कोहरे और ठंड के साए में माघ मेला, प्रयागराज जा रहे हैं तो अपनाएं ये खास टिप्स

अगर आप कोहरे के बीच माघ मेला 2026 के लिए प्रयागराज जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो थोड़ी सी लापरवाही आपकी यात्रा बिगाड़ सकती है. जानिए वे सभी जरूरी बातें, जो आपकी संगम यात्रा को सुरक्षित और सुखद बनाएंगी.

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माघ मेले के यात्री सावधानी से सफर करें (Photo: PTI) माघ मेले के यात्री सावधानी से सफर करें (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:17 PM IST

जनवरी की कड़ाके की ठंड और उत्तर भारत के आसमान में छाया घना कोहरा इस समय माघ मेला 2026 के श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. संगम की रेती पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से लाखों लोग प्रयागराज पहुंच रहे हैं, लेकिन कोहरे की वजह से रेल यातायात पर बुरा असर पड़ा है. विजिबिलिटी कम होने के कारण अधिकतर ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटे की देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को स्टेशनों पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. ऐसे में अगर आप भी इस पावन मेले का हिस्सा बनने के लिए घर से निकलने वाले हैं, तो रेलवे और प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षा के इन नियमों को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है.

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यात्रा की प्लानिंग से लेकर ट्रेनों की पल-पल की जानकारी

प्रयागराज की ओर रुख करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी ट्रेन अपने सही समय पर है या नहीं. इसके लिए आप रेल मदद हेल्पलाइन नंबर 139 या आधिकारिक ऐप का सहारा ले सकते हैं, ताकि स्टेशन पर होने वाली असुविधा से बचा जा सके. इतना ही नहीं, मुख्य स्नान पर्वों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे अक्सर ट्रेनों के रूट और स्टेशनों में बदलाव करता है, विशेष रूप से प्रयागराज संगम स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों पर पैनी नजर रखना आवश्यक है.

इसके अलावा, श्रद्धालुओं को स्टेशन तक पहुंचने में आसानी हो, इसके लिए कुछ प्रमुख ट्रेनों को प्रयाग जैसे स्टेशनों पर अतिरिक्त स्टॉपेज दिया गया है. यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे स्टेशन पर लगे डिजिटल डिस्प्ले और घोषणाओं को ध्यान से सुनें, क्योंकि कोहरे के कारण आखिरी वक्त पर प्लेटफॉर्म में बदलाव की संभावना बनी रहती है.

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स्टेशन की नई पार्किंग व्यवस्था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जब आप प्रयागराज जंक्शन, सूबेदारगंज या छिवकी स्टेशन पहुंचते हैं, तो वहां की नई व्यवस्थाओं का ख्याल रखना भी आपकी जिम्मेदारी है. माघ मेले की सुरक्षा और भीड़ के प्रबंधन को देखते हुए प्रशासन ने 17 फरवरी तक इन प्रमुख स्टेशनों पर पार्किंग को पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद कर दिया है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को निजी वाहनों के बजाय रेलवे द्वारा चलाई जा रही विशेष शटल बसों या ई-रिक्शा का उपयोग करना चाहिए, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति न बने.

इसके साथ ही, सुरक्षा के लिहाज से पूरे स्टेशन परिसर को 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है और चप्पे-चप्पे पर आरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया है. इतना ही नहीं, यात्रियों की मदद के लिए पूछताछ काउंटरों की संख्या भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके.

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एक बार जब आप मेला क्षेत्र की सीमाओं में प्रवेश कर जाते हैं, तो वहां की ठंड और कोहरा आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है. इससे बचने के लिए अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े और ओढ़ने का सामान जरूर लाएं, क्योंकि संगम तट पर सर्द हवाएं काफी तेज होती हैं. इसके अलावा, सुरक्षा का एक और अहम पहलू छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा से जुड़ा है.

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भीड़ में अपनों के बिछड़ने का डर बना रहता है, इसलिए उनकी जेब में हमेशा एक लमिनेटेड चिट रखें जिस पर उनका नाम और मोबाइल नंबर साफ-साफ लिखा हो. इससे फायदा यह होगा कि बिछड़ने पर प्रशासन के 'खोया-पाया केंद्र' से तुरंत मदद मिल सकेगी. इतना ही नहीं, स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए केवल आरओ वाटर एटीएम या बंद बोतल का ही पानी पिएं, ताकि दूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके. इन सावधानियों का पालन करके आप अपनी माघ मेला यात्रा को सुरक्षित बना सकते हैं.
 

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