44 प्लेटफॉर्म, 100 साल पुराना इतिहास! दुनिया के सबसे बड़े स्टेशन पर ट्रैवल करते हैं लाखों लोग

अगर आप सोचते हैं कि रेलवे स्टेशन सिर्फ शोर और भीड़ की जगह होते हैं, तो यह खबर आपकी सोच बदल देगी. दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन 44 प्लेटफॉर्म और 67 ट्रैक के साथ जमीन के नीचे एक पूरी व्यवस्था चलाता है, जहां लाखों लोग रोज सफर करते हैं, लेकिन अफरा-तफरी नजर नहीं आती.

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44 प्लेटफॉर्म्स वाली दुनिया की सबसे बड़ी स्टेशन की इमारत (Photo: Pexels) 44 प्लेटफॉर्म्स वाली दुनिया की सबसे बड़ी स्टेशन की इमारत (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

जब बात रेलवे स्टेशन की आती है, तो हमारे मन में शोर और भीड़ की तस्वीर उभरती है. लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन इस मामले में बिल्कुल अलग और अनूठा है. अमेरिका के न्यूयार्क शहर के बीचों-बीच स्थित 'ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल' सिर्फ अपनी विशालता के लिए नहीं, बल्कि अपनी शांति और भव्यता के लिए जाना जाता है.

44 प्लेटफॉर्म और 67 ट्रैक वाला यह स्टेशन इंजीनियरिंग का एक ऐसा बेजोड़ नमूना है, जहां हर दिन लाखों मुसाफिरों का आना-जाना लगा रहता है, फिर भी यहां कभी अव्यवस्था महसूस नहीं होती. इतना ही नहीं, 1913 में बना यह स्टेशन आज के आधुनिक दौर में भी पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बना हुआ है. आइए जानते हैं कि न्यूयार्क की धड़कन माना जाने वाला यह स्टेशन कैसे अपनी भव्यता को आज भी बरकरार रखे हुए है.

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मिडटाउन मैनहट्टन की ऐतिहासिक पहचान

न्यूयार्क के सबसे महत्वपूर्ण इलाके मिडटाउन मैनहट्टन में 42वीं स्ट्रीट और पार्क एवेन्यू के चौराहे पर स्थित यह स्टेशन शहर की भौगोलिक और सामाजिक धुरी है. इसका स्थान इतना महत्वपूर्ण है कि इसके चारों ओर बड़े-बड़े दफ्तर, स्कूल, लाइब्रेरी और ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं. यह स्टेशन सिर्फ ट्रेनों के आने-जाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह न्यूयार्क और इसके पड़ोसी राज्यों के दैनिक जीवन को एक सूत्र में जोड़ता है. इतना ही नहीं, इसकी सटीक लोकेशन की वजह से ही यह दुनिया के सबसे व्यस्त और व्यवस्थित केंद्रों में से एक बना हुआ है.

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दो मंजिला अंडरग्राउंड दुनिया और 44 प्लेटफॉर्म का जाल

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आमतौर पर बड़े स्टेशनों पर भी जगह की कमी के कारण अफरा-तफरी देखी जाती है, लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन इसके बिल्कुल विपरीत है. यहां के 44 प्लेटफॉर्म और 67 ट्रैक को दो अलग-अलग अंडरग्राउंड लेवल्स (स्तरों) पर बड़ी ही चतुराई से बांटा गया है. इस जादुई डिजाइन की वजह से सुबह के व्यस्त घंटों में भी सैकड़ों ट्रेनें बिना किसी शोर और भीड़भाड़ के अपनी मंजिल तक पहुंचती हैं. न्यूयार्क जैसे भागदौड़ वाले शहर के बीच ऐसी व्यवस्था किसी अजूबे से कम नहीं लगती.

100 साल पुरानी इंजीनियरिंग जो आज भी है बेमिसाल

हैरानी की बात यह है कि इस भव्य टर्मिनल का निर्माण उस दौर में हुआ था जब आधुनिक तकनीकें और मशीनें मौजूद नहीं थीं. इसके बावजूद, इसके डिजाइन ने उन समस्याओं का समाधान पहले ही ढूंढ लिया था जो बड़े शहर आज भी झेल रहे हैं. यहां के ढलान वाले प्लेटफॉर्म ट्रेनों को प्राकृतिक रूप से धीमा करने में मदद करते हैं और इसके छिपे हुए स्तर लंबी दूरी की ट्रेनों को लोकल मुसाफिरों से अलग रखते हैं. इतना ही नहीं, इसकी हर बारीक डिजाइन मुसाफिरों का समय और ऊर्जा बचाने के लिए तैयार की गई है.

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ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल की पहचान केवल पटरियों और ट्रेनों तक सीमित नहीं है. मुसाफिरों की सुविधा के लिए इस परिसर में शानदार रेस्तरां, दुकानें और एक विशाल फूड मार्केट मौजूद है. इस इमारत की सबसे अनूठी विशेषता इसकी ऊंची छत है, जिसे नक्षत्रों और तारों की बेहद खूबसूरत पेंटिंग से सजाया गया है. इस कलाकारी का आकर्षण इतना अधिक है कि बहुत से लोग सिर्फ छत को निहारने और मुख्य हॉल के बीचों-बीच लगी ऐतिहासिक घड़ी के पास दोस्तों से मिलने पहुंचते हैं. भारी भीड़ के बावजूद, स्टेशन का डिजाइन हर मुसाफिर को एक निजी और सुकून भरा अहसास देता है.

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