जैसलमेर की 'वायरल' महफिल, सुनहरी रेत पर शाम बिताने के लिए खर्च होंगे इतने पैसे

जैसलमेर में रेगिस्तान की वो शामें सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं, जहां ढोलक की थाप, लोकनृत्य और खुले आसमान के नीचे सजी महफिल लोगों को अपनी ओर खींचती है. लेकिन इन वायरल जगहों पर एक रात गुजारने में कितना खर्च आता है?

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थार के रेगिस्तान में सजती वायरल महफिल ( सांकेतिक फोटो: Pexels) थार के रेगिस्तान में सजती वायरल महफिल ( सांकेतिक फोटो: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

रेत के समंदर में ढलती शाम, आसमान में फैलता सुनहरा रंग और उसके बीच ढोलक-मंजीरे की थाप पर थिरकते कदम… जैसलमेर की इन रेतीली जगहों से जब-जब ऐसे नजारे कैमरे में कैद होते हैं, सोशल मीडिया पर वीडियो खुद-ब-खुद वायरल हो जाते हैं. लोग पूछते हैं ये जगह कौन-सी है, यहां जाना कितना महंगा है और क्या सच में यहां रात गुजारना इतना खास होता है, जितना वीडियो में दिखता है? तो चलिए जानते हैं इस वायरल महफिल की पूरी हकीकत.

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दरअसल, जैसलमेर के आसपास की सैम सैंड ड्यून्स और खूरी जैसे रेगिस्तानी इलाके आजकल सोशल मीडिया की खास पसंद बन चुके हैं. खासतौर पर शाम के वक्त यहां लगने वाली महफिलें लोगों को खूब लुभाती हैं. पर्यटक दिनभर रेगिस्तान घूमने के बाद जैसे ही सूर्यास्त के समय यहां पहुंचते हैं, माहौल बदलने लगता है. रेत पर सजी बैठकी, चारों ओर लालटेन की रोशनी और बीच में लोक कलाकारों की प्रस्तुति, यही वो पल होते हैं, जो मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड होकर वायरल हो जाते हैं.

इन जगहों पर हर शाम राजस्थानी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. पारंपरिक पोशाक में सजी महिलाएं घूमर और कालबेलिया जैसे लोकनृत्य पेश करती हैं, वहीं पुरुष कलाकार वाद्य यंत्रों के साथ ताल देते हैं. नृत्य सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रहता, कई बार कलाकार पर्यटकों को भी इस माहौल का हिस्सा बना लेते हैं. शायद यही वजह है कि यहां के वीडियो लोगों को बनावटी नहीं, बल्कि जिंदा और असली लगते हैं.

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नवंबर से फरवरी के बीच इन जगहों की रौनक सबसे ज्यादा होती है. ठंड का मौसम, छुट्टियों का दौर और देश-विदेश से आने वाले सैलानी, सब मिलकर यहां की शामों को खास बना देते हैं. इसी सीजन में सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं, जिनमें लोग रेगिस्तान की रात, नृत्य और खुले आसमान के नीचे बिताए पलों की तारीफ करते नजर आते हैं.

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जेब पर कितना पड़ता है रेगिस्तान में ठहरने का बोझ

अब बात आती है खर्च की, अगर आप भी यहां एक रात रुकने का प्लान बना रहे हैं, तो बजट पहले से तय करना जरूरी है. सामान्य तौर पर यहां एक रात ठहरने का खर्च प्रति व्यक्ति करीब 2,000 रुपये से शुरू हो जाता है. इसमें रात का खाना और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल रहता है. अगर आप बेहतर सुविधाएं, आरामदायक टेंट और ज्यादा एक्टिविटी चाहते हैं, तो यही खर्च 5,000 से 7,000 रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकता है. इन पैकेजों में अक्सर ऊंट या जीप से रेगिस्तान की सैर, शाम का सांस्कृतिक कार्यक्रम, रात का भोजन और अगली सुबह का नाश्ता शामिल होता है. हालांकि, नए साल या लंबी छुट्टियों के दौरान ये कीमतें थोड़ी बढ़ जाती हैं. यह निवेश आपको उस मिट्टी, संगीत और लोगों की कहानी से जोड़ता है जिसे दुनिया सोशल मीडिया पर वायरल महफिल के नाम से जानती है.

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