उत्तर प्रदेश की सोनभद्र की पहाड़ियों में 3 हजार टन सोने का भंडार मिला है. इसकी पुष्टि हो चुकी है और अब नीलामी की प्रकिया शुरू की जाएगी. इसी के साथ सोनभद्र में यूरेनियम के भी मिलने की संभावना जताई गई है. अगर ऐसा हुआ तो सोनभद्र में 'सोने पर सुहागा' हो जाएगा.
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दरअसल, सोनभद्र के खनिज अधिकारी के के राय ने बताया कि जिले
में यूरेनियम का भी भंडार होने की संभावना है, जिसकी तलाश में केंद्रीय और
अन्य टीम लगी हुई हैं. उन्होंने बताया कि भूतत्व और खनिकर्म विभाग और
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम इस कार्य में लगी हुई है.
सोनभद्र
के सोन पहाड़ी और हरदी इलाके के लोग बहुत खुश हैं. प्रशासन की रिपोर्ट के बाद
पूरा जिला मालामाल हो सकता है. यहां की दो पहाड़ियों में सोने, यूरेनियम
समेत कई धातुओं और अयस्कों का बड़ा भंडार है. सोने का भंडार सुनकर तो लोग
चौंक गए.
यूरेनियम का भंडार मिला तो 'सोने पर सुहागा':
जिले की सोन
पहाड़ी पर सोने के भंडार के साथ-साथ पहाड़ी के नीचे यूरेनियम का भी बड़ा
भंडार होने की संभावना जताई जा रही है. साल 2012 से भंडार के बारे में
पुख्ता जानकारी जुटाने की प्रक्रिया चल रही थी. अब जाकर इसके बारे में भी
जानकारी मिल सकती है.
देश भर की नजर सोनभद्र पर:
यहां
पहाड़ियों में 3 हजार टन सोने का भंडार मिला है, जिसकी नीलामी के लिए सरकार आगे
की प्रक्रिया करने जा रही है. इस खबर के आने के बाद पूरे देश में सोनभद्र
चर्चा में आ गया है. लोग सोनभद्र पर नजर लगाए हुए हैं कि क्या सच में
सोनभद्र में इतना सोना मिल जाएगा.
सोना भंडार बदलेगा देश की किस्मत:
ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि अभी तक भारत के पास जितना सोने का भंडार है, वो दुनिया में काफी नीचे है. लेकिन सोनभद्र में सोने का भंडार मिलने से वो सोना उत्पादन में दुनिया में दूसरे नंबर पर आ जाएगा.
जिले में उत्सव का माहौल:
जिले में सोने के भंडार मिलने से पूरे इलाके
के लोगों में उत्साह और उत्सव का माहौल है. बताया जा रहा है कि हरदी गांव,
महुली गांव समेत एक दर्जन गांव वालों में रोजगार मिलने और इलाके के विकास को
लेकर उम्मीद जगी है.
लोग इसलिए भी खुश हैं क्योंकि प्रशासन की
रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि की जा चुकी है कि हरदी गांव के इलाके की
दो पहाड़ियों में सोने, अयस्कों और यूरेनियम समेत कई धातुओं का बड़ा भंडार
है.
कैसे पता चला कि पड़ा है भंडार:
दरअसल, कहा जाता है कि भारत में
अंग्रेजों के शासनकाल में भी इस सोने के भंडार के बारे में पता करने की
कोशिश की गई थी लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाए थे. इस खजाने को खोजने के
लिए भारत को 40 साल का लंबा वक्त लग गया.
लोगों का कहना है
कि पहाड़ियों में अंग्रेजों के समय हुई सोने की खोज के चलते पहाड़ी का नाम
'सोन पहाड़ी' पड़ गया था. जंगलों में रहने वाले आदिवासियों का मानना है कि
अंग्रेजों के समय से ही हम इसे 'सोन पहाड़ी' के नाम से जानते हैं.
कई सालों बाद सबसे पहले 2005 में पता लगाने की कोशिश की गई थी. उस वक्त भी शुरुआती जांच में धातु होने की संभावना जताई गई थी लेकिन धातु के प्रकार और मात्रा के बारे में अंदाजा नहीं लगा सके थे.
सरकार ने शुरू कर दी कवायद:
सोने की पुष्टि होने के बाद सरकार ने कवायद
भी शुरू कर दी है. सरकार ने ई-टेंडरिंग के जरिए ब्लॉकों की नीलामी के लिए
सात सदस्यीय टीम का गठन किया है और क्षेत्र की टैगिंग का कार्य किया जाएगा.
फिलहाल ताजा रिपोर्ट में हरदी क्षेत्र में 646.15 किलोग्राम सोने
का भंडार और सोन पहाड़ी में 2943.25 टन सोने का भंडार होने की पुष्टि हुई
है. इसके अलावा यूरेनियम और दूसरे अयस्कों के भी भंडार की पुष्टि जल्द हो
सकती है.
खनिज अधिकारी केके राय ने बताया कि भूतत्व और खनिकर्म
विभाग और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम इस कार्य में लगी हुई हैं.
जल्द ही पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.
अभी हेलीकॉप्टर के
माध्यम से हवाई सर्वे किया जा रहा है और इसका आकलन किया जा रहा है कि
कितनी राजस्व की भूमि है और कितनी वन विभाग की है, जिससे खनन के लिए वन
विभाग से अनुमति की प्रक्रिया शुरू हो सके.