अक्सर आप खबरों में सुनते होंगे कि देश के तमाम बड़े राजनेता बुलेटप्रूफ गाड़ियों में सवार होते हैं ताकि उनकी सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का खतरा ना हो. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बुलेट प्रूफ गाड़ी कैसे तैयार होती है.....? और कैसे एक बुलेटप्रूफ गाड़ी को इतना मजबूत बना दिया जाता है कि वो हैंड ग्रेनेड से लेकर बारूदी सुरंग और एके-47 की फायरिंग तक को बर्दाश्त कर सकती है. आज हम बताने जा रहे हैं कि आखिरकार कैसे तैयार होती है बुलेटप्रूफ कार?
खुफिया सूचनाओं और चुनाव में वीवीआइपी और नेताओं पर हमलों की आशंका के मद्देनजर इन चुनावों में तमाम नेताओं ने सरकार के साथ-साथ अपनी सुरक्षा की कमान अपने हाथों में भी संभाल ली है. जालंधर स्थित एक निजी कंपनी में इन चुनावों की घोषणाओं से ठीक पहले 50 से भी ज्यादा बुलेटप्रूफ गाड़ियां नेताओं और वीआईपी सुरक्षा प्राप्त लोगों के लिए जा चुकी है. आलम ये है कि अभी भी कंपनी में तकरीबन 1 दर्जन के करीब गाड़ियों पर काम चल रहा है जिन्हें अगले 5 से 7 दिनों में डिलीवर किया जाएगा.
पिछले कई महीनों से इस तरह की सूचनाएं मिल रही थी कि नक्सलवादी, माओवादी, खालिस्तानी और कश्मीरी आतंकवादी चुनाव के दौरान कई नेताओं और वीआईपी लोगों को निशाना बना सकते हैं. लिहाजा एक तरफ सरकार तो दूसरी तरफ व्यक्तिगत लोगों ने अपनी सुरक्षा के लिए कमर कस ली है.
चुनाव के दौरान सबसे अहम बात ये होती है कि नेताओं को अलग-अलग इलाकों और क्षेत्रों में दौरे चुनाव प्रचार और रैलियां करनी होती है खासकर नक्सलवाद, माओवाद और जम्मू कश्मीर में पंजाब के इलाकों में जहां पर कई बार बारूद बिछाकर या हैंड ग्रेनेड या कई बार आतंकी घात लगाकर गोलियों की बौछार कर देते हैं. ऐसे में बुलेटप्रूफ गाड़ियां सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी होती है.
बुलेटप्रूफ गाड़ी बनाते वक्त गाड़ी के ऑरिजिनल स्ट्रक्चर को बिल्कुल बदल दिया जाता है. छत से लेकर गाड़ी के फ्लोर तक को यहां तक की गाड़ी के अंदर हो रही वायरिंग को भी बदल दिया जाता है. गाड़ी में किसी भी तरह का धुआं, पानी, गोली, कैमिकल या फिर ग्रेनेड हमला हो या बारूदी सुरंग का हमला हो, उसको किस तरीके से बेअसर किया जाए हर तरीके का ख्याल रखा जाता है.
बुलेट प्रूफ गाड़ी को बनाने में खर्चा और वक्त दोनों ही बहुत ज्यादा लगता है. लिहाजा महंगी गाड़ियों पर बुलेटप्रूफ मटेरियल की फिटिंग फिट बैठती है. एक गाड़ी में 3 महीने और खर्चा 5 लाख रुपये से 40 लाख रुपये तक होता है. साथ ही बुलेटप्रूफ गाड़ी होने के बाद गाड़ी की औसतन एवरेज सोच से भी कम हो जाती है मसलन एक गाड़ी 1 लीटर में 12 किलोमीटर चलती है तो ये गाड़ी बुलेट प्रूफ होने के बाद 1 लीटर में सिर्फ 2 या 3 किलोमीटर तक ही चलेगी.
जालंधर में बुलेटप्रूफ गाड़ी बनाने वाले कंपनी के इंजीनियर और एमडी संचित सोबती ने खास बातचीत में बताया कि पिछले हुए चुनाव में और इस बार के चुनाव में फर्क ये है कि इन चुनावों में सुरक्षा व्यवस्था पर खासा ध्यान दिया जा रहा है. जिस तरीके से खुफिया एजेंसियां जानकारी दे रही थी और जिस तरीके के पिछले कई महीनों में आतंकी हमले हुए हैं उसे देखते हुए इन चुनावों में बुलेटप्रूफ गाड़ियों और बुलेट प्रूफ सामान की मांग अचानक बढ़ गई है. यहां तक की बुलेट प्रूफ गाड़ियां बनाने वाली कंपनी भी कहीं ना कहीं दवाब में है और दिन-रात लगकर मांग पूरी करने की कोशिश की जा रही है.
इस कंपनी के मालिक ने किसी राजनेता का नाम तो नहीं बताया लेकिन उनके मुताबिक देश की तमाम बड़ी राजनीतिक पार्टियां भले ही वो राष्ट्रीय पार्टी हो या क्षेत्रीय, सभी पार्टी के तकरीबन बड़े चेहरों को वह अब तक बुलेटप्रूफ गाड़ियां तैयार करके डिलीवर कर चुके हैं और अभी भी आने वाले दिनों में उन्हें करीब एक दर्जन गाड़ियां तैयार करके नेताओं को सौंपनी है.
हालांकि सुरक्षा कारणों से कंपनी के मालिक संचित सोबती ने उन राजनेताओं के नाम का खुलासा नहीं किया लेकिन संचित के मुताबिक उनके पास ना सिर्फ राजनेता बल्कि पैरामिलिट्री फोर्सेज और कश्मीर और बॉर्डर पर तैनात भारतीय सेना की बसों और ट्रकों को भी बुलेटप्रूफ करने के आर्डर है और वो दिन रात इसके लिए काम भी कर रहे हैं.
देश के नेताओं को भी ये बात समझ में आ चुकी है कि जनता से जुड़े रहने के लिए जनता के बीच में जाना भी बेहद जरूरी है लेकिन ऐसे में सुरक्षा में कोई कॉम्प्रोमाइज ना हो इस वजह से अपनी सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे ना रहते हुए ये राजनेता खुद ही अपने लिए बुलेटप्रूफ गाड़ियां तैयार करवा के अपनी सुरक्षा को पुख्ता करने की कोशिश कर रहे हैं.