भारत को नदियों का देश कहा जाता है क्योंकि यहां गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, सिंधु और प्रायद्वीपीय नदियों का एक विशाल नेटवर्क है, जिनके बिना जीवन नामुमकिन है. नदियों को कृषि, अर्थव्यवस्था और धार्मिक आस्था का मुख्य आधार माना जाता है और नदियों के पास बसे शहर देखने लोग दूर-दूर से आते हैं.
गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम देखने प्रयागराज और अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का संगम देखने के लिए रुद्रप्रयाग लोग बहुत जाते हैं. मगर क्या जानते हैं कि भारत में एक नदी ऐसी भी है, जो भारत और बांग्लादेश की सरहद भी बांटती है.
भारत से नेपाल और भूटान जाने वाले बॉर्डर्स के बारे में तो लोग अक्सर ही सुनते हैं, लेकिन इस खास जगह के बारे में बहुत ही कम लोगों तो पता है. अगर आपको घूमने का शौक है तो यह जगह आपके लिए बेस्ट होने वाली है, क्योंकि यहां पर आपको ऐसा बेहतरीन नजारा देखने को मिलेगा, जिसे देखकर आप अपनी पलकें झपकाना भूल जाएंगे, इस नदी एक खासियत यह भी है कि इसमें चल रही नाव ऐसी लगती है, जैसे उड़ रही है, क्योंकि यहां का पानी एकदम क्रिस्टल क्लीयर है.
हम जिस नदी की बात कर रहे हैं वो मेघालय की उमंगोट नदी (Umngot River) है, जिसे डावकी नदी (Dawki River) के नाम से भी जाना जाता है. यह नदी भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर पर स्थित है, यह नदी भारतीय राज्य मेघालय और दूसरी ओर बांग्लादेश के बीच प्राकृतिक सीमा बनाती है.
इस जगह पर जाने के लिए आपको मेघालय के पश्चिमी जयंतिया हिल्स जिले जाना होगा, जो राजधानी शिलांग से लगभग 95 किमी दूर है. यह नदी सिर्फ भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर पर होने की वजह से नहीं बल्कि अपने साफ पानी के लिए भी दुनियाभर में फेमस है.
शिलांग से डावकी नदी तक जाने का रास्ता बेहद मनमोहक है, पठार से होकर निकलने वाली डावकी नदी तक जाने के रास्ते में अधिकतर मेघायल के पठार नजर आते हैं और जैसे ही आप नीचे की साइड उतरते है तो सारा मैदानी एरिया नजर आने लगता है. चौंकने वाली बात यह है कि वो सारा मैदानी एरिया भारत का हिस्सा नहीं है बल्कि वो बांग्लादेश है.
डावकी नदी को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं और जंगलों के बीच इस खूबसूरत नदी के किनारे कैंपिंग करने का अपना एक अलग एक्सपीरियंस होता है. इसे टूरिस्ट के लिए बेस्ट बोटिंग डेस्टिनेशन भी माना जाता है, क्योंकि यहां का पानी इतना साफ होता है कि पानी के अंदर मछली, पत्थर सब कुछ एकदम साफ नजर आते हैं और ऊपर से देखने में ऐसा लगता है जैसे नाव हवा में हो. गुलाबी ठंडक के साथ यहां पर कैंपिंग करना बेहद मजेदार है और यहां टूरिस्ट्स को होमस्टे भी मिल जाते हैं, जिसकी वजह यह जगह धीरे-धीरे लोगों की फेवरेट डेस्टिनेशन भी बनती जा रही है.
उमंगोट नदी पर फेमस डाउकी पुल भारत और बांग्लादेश को आपस में जोड़ता है और इस ऐतिहासिक सस्पेंशन ब्रिज को साल 1932 में अंगेजों ने बनवाया था. इस पुल का डाउकी-तमाबिल व्यापार मार्ग के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है और यहां से नदी का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है.
इस नदी से 30 किलो मीटर दूर ही मौलिन्नोंग(Mawlynnong) नाम का एक गांव भी है, जिसे दुनिया का सबसे क्लीन गांव का खिताब भी मिल चुका है. इस गांव में जाने का रास्ते में लोगों को एक तरफ मैदान और एक तरह पहाड़ दिखाई देते हैं, क्योंकि डावकी से मावसिननोंग जाने का रास्ता बांग्लादेश बॉर्डर के साथ-साथ चलता है. पहाड़ी इलाका भारत का है और मैदानी बांग्लादेश का. यहां पर आपको पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी मिल जाएगा, लेकिन पूरे इलाके को अच्छी तरह से एक्सप्लोर करने के लिए टैक्सी लेना ही सही होगा.
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