300 करोड़ का ट्रेडिंग स्कैम, एक छोटी से गलती और अकाउंट हो जाएगा खाली, पुलिस ने किया अगाह

ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग स्कैम इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में पुलिस ने एक बड़ा खुलासा किया है. दरअसल ट्रेडिंग स्कैमर्स ने 300 करोड़ का स्कैम किया है. आइए जानते हैं ये स्कैम कैसे हो रहा है और आप इससे कैसे बच सकते हैं.

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ट्रेडिंग स्कैम लोगों को बना रहा कंगाल ट्रेडिंग स्कैम लोगों को बना रहा कंगाल

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:11 PM IST

दिल्ली पुलिस ने ₹300 करोड़ के बड़े साइबर फ्रॉड मामले का खुलासा करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. यह पूरा गिरोह फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और इंटरनेशनल साइबर नेटवर्क के जरिए लोगों को ठग रहा था.

पुलिस के मुताबिक इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और हजारों लोगों को निशाना बनाया गया. जांच में सामने आया है कि आरोपी ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के नाम पर लोगों को लुभाते थे.

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इसके लिए वे फर्जी ऐप और वेबसाइट बनाकर लोगों को हाई रिटर्न का लालच देते थे. शुरुआत में छोटे मुनाफे दिखाकर भरोसा जीता जाता था और बाद में बड़ी रकम निवेश करवाकर पैसे गायब कर दिए जाते थे.

पुलिस के अनुसार इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड भी गिरफ्तार कर लिया गया है. शुरुआती जांच में पता चला है कि इस गिरोह के तार विदेशों तक जुड़े हुए थे और साइबर क्राइम नेटवर्क के जरिए ऑपरेट किया जा रहा था. देशभर से इस मामले में 2000 से ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं.

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी लोगों से ठगी गई रकम को अलग-अलग खातों और डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर करते थे, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था. इसके लिए फर्जी दस्तावेज और शेल कंपनियों का भी इस्तेमाल किया गया.

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कैसे काम करता है ये पूरा साइबर फ्रॉड?

इस तरह के इन्वेस्टमेंट फ्रॉड आमतौर पर सोशल मीडिया, WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म से शुरू होते हैं. ठग पहले टारगेट चुनते हैं और फिर उन्हें इन्वेस्टमेंट एडवाइजर या स्टॉक एक्सपर्ट बनकर कॉन्टैक्ट करते हैं.

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कई बार वे खुद को किसी बड़ी इंटरनेशनल कंपनी या फाइनेंशियल फर्म से जुड़ा बताते हैं ताकि भरोसा जल्दी बने. इसके बाद विक्टिम को एक प्राइवेट ग्रुप में जोड़ा जाता है, जहां पहले से मौजूद कई फेक यूजर्” लगातार मुनाफे की बातें करते रहते हैं.

यह पूरा सेटअप एक स्क्रिप्ट के तहत चलता है, जिसमें हर मैसेज और बातचीत पहले से तय होती है. इसका मकसद होता है कि नए यूजर को लगे कि बाकी लोग भी पैसा कमा रहे हैं.

लोगों का भरोसा ऐसे जीतते हैं स्कैमर्स

जैसे ही भरोसा बनता है, विक्टिम को एक लिंक भेजा जाता है या ऐप डाउनलोड करवाया जाता है. यह ऐप दिखने में बिल्कुल असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसा होता है, जिसमें लाइव मार्केट डेटा, चार्ट और बैलेंस दिखाया जाता है. लेकिन असल में यह पूरी तरह कंट्रोल्ड सिस्टम होता है, जहां सारे आंकड़े ठग खुद बदलते हैं.

शुरुआत में यूजर से छोटी रकम निवेश करवाई जाती है और उसे तुरंत मुनाफा दिखाया जाता है. कई मामलों में थोड़ी रकम निकालने भी दी जाती है, ताकि भरोसा और मजबूत हो जाए. इसके बाद धीरे-धीरे यूजर को बड़ी रकम निवेश करने के लिए उकसाया जाता है.

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जब यूजर ज्यादा पैसा डाल देता है, तब असली खेल शुरू होता है. प्लेटफॉर्म पर बैलेंस और मुनाफा बढ़ता हुआ दिखता रहता है, लेकिन जब पैसे निकालने की कोशिश की जाती है तो अलग-अलग बहाने बनाए जाते हैं. कभी टैक्स, कभी प्रोसेसिंग फीस, कभी रिस्क फंड के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं.

ऐप से लेकर वॉलेट तक.. सबकुछ नकली

कुछ मामलों में यूजर का अकाउंट फ्रीज कर दिया जाता है और कहा जाता है कि KYC या वेरिफिकेशन पूरा करने के लिए अतिरिक्त भुगतान करना होगा. जैसे ही यूजर और पैसा डालता है, ठग अचानक संपर्क तोड़ देते हैं या प्लेटफॉर्म ही बंद कर दिया जाता है.

जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह पैसे को तुरंत कई लेयर्स में बांट देता था. पहले अमाउंट म्यूल अकाउंट्स में जाती थी, फिर वहां से क्रिप्टोकरेंसी या विदेशी खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी. इस मल्टी-लेयर ट्रांजैक्शन सिस्टम की वजह से पैसे को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है.

कई बार ये ठग कॉल सेंटर जैसे सेटअप से काम करते हैं, जहां अलग-अलग लोग अलग भूमिकाओं में होते हैं. कोई एडवाइजर बनता है, कोई कस्टमर सपोर्ट और कोई फाइनेंस मैनेजर. इससे पूरा ऑपरेशन एक असली कंपनी जैसा लगता है और विक्टिम को शक नहीं होता.

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दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस ऑपरेशन के जरिए एक बड़े इंटर-स्टेट साइबर फ्रॉड सिंडिकेट को तोड़ा गया है. फिलहाल पुलिस इस मामले में और लोगों की तलाश कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है.

ट्रेडिंग ऐप स्कैम से कैसे बचें?

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, ऐप या निवेश ऑफर पर भरोसा न करें. अगर कोई प्लेटफॉर्म बहुत ज्यादा मुनाफा देने का दावा करता है, तो उससे सावधान रहें. साइबर फ्रॉड से बचने के लिए हमेशा आधिकारिक और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें.

किसी भी ऐसे लिंक या किसी के कहे हुए पर भरोसा ना करें जो आपको पैसे लगाने के बाद कई गुना मुनाफा देने का दावा कर रहा हो. इस तरह के ज्यादातर दावे झूठे होते हैं और स्कैम का हिस्सा होते हैं. किसी ऐसे लिंक या ऐप को क्लिक ना करें जहां आपको ज्यादा कमाई का लालच दिया जा रहा है. 

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