भारत के इस गांव में एंट्री के लिए लेना पड़ता है टिकट, फ्री में मिलता है खाना!

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक ऐसा अनोखा गांव है, जहां प्रवेश के लिए पर्यटकों को ₹20 का टिकट लेना पड़ता है. यह गांव प्राचीन भारतीय संस्कृति और आधुनिक सुविधाओं का एक अनोखा संगम है, जहां अपना चिड़ियाघर, ओपन जिम और बोटिंग जैसी सुविधाएं मौजूद हैं.

Advertisement
गाजीपुर का वो कोना, जहां बिना पर्ची एंट्री नहीं (Photo: facebook.com Khurpi Nature Village) गाजीपुर का वो कोना, जहां बिना पर्ची एंट्री नहीं (Photo: facebook.com Khurpi Nature Village)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST

आमतौर पर हमें अपने देश के किसी गांव में जाने के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं होती, लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक ऐसा गांव बसता है, जिसके कायदे-कानून किसी बड़े शहर के म्यूजियम या एम्यूजमेंट पार्क जैसे हैं.

इस गांव में एंट्री करने के लिए आपको बाकायदा अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है और टिकट काउंटर से पर्ची कटवानी होती है. सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि भला गांव देखने के लिए पैसे कौन देता है, लेकिन इस टिकट वाले गांव की हकीकत और इसके पीछे का नेक मकसद आपको हैरान कर देगा.  

Advertisement
पेंटिंग्स के जरिए भारतीय संस्कृति का पाठ (Photo: facebook.com Khurpi Nature Village)

यह भी पढ़ें: दुनिया का वो स्टेशन जहां एंट्री है 'एग्जिट' नहीं, स्टेशन पर ही कैद हो जाते हैं लोग!

यहां की मिट्टी में हैं शहर जैसी सुविधाएं 

गाजीपुर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर बना यह 'खुरपी नेचर विलेज' किसी आधुनिक रिसॉर्ट और प्राचीन गांव का एक बेजोड़ संगम है. इसे बिल्कुल पुराने भारतीय गांवों की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, ताकि यहां आने वालों को अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस हो. लेकिन इसकी सुविधाएं किसी को भी हैरान कर सकती हैं. बच्चों के लिए तो यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है, क्योंकि यहां उनका अपना एक छोटा सा चिड़ियाघर है.

इसके अलावा, सेहत के प्रति जागरूक लोगों के लिए इस जगह खुले में जिम बनाया गया है, जहां लोग ताजी हवा के बीच वर्जिश कर सकते हैं. पगडंडियों पर घुड़सवारी का आनंद हो या शांत पानी में बोटिंग का लुत्फ, यहां मनोरंजन के इतने साधन हैं कि 20 रुपये का टिकट बहुत छोटा लगने लगता है.

Advertisement

इस गांव की एक और खास बात यहां की दीवारें हैं. पूरे विलेज में आपको ऐसी पेंटिंग्स मिलेंगी जो न केवल दिखने में सुंदर हैं, बल्कि समाज को एक गहरा संदेश भी देती हैं. अगर आप अपने बच्चों को मोबाइल और गैजेट्स की दुनिया से बाहर निकालकर भारतीय संस्कृति और प्रकृति के करीब लाना चाहते हैं, तो यह जगह सबसे बेस्ट है. यहां आकर बच्चों को पता चलता है कि हमारे पूर्वज कैसे रहते थे और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना क्यों जरूरी है.

यह भी पढ़ें: कम बजट में चाहिए बॉलीवुड जैसी लोकेशन, इन 5 जगहों पर बनेगी शानदार रील

सिर्फ घूमना ही नहीं, यहां दिल भी जीत लेती है प्रभु की रसोई

इस गांव का मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि परोपकार करना भी है. यहां प्रभु की रसोई नाम से एक खास पहल चलती है, जहां हर दिन करीब 100 से 150 गरीबों और जरूरतमंदों को सम्मान के साथ खाना खिलाया जाता है.

खास बात यह है कि गांव में पर्यटकों से मिलने वाले पैसे और दान का बड़ा हिस्सा इसी रसोई में इस्तेमाल होता है. गांव के संचालकों का मानना है कि उनके आसपास कोई भी इंसान भूखा नहीं सोना चाहिए. इसी सेवा भाव और अनोखी बनावट की वजह से आज यह गांव पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement