इस पहाड़ पर हैं 900 मंदिर, क्यों रात होते ही हटा दिए जाते हैं इंसान!

गुजरात के पालीताना में स्थित शत्रुंजय पर्वत दुनिया का इकलौता ऐसा पहाड़ है, जहां 900 से भी ज्यादा संगमरमर के मंदिर हैं. इस पवित्र तीर्थ की सबसे हैरान करने वाली बात यहां का एक प्राचीन नियम है.

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एक ही पहाड़ी पर बने 900 से ज्यादा भव्य मंदिर (Photo: gujarattourism.com) एक ही पहाड़ी पर बने 900 से ज्यादा भव्य मंदिर (Photo: gujarattourism.com)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:06 PM IST

भारत रहस्यों और आस्थाओं का देश है, यहां हर मोड़ पर एक ऐसी कहानी मिलती है जो हैरान कर देती है. ऐसी ही एक जगह है गुजरात के भावनगर जिले में स्थित पालीताना शहर. पहली नजर में यह एक शांत सा शहर लगता है, लेकिन इसकी गोद में बसा शत्रुंजय पर्वत दुनिया का इकलौता ऐसा पहाड़ है, जहां 900 से ज्यादा मंदिर बने हुए हैं.

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सबसे हैरान करने वाली बात इन मंदिरों की संख्या नहीं, बल्कि यहां का एक सख्त नियम है. इस पवित्र पहाड़ी पर सूरज ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है, क्योंकि सूर्यास्त के बाद यहां किसी भी इंसान का रुकना पूरी तरह मना है. तो चलिए जानते हैं इस अनोखे पर्वत और इसकी सदियों पुरानी परंपरा के बारे में.

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जहां रात में रुकना है मना

शत्रुंजय पर्वत की महिमा का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इसे जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में गिना जाता है. मान्यता है कि जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से 23 ने इसी पावन धरती पर ज्ञान प्राप्त किया था. यही वजह है कि जब यहां संगमरमर से बने 900 से ज्यादा मंदिर सूरज की रोशनी में जगमगाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे आप धरती पर नहीं बल्कि साक्षात स्वर्ग में खड़े हों. लेकिन इस पहाड़ की सबसे अनोखी बात यह है कि इन मंदिरों को पूरी तरह देवताओं का निवास स्थान माना गया है, यानी यहां इंसानों का बसेरा वर्जित है. यही कारण है कि जैसे ही सूरज ढलता है, इस पूरी पहाड़ी को खाली कर दिया जाता है.

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मंदिर के पुजारी हों, रखवाले हों या फिर श्रद्धालु, सूर्यास्त के बाद हर किसी को नीचे उतरना ही पड़ता है. रात के सन्नाटे में यहां सिर्फ पूर्ण शांति और भक्ति का अहसास रहता है. जिसके चलते, दुनिया का यह इकलौता ऐसा पर्वत बन जाता है जहां कोई भी स्थायी रूप से निवास नहीं कर सकता.

इस शिखर तक पहुंचने का रास्ता किसी चुनौती से कम नहीं है. श्रद्धालुओं को पहाड़ की चोटी तक जाने के लिए करीब 3,800 पत्थर की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. यह यात्रा आम तौर पर सूर्योदय से पहले शुरू होती है ताकि धूप तेज होने से पहले चढ़ाई पूरी की जा सके. जो लोग पैदल नहीं चढ़ सकते, उनके लिए यहां डोली (पालकी) की सुविधा भी मौजूद है. सर्दियों के महीनों में कोहरे के बीच जब ये नक्काशीदार मंदिर धीरे-धीरे नजर आते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे आप धरती और आसमान के बीच कहीं तैर रहे हों. अगर आप पालीताना जाने का मन बना रहे हैं, तो अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सबसे अच्छा है, क्योंकि तब मौसम काफी सुहावना रहता 

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कैसे पहुंचें पालीताना?

पालीताना पहुंचना काफी आसान है और आप अपनी सुविधा के अनुसार रास्ता चुन सकते हैं. अगर आप हवाई सफर करना चाहते हैं, तो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट भावनगर है, जो यहां से महज 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. वहीं, रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए राहत की बात यह है कि पालीताना का अपना रेलवे स्टेशन है, जो गुजरात के तमाम बड़े शहरों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है.

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इसके अलावा, अगर आप सड़क मार्ग से आना पसंद करते हैं, तो भावनगर और अहमदाबाद से बस या टैक्सी के जरिए यहां बड़े आराम से पहुंचा जा सकता है. शत्रुंजय पर्वत की यह यात्रा न केवल आपको अध्यात्म से जोड़ती है, बल्कि प्रकृति और वास्तुकला का एक ऐसा अद्भुत मेल दिखाती है जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता.
 

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