कहानी उस 'स्वर्ग' की, जिसके सफर पर निकली थी पाइपर, लेकिन लौटी सिर्फ लाश!

कगारी द्वीप को दुनिया में डिंगो की सबसे शुद्ध नस्ल का घर माना जाता है. द्वीप के प्रशासन द्वारा पर्यटकों को हमेशा चेतावनी दी जाती है कि वे डिंगो से दूरी बनाकर रखें, अकेले न घूमें और उन्हें खाना न खिलाएं.

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कनाडाई टूरिस्ट की मौत का अनसुलझा रहस्य (Photo-Pixabay) कनाडाई टूरिस्ट की मौत का अनसुलझा रहस्य (Photo-Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:42 PM IST

प्रशांत महासागर के नीले पानी के किनारे, जब सूरज की पहली किरणें रेत को चूम रही थीं, तब 19 साल की मासूम पाइपर जेम्स अपने सपनों को जीने के लिए निकली थी. एक युवा लड़की, जिसकी आंखों में दुनिया देखने के हजार सपने थे और दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी, वो लड़की इस बात से बेखबर की ये सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर होगा.  

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पाइपर ऑस्ट्रेलिया के उस खूबसूरत द्वीप पर इस उम्मीद में गई थी कि वहां की प्राकृतिक सुंदरता को अपनी यादों में समेट घर लौटेगी. वह नहीं जानती थी कि जिस जगह को दुनिया 'स्वर्ग' कहती है, वहां उसकी जिंदगी का सूरज हमेशा के लिए अस्त होने वाला है. जिस लड़की के दीदार के लिए उसका परिवार कनाडा में इंतजार कर रहा था, वहां से सिर्फ उसकी मौत की खबर आई. इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है और अब हर कोई उस रहस्यमयी 'कगारी' (K’gari) द्वीप की चर्चा कर रहा है, जहां एक मासूम लड़की की जान चली गई.

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कगारी द्वीप, जिसे दुनिया सालों तक 'फ्रेजर आइलैंड' के नाम से जानती थी, ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड तट पर स्थित है. यह दुनिया का सबसे बड़ा रेतीला द्वीप है. स्थानीय 'बुत्चुल्ला' आदिवासियों की भाषा में 'कगारी' का अर्थ 'स्वर्ग' होता है. अपनी सफेद चमकती रेत, नीली झीलों और घने जंगलों की वजह से इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया है. लोग यहां प्रकृति के सबसे करीब होने का अनुभव करने आते हैं, लेकिन इसी खूबसूरती के पीछे एक खतरनाक जंगली सच भी छिपा है.

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क्यों चर्चा में है यह जगह?

पाइपर की मौत के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वहां ऐसा क्या हुआ? दरअसल, यह द्वीप 'डिंगो' (Dingoes) यानी ऑस्ट्रेलिया के जंगली कुत्तों के लिए जाना जाता है. कगारी पर रहने वाले डिंगो पूरी दुनिया में अपनी शुद्ध नस्ल के लिए मशहूर हैं. हालांकि वे देखने में साधारण कुत्तों जैसे लगते हैं, लेकिन वे बेहद शातिर और आक्रामक शिकारी होते हैं. प्रशासन यहां आने वाले सैलानियों को सख्त हिदायत देता है कि वे कभी अकेले न घूमें और डिंगो को पालतू जानवर समझने की गलती न करें.

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कगारी की 'विश्व धरोहर सलाहकार समिति' ने पिछले साल फरवरी में ही चेतावनी दी थी कि "अत्यधिक पर्यटन" के कारण इस द्वीप की इकोलॉजी पूरी तरह नष्ट होने के कगार पर है, इसके बावजूद, स्थानीय अधिकारियों ने पर्यटकों की संख्या को सीमित करने वाले प्रस्तावों को लगातार खारिज किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि डिंगो को हटाने से इंसानों की सुरक्षा पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा. असली समस्या इंसानों का व्यवहार है, जब तक आप द्वीप पर डिंगो के प्रति इंसानों के व्यवहार को नहीं सुधारेंगे, तब तक सुरक्षा की समस्या कभी हल नहीं होगी.

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पाइपर के साथ क्या हुआ?

पाइपर पिछले कुछ हफ्तों से इसी द्वीप पर काम कर रही थी. जिस सुबह वह स्वीमिंग के लिए निकली, वह उसका आखिरी दिन साबित हुआ. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने की बात कही गई है, लेकिन शरीर पर डिंगो के काटने के गहरे निशान मिले हैं. यह रहस्य अभी बना हुआ है कि पहले हमला हुआ या वह समुद्र की लहरों का शिकार बनीं. उनके पिता टॉड जेम्स के शब्द हर किसी की आंखें नम कर देते हैं- "हम बस यह यकीन करना चाहते हैं कि वह डूबी होगी, क्योंकि जंगली कुत्तों का शिकार होना बहुत खौफनाक कल्पना है."

कगारी द्वीप, जिसे पहले फ्रेजर आइलैंड (Fraser Island) के नाम से जाना जाता था, साल 2023 में इसका नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर 'कगारी' कर दिया गया. अपनी प्राचीन झीलों, सफेद रेत और घने वर्षावनों के कारण इसे 1992 में यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था. इस द्वीप का इतिहास जितना समृद्ध है, उतना ही यहां के नियम सख्त हैं, क्योंकि यहां वन्यजीवों और इंसानों के बीच का संघर्ष अक्सर खतरनाक मोड़ ले लेता है. पाइपर की मौत ने एक बार फिर इस द्वीप पर पर्यटकों की सुरक्षा और डिंगो के व्यवहार पर गंभीर बहस छेड़ दी है

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