अगर आप इस साल महाशिवरात्रि पर किसी ऐसी यात्रा की तलाश में हैं, जहां अध्यात्म और रोमांच का अद्भुत संगम मिले, तो अपना बैग तैयार कर लीजिए. साल 2026 की महाशिवरात्रि कोई साधारण तिथि नहीं, बल्कि भक्ति का एक महा-संयोग है.
फाल्गुन मास का यह महापर्व 15 फरवरी की शाम से महादेव की दस्तक के साथ शुरू होगा, जिसका आध्यात्मिक समापन 16 फरवरी को होगा. यानी 15 फरवरी की पूरी रात जागरण और महादेव के उत्सव की रौनक रहेगी, जबकि 16 फरवरी को व्रत पारण और विदाई की रस्में निभाई जाएंगी. तो चलिए जानते हैं, भारत के उन 5 शहरों के बारे में जहां इस दो दिनी उत्सव में शिव भक्ति का असली और रूहानी रंग देखने को मिलता है.
1. वाराणसी, उत्तर प्रदेश
एक ट्रैवलर के लिए काशी से बेहतर अनुभव शायद ही कहीं मिले. महाशिवरात्रि की शुरुआत के साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर जाने वाली गलियां शिवमय हो जाती हैं. यहां की असली खूबसूरती अखाड़ों के साधुओं और नागा साधुओं की भव्य शोभायात्राओं में दिखती है. यही नहीं, पूरी रात शहर में जागरण, भजन और अघोरियों की साधना चलती रहती है. महाशिवरात्रि के अगले दिन जब आप मणिकर्णिका या दशाश्वमेध घाट पर सूरज की पहली किरण देखते हैं, तो शिव मंत्रों और दूर से आती अजान की गूंज आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगी.
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2. हरिद्वार, उत्तराखंड
अगर आप ठंडी हवाओं के बीच गंगा की लहरों और आस्था का संगम देखना चाहते हैं, तो हरिद्वार एक बेहतरीन विकल्प है. महाशिवरात्रि की रात यहां अखाड़ों के संतों का जमावड़ा लगता है और हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. इसके साथ ही, गंगा स्नान का अनुभव इस पर्व को और खास बना देता है. महाशिवरात्रि के बाद जब श्रद्धालु व्रत का पारण करने से पहले गंगा में डुबकी लगाते हैं, तो वह दृश्य लंबे समय तक याद में बना रहता है. इसके अलावा, यहां के कैंपों में रुकना और संतों के बीच समय बिताना एक यादगार ट्रैवल एक्सपीरियंस देता है.
3. उज्जैन, मध्य प्रदेश
उज्जैन यानी महाकाल की नगरी, जहां समय भी ठहर सा जाता है. घूमने वालों के लिए उज्जैन की महाशिवरात्रि सबसे रहस्यमयी अनुभवों में से एक होती है. इस अवसर पर मंदिरों के आसपास विशेष तांत्रिक अनुष्ठान और जागरण होते हैं. इतना ही नहीं, देर रात तक चलने वाले भजन, भस्म और डमरू की गूंज पूरे शहर को शिवमय कर देती है. अगले दिन भस्म आरती में शामिल होना और उसके बाद शिप्रा नदी के तट पर टहलना इस यात्रा को पूर्ण बना देता है.
4. बैद्यनाथ धाम, झारखंड
झारखंड का देवघर अपनी सादगी और गहरी आस्था के लिए जाना जाता है. महाशिवरात्रि पर बाबा बैद्यनाथ को जल चढ़ाने के लिए भक्तों की मीलों लंबी कतारें लगती हैं. दिलचस्प बात यह है कि रातभर मंदिर परिसर में शिव भजनों की गूंज सुनाई देती है. अगले दिन व्रत खोलते श्रद्धालुओं की भीड़ और शांत माहौल यहां के सामाजिक और धार्मिक रंग को करीब से दिखाता है.
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5. मदुरै, तमिलनाडु
दक्षिण भारत के मदुरै में महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उत्सव के रूप में मनाई जाती है. आपके लिए यहां की भव्य वास्तुकला और सांस्कृतिक परंपराएं खास आकर्षण हैं. खास बात यह है कि इस रात विवाह की रस्में प्रतीकात्मक रूप से दोहराई जाती हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. अगले दिन मंदिर में होने वाले विशेष अभिषेक और साज-सज्जा दक्षिण भारतीय शिव भक्ति की अनूठी झलक पेश करते हैं.
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