 2017 में 47 साल के स्कूल टीचर विनोद शर्मा ने परिवार के 3 सदस्यों के साथ आत्महत्या कर ली थी. जहर खाकर शर्मा, उनकी पत्नी कल्पना, बेटी अंजु और बेटा निखिल की मौत हो गई थी. उनकी बड़ी बेटी कोमल ने अंतरजातीय विवाह कर लिया था.
संथारा: जैन धर्म में एक परंपरा है संथारा. इसमें मौत होने तक उपवास करने का रिवाज है. अगस्त 2015 में राजस्थान हाईकोर्ट ने इसे बैन कर दिया था और अपराध भी घोषित कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि कानून की नजर में संथारा गैर कानूनी है. हालांकि, जैन धर्म से जुड़े लोगों का एक समूह संथारा को आत्महत्या नहीं मानता है. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी.
जौहर: इतिहास पर नजर डालें तो रानियों का जौहर भी एक तरह से सामूहिक आत्महत्या की श्रेणी में ही आता है. इसके तहत राजपूत महिलाएं दुश्मनों के हाथों में आने से पहले ही एक साथ खुद को जलते हुए कुंड में झोंक देती थीं. मुगल आक्रमणकारियों से बचने के लिए जौहर करने के कई वाकये इतिहास का हिस्सा हैं.
मार्च 1997 में कैलिफोर्निया में 39 लोगों ने एक ही तरह के कपड़े और जूते
पहनकर आत्महत्या कर ली. ये लोग हैवेन्स गेट नाम के समूह से जुड़े थे जो UFO
में विश्वास करता था. उन्हें उम्मीद थी कि वे धरती छोड़कर आसमान में एक
अलौकिक दुनिया में चले जाएंगे.
दूसरा विश्वयुद्ध खत्म होने के समय जर्मनी के डेमिन में कई सौ लोगों ने
आत्महत्या कर ली. उन्हें डर था कि पकड़े जाने पर सोवियत रेड आर्मी उन्हें
प्रताड़ित करेगी और मार देगी. आत्महत्या करने वालों की संख्या 700 से एक
हजार के बीच बताई जाती है.
1994 में सोलर टेंपल नाम के समूह से जुड़े 48 लोगों ने स्विटजरलैंड में
आत्महत्या कर ली. बाद में ये मालूम चला कि इस समूह के नाम पर स्विटजरलैंड,
फ्रांस और कनाडा में काफी प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड हैं. यह भी पता चला कि समूह
मनी लॉन्ड्रिंग और आर्म्स ट्रैफिकिंग में भी शामिल रही है. हालांकि, समूह
ये दावा करता था कि वे धरती की त्रासदियों से तंग आकर नए ग्रह पर जा रहे
हैं.