हिमालय की वो झील जहां आज भी बिखरे हैं सैकड़ों कंकाल, रहस्य बना है मौत का सच

हिमालय की गोद में लगभग 5029 मीटर की ऊंचाई पर स्थित उत्तराखंड की रूपकुंड झील आज भी दुनिया की सबसे रहस्यमयी जगहों में गिनी जाती है. 'कंकाल झील' के नाम से मशहूर इस स्थान पर सैकड़ों इंसानी हड्डियां और खोपड़ियां बिखरी पड़ी हैं, जो एडवेंचर प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए रोमांच और खौफ का अनोखा संगम पेश करती हैं.

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हिमालय का सबसे डरावना सच (Photo: Getty images) हिमालय का सबसे डरावना सच (Photo: Getty images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:50 AM IST

अगर आप एडवेंचर और ट्रेकिंग के शौकीन हैं, तो हिमालय की गोद में एक ऐसी जगह है जो आपको रोमांच के साथ-साथ खौफ से भी भर देगी. उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित रूपकुंड झील को दुनिया 'कंकाल झील' के नाम से जानती है. समुद्र तल से करीब 5029 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस झील के किनारे जब आप पहुंचते हैं, तो नीले पानी के बजाय इंसानी खोपड़ियां और हड्डिया आपका स्वागत करती हैं. यह जगह जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यमयी भी. ये कंकाल यहां कहां से आए और इन लोगों की मौत कैसे हुई? यह सवाल आज भी वैज्ञानिकों और ट्रेकर्स के लिए एक बड़ी पहेली बना हुआ है.

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रूपकुंड झील का रहस्य पहली बार साल 1942 में दुनिया के सामने आया, जब एक ब्रिटिश फॉरेस्ट गार्ड ने यहां भारी संख्या में इंसानी कंकाल बिखरे हुए देखे. शुरुआत में लगा कि ये शायद युद्ध में मारे गए सैनिकों के अवशेष हैं, लेकिन शोध के बाद जो सच सामने आया उसने सबको हैरान कर दिया. इतना ही नहीं, तब से लेकर आज तक यह झील देसी और विदेशी पुरातत्व विभागों के लिए रिसर्च का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है.

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हजारों साल पुरानी है ये हड्डियों वाली झील

सालों तक चली रिसर्च और कार्बन डेटिंग के बाद वैज्ञानिकों ने बताया कि ये कंकाल करीब 850 ईस्वी के हैं. यानी ये लोग आज से लगभग 1200 साल पहले यहां आए थे. इसके अलावा, चौंकाने वाली बात यह है कि इन कंकालों के सिर और कंधों की हड्डियों पर दरारें पाई गई हैं. शोधकर्ताओं का मानना है कि उनकी मौत किसी हथियार से नहीं, बल्कि आसमान से गिरने वाली किसी गोलाकार चीज की चोट से हुई थी.

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वैज्ञानिक अपनी थ्योरी देते हैं, लेकिन यहां के स्थानीय लोगों के पास अपनी एक अलग कहानी है. लोक कथाओं के अनुसार, सदियों पहले यहां इतनी भीषण बर्फबारी हुई थी कि जमीन कई सेंटीमीटर तक बर्फ की चादर से ढक गई थी. यही नहीं, माना जाता है कि उस दौरान अचानक आए बर्फीले तूफान और आसमान से गिरे बड़े-बड़े ओलों की वजह से यहां मौजूद सभी लोगों की एक साथ मौत हो गई थी. ठंड इतनी ज्यादा थी कि आज भी कई कंकालों पर मांस के अवशेष और बाल सुरक्षित मिलते हैं.

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ऐस में सवाल यह भी उठता है कि इतने सारे लोग इतनी ऊंचाई पर आखिर कर क्या रहे थे? दरअसल, रूपकुंड झील 'नंदा देवी राजजात' के प्रसिद्ध तीर्थ मार्ग पर स्थित है. इतना ही नहीं, यहां हर 12 साल में नंदा देवी की एक विशाल यात्रा निकलती है. माना जाता है कि ये कंकाल उन्हीं तीर्थयात्रियों के हो सकते हैं जो यात्रा के दौरान किसी प्राकृतिक आपदा का शिकार हो गए थे. हालांकि, ठोस प्रमाण आज भी किसी के पास नहीं हैं.

ट्रेकर्स के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है ये सफर

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तमाम रहस्यों के बावजूद, रूपकुंड झील हिमालय के सबसे पसंदीदा ट्रेकिंग रूट्स में से एक है. बर्फ से ढकी चोटियां और उनके बीच बिखरे ये नरमुंड एक ऐसा नजारा पेश करते हैं जो किसी का भी दिल दहला दे. यही वजह है कि एडवेंचर के शौकीन लोग इस 'मिस्ट्री लेक' की खूबसूरती और खौफ को करीब से महसूस करने के लिए यहां खिंचे चले आते हैं.

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