गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी की तारीख करीब आते ही हर भारतीय के मन में तिरंगे की आन-बान और शान की लहर दौड़ने लगती है. इस दिन राजधानी दिल्ली की राजपथ (कर्तव्य पथ) पर होने वाली भव्य परेड को देखना एक अलग ही रोमांच पैदा करता है. अगर आप दिल्ली में हैं, तो परेड और सेना के शौर्य को करीब से देखना आपके लिए गणतंत्र दिवस का सबसे नायाब तोहफा हो सकता है.
लेकिन देशभक्ति का यह जज्बा सिर्फ दिल्ली की परेड तक सीमित नहीं है. भारत के नक्शे पर कई ऐसे ऐतिहासिक और गौरवशाली स्थान मौजूद हैं, जिनकी हवाओं में आज भी वीरों की शहादत और आजादी की गूंज महसूस की जा सकती है. अगर आप इस 26 जनवरी अपनी छुट्टी को यादगार बनाना चाहते हैं, तो इन खास जगहों का रुख कर सकते हैं, जहां पहुंचते ही आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा.
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शान-ए-दिल्ली- लाल किला और इंडिया गेट
गणतंत्र दिवस के जश्न की सबसे खूबसूरत तस्वीर देखनी हो, तो दिल्ली का कोई मुकाबला नहीं है. यहां कर्तव्य पथ पर निकलने वाली झांकियां और सेना के करतब देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है. परेड के बाद आप मुगलकालीन वैभव के प्रतीक लाल किले की प्राचीर देख सकते हैं या इंडिया गेट के साये में तिरंगे की छटा निहार सकते हैं. इन ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करना किसी भी भारतीय के लिए गर्व का क्षण होता है.
नेशनल वॉर मेमोरियल
इंडिया गेट के ठीक पास स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल आधुनिक भारत की सबसे भव्य स्मारकों में से एक है. 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित यह स्मारक उन जांबाज सैनिकों को समर्पित है, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी. यहां की दीवारों पर उकेरे गए शहीदों के नाम और 'अमर चक्र' की ज्योति को देखकर किसी की भी आंखें नम और मन गर्व से भर सकता है.
प्रयागराज का आजाद पार्क
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में स्थित 'चंद्रशेखर आजाद पार्क' (पूर्व में अल्फ्रेड पार्क) वीरता की एक ऐसी मिसाल है, जिसे दुनिया कभी नहीं भूल सकती. यही वह जगह है जहां 27 फरवरी 1931 को क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया था. जब अंतिम गोली बची, तो उन्होंने अपनी कसम निभाने के लिए खुद को गोली मार ली थी, ताकि वे जीते-जी कभी अंग्रेजों के हाथ न आएं. इस पार्क की मिट्टी आज भी युवाओं में जोश भर देती है.
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झांसी का किला
'खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी'... इन पंक्तियों को याद करते हुए जब आप झांसी के किले में कदम रखते हैं, तो इतिहास जीवंत हो उठता है. 17वीं शताब्दी में बना यह किला रानी लक्ष्मी बाई के अदम्य साहस का प्रतीक है. अपने बेटे को पीठ पर बांधकर अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाली रानी की वीरता के किस्से आज भी इस किले की दीवारों में कैद हैं. गणतंत्र दिवस पर यहां जाना एक प्रेरणादायक अनुभव होता है.
जलियांवाला बाग- शहादत की वो अनकही दास्तान
पंजाब के अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग मेमोरियल वह स्थान है, जो हमें आजादी की कीमत का एहसास कराता है. 13 अप्रैल 1919 का वो काला दिन, जब जनरल डायर के आदेश पर निहत्थे मासूमों पर गोलियां बरसाई गई थीं, आज भी हर भारतीय को भावुक कर देता है. यहां की दीवारों पर मौजूद गोलियों के निशान और वो खूनी कुआं हमें याद दिलाते हैं कि यह गणतंत्र हमें कितनी बड़ी कुर्बानी के बाद मिला है.
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