विदेश यात्रा में ‘रेल पास’ बना भारतीयों का गेमचेंजर, ट्रेन से घूम रहे दुनिया

विदेश यात्रा का तरीका अब भारतीयों के बीच तेजी से बदल रहा है. अब सिर्फ फ्लाइट पकड़कर एक शहर घूमने का दौर नहीं रहा, बल्कि देसी मुसाफिर अब यूरोप और एशिया में रेल नेटवर्क का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं.

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बच्चों के साथ रेल सफर को अब ज्यादा पसंद कर रहे परिवार (Photo: Pixabay) बच्चों के साथ रेल सफर को अब ज्यादा पसंद कर रहे परिवार (Photo: Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:58 PM IST

अब वो दिन गए जब भारतीयों के लिए विदेश यात्रा का मतलब सिर्फ एक शहर में उतरना और वहां की मशहूर जगहों को देखकर वापस आ जाना होता था. अब देसी मुसाफिरों का अंदाज पूरी तरह बदल चुका है. विदेशों में लैंड करने के बाद भारतीय अब सिर्फ उड़ानों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वहां के रेल नेटवर्क पर भी अपना कब्जा जमा रहे हैं.

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यूरोप की हसीन वादियां हों या जापान की बुलेट ट्रेन, भारतीय पर्यटक अब 'रेल पास' को अपना सबसे बड़ा हथियार बना रहे हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि महंगे यूरो और डॉलर के बीच भी बजट नहीं बिगड़ता और घूमने की पूरी आजादी मिलती है.

यूरोप की रेल यात्रा में बढ़ा भारतीयों का दबदबा

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, भारतीय यात्री अब यूरोप और पूर्वी एशिया घूमने के लिए रेल को पहली पसंद बना रहे हैं. आलम यह है कि 'स्विस ट्रैवल पास' खरीदने के मामले में भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है. वहीं पूरे यूरोप में कहीं भी आने-जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'यूरेल पास' के मामले में भी हम चौथे नंबर पर पहुंच गए हैं. यात्रियों का रुझान अब पॉइंट-टू-पॉइंट टिकट लेने के बजाय एक बार 'रेल पास' लेने की तरफ ज्यादा है, ताकि बार-बार टिकट खरीदने का झंझट न रहे.

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महंगाई से बचने का नया फॉर्मूला

यह बदलाव सिर्फ शौक के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत आर्थिक वजह भी है. आज के समय में जब रुपया थोड़ा कमजोर हुआ है और यूरो 100 रुपये के पार जा चुका है, तो यात्रियों के लिए होटल और खाने-पीने का खर्च बढ़ गया है. ऐसे में 'रेल पास' लागत को फिक्स रखने का एक शानदार मौका देता है. यात्रियों को पता होता है कि उन्होंने एक बार पास खरीद लिया, तो अब पूरे सफर में ट्रांसपोर्ट का खर्च जीरो हो जाएगा. इससे न सिर्फ पैसे बचते हैं, बल्कि आखिरी समय में यात्रा के प्लान में बदलाव करने की आजादी भी मिलती है.

पहले माना जाता था कि यूरोप में अकेले बैकपैकिंग करने वाले युवा ही रेल का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है. पिछले दो सालों में चाइल्ड पास की कैटेगरी में करीब 8% की बढ़ोतरी हुई है. इसका साफ मतलब है कि अब छोटे बच्चों वाले भारतीय परिवार भी यूरोप के भीतर रेल से सफर करना ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक मान रहे हैं. स्विट्जरलैंड जैसे देशों में तो ये पास सिर्फ रेल यात्रा ही नहीं, बल्कि म्यूजियम, केबल कार और पहाड़ी रेलगाड़ियों तक मुफ्त पहुंच भी दिलाते हैं, जो परिवारों के लिए एक बेहतरीन पैकेज बन जाता है.

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एशिया में जापान बना भारतीयों की नई पसंद

सिर्फ यूरोप ही नहीं, एशिया में भी भारतीयों का रेल प्रेम साफ दिख रहा है. जापान में भारतीय पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड 35% से ज्यादा का उछाल देखा गया है. खास बात यह है कि भारतीय अब सिर्फ टोक्यो या ओसाका जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं. 'जापान रेल पास' की मदद से अब वे क्यूशू जैसे दूरदराज और क्षेत्रीय इलाकों की भी सैर कर रहे हैं. बेहतर हवाई कनेक्टिविटी और शानदार रेल नेटवर्क ने जापान को भारतीयों के लिए एक नया हॉटस्पॉट बना दिया है.
 

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