बिना परेशानी के अकेले घूमें माघ मेला! सामान की सुरक्षा से लेकर घाटों के चुनाव तक ये है पूरी गाइड

माघ मेले में अकेले घूमना जितना सुकून भरा हो सकता है, उतना ही सतर्कता भी मांगता है. संगम की रेती पर लाखों लोगों की भीड़ के बीच छोटी सी लापरवाही बड़ी परेशानी बन सकती है. ऐसे में सही समय, सुरक्षित घाट और समझदारी से किया गया सफर आपकी सोलो ट्रिप को यादगार बना सकता है.

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माघ मेले में भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी या देर शाम को घाटों पर जाएं (Photo: PTI) माघ मेले में भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी या देर शाम को घाटों पर जाएं (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:02 PM IST

प्रयागराज की पावन धरती पर माघ मेले में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. यह आध्यात्मिक मेला 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें देश-दुनिया से करोड़ों श्रद्धालु शिरकत करेंगे. वैसे तो लोग यहां परिवार के साथ आते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे भी पर्यटक होते हैं जो 'सोलो ट्रिप' यानी अकेले ही इस मेले का अनुभव करना चाहते हैं. सच तो यह है कि अकेले यात्रा करना जितना रोमांचक है, संगम की भारी भीड़ में खुद को संभालना उतना ही चुनौती पूर्ण भी हो सकता है.

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अगर आप भी इस बीच अकेले माघ मेला घूमने का मन बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. तो चलिए जानते हैं, उन खास तरीकों के बारे में जिनसे आपकी यह यात्रा सुरक्षित और यादगार बन सकती है.

दस्तावेज, पैसे और सुरक्षा का रखें खास ख्याल

अकेले यात्रा करते समय आपकी सबसे बड़ी ताकत आपकी पूर्व तैयारी होती है. इतना ही नहीं, सुरक्षा के लिहाज से अपना आधार कार्ड या कोई भी वैध आईडी प्रूफ हमेशा अपने साथ रखना न भूलें. दरअसल, भीड़भाड़ वाली जगहों पर जेबकतरों का अंदेशा रहता है, इसलिए जेब में ज्यादा नकद रखने के बजाय डिजिटल पेमेंट यानी UPI का अधिक इस्तेमाल करना समझदारी है. यही नहीं, मेले के व्यस्त इलाकों में अपने बैग और मोबाइल को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतें और कोशिश करें कि कीमती सामान कम से कम ले जाएं. दरअसल, सचेत रहकर आप किसी भी अप्रिय स्थिति से बच सकते हैं और अपनी यात्रा का आनंद ले सकते हैं.

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परिवहन और समय का सही चुनाव

मेले के विशाल क्षेत्र में घूमने के लिए सही साधन का चुनाव आपका काफी समय और ऊर्जा बचा सकता है. इसके अलावा, मुख्य घाटों तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा या साइकिल रिक्शा सबसे सुलभ विकल्प हैं, जो आपको मुख्य चौराहों तक आसानी से छोड़ देते हैं. यही नहीं, अगर आप मेले की गलियों को करीब से देखना चाहते हैं, तो पैदल चलना सबसे अच्छा तरीका है. दरअसल, भीड़ से बचने के लिए समय का चुनाव बहुत मायने रखता है. यदि आप शांति से स्नान करना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी यानी ब्रह्म मुहूर्त में या फिर देर शाम को मेला क्षेत्र में जाएं, क्योंकि इस समय आम समय की तुलना में भीड़ काफी कम होती है.

अकेले घूमते समय अपना बोझ कम रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है. यही वजह है कि अपने साथ केवल एक हल्का पिट्ठू बैग रखें जिसमें पानी की बोतल, जरूरी दवाएं और ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े मौजूद हों. इसके अलावा, यदि आप कहीं रास्ता भटक जाएं या किसी जानकारी की जरूरत हो, तो स्थानीय निवासियों या वहां तैनात पुलिसकर्मियों से मदद लेने में बिल्कुल न हिचकिचाएं. दरअसल, प्रयागराज की पुलिस और प्रशासन श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 24 घंटे तैनात रहते हैं, जिससे आपकी यात्रा की राह आसान हो जाती है.

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शांति और सुरक्षा के लिए सबसे उत्तम घाट

स्नान के लिए सही घाट का चुनाव आपकी सुरक्षा को सुनिश्चित करता है. यही नहीं, त्रिवेणी संगम का मुख्य घाट सबसे पवित्र माना जाता है, लेकिन यहां सबसे अधिक भीड़ होती है, इसलिए यहां नाव के जरिए जाना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है. इसके अलावा, यदि आप शांति और सुकून की तलाश में हैं, तो किला घाट आपके लिए सबसे अच्छा है क्योंकि यहां तुलनात्मक रूप से भीड़ कम रहती है. यही नहीं, अरैल घाट और सरस्वती घाट भी अकेले यात्रियों के लिए बेहद सुरक्षित माने जाते हैं. दरअसल, इन घाटों से भी आप नाव के जरिए संगम की मुख्य धारा तक पहुंच सकते हैं और बिना किसी हड़बड़ी के अपनी आस्था की डुबकी लगा सकते हैं.

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