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जानिए कैसे एक बुलेट बन गई भगवान और पूजने लगे लोग

शरत कुमार
  • 28 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 2:28 PM IST
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ईश्वर में आस्था रखने वाले लोग एक पत्थर में भी उनकी मूरत देख लेते हैं और उसे पूजने लगते हैं. लेकिन राजस्थान के जोधपुर में लोग जिस चीज को भगवान मानकर उसकी पूजा करते हैं उसके बारे में जानकर आप  हैरत में पड़ जाएंगे. जी हां जोधपुर में लोग एक बुलेट मोटरसाइकिल की पूजा करते हैं. जोधपुर में इस मोटरसाइकिल की पूजा के लिए मंदिर भी बना हुआ है जहां भक्त पहुंचकर पूजा करते हैं और अपने मन की इच्छा उसके सामने प्रकट करते हैं.

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जिस बुलेट की वहां भगवान के तौर पर पूजा की जाती है उसकी कहानी भी बेहद रोचक है. दरअसल, जब आप जोधपुर हाईवे पर यात्रा करेंगे तो रोहट के पास आपको ओम बन्ना का मंदिर दिखेगा. ओम बन्ना के पीछे ही आपको RNJ7773 नंबर की बुलेट भी खड़ी मिलेगी जिस पर लोग फूल भी चढ़ाते हैं. ये बाइक ओम बन्ना की ही है. (सांकेतिक तस्वीर)

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अब आप यह जानने के लिए उत्सुक होंगे कि आखिकार यह ओम बन्ना कौन हैं और इनके नाम पर मंदिर और उस मंदिर में उनके बाइक की पूजा क्यों जाती है. तो इसका जवाब भी हम आपको यहां बता रहे हैं. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि ओम बन्ना नाम के शख्स की यहीं पर एक सड़क हादसे में मौत हो गई जिसके बाद उनकी बुलेट मोटरसाइकिल को पुलिस थाने लेकर चली गई.  (सांकेतिक तस्वीर)

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इसके बाद लोगों का दावा है कि थाने में खड़ी बुलेट बाइक रोज रात को स्टार्ट हो जाती थी और जहां पर हादसा हुआ था वहीं पर जाकर खड़ी हो जाती थी. पुलिस वालों ने इससे परेशान होकर इसे कबाड़ी को बेच दिया लेकिन मोटरसाइकिल कबाड़ी के यहां से भी स्टार्ट होकर उसी जगह पहुंच जाती थी. (सांकेतिक तस्वीर)

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यह सब देख कर एक दिन ओम बन्ना की दादी को सपना आया कि इसके लिए चबूतरा बनवा दिया जाए जिसके बाद उन्होंने ऐसा ही किया. उसके बाद लोग मानने लगे कि यहां ओम बन्ना के चबूतरे पर आकर मन्नत मांगने से हर मुराद पूरी हो जाती है. यहां पर पूजा करने आए श्रद्धालु दशरथ सिंह बताते हैं कि हमने जब भी कोई मुराद मांगी है यहां जरूर पूरी हुई है. (सांकेतिक तस्वीर)

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अब इस मंदिर की देखभाल ओम बन्ना के घर के लोग ही करते हैं. उन्होंने इस घटना के बार में बताते हुए कहा कि  2 दिसंबर 1988 को चोटिला गांव के रहने वाले ओम बन्ना यहां से गुजर रहे थे तब इनकी मोटरसाइकिल एक खाई में गिर गई थी और उसके बाद से मोटरसाइकिल थाने में खड़े-खड़े स्टार्ट हो जाती थी. तब लोगों में इनके प्रति आस्था पैदा हुई जिसके बाद यह मंदिर बनाया गया. (सांकेतिक तस्वीर)

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