आसमान छूने के लिए तैयार स्मार्टफोन्स की कीमतें, इस साल अब तक 40% महंगे हो गए हैं फोन्स

स्मार्टफोन्स की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. 2026 की शुरुआत से अब तक करीब 40 फीसदी तक कीमतें बढ़ चुकी हैं. अगले कुछ महीनों में स्मार्टफोन्स की कीमतें आसमान छू सकती हैं.

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तेजी से महंगे हो रहे हैं स्मार्टफोन्स तेजी से महंगे हो रहे हैं स्मार्टफोन्स

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:35 PM IST

अगर आपको लग रहा है कि पिछले कुछ महीनों में स्मार्टफोन अचानक महंगे हो गए हैं, तो यह सिर्फ आपका भ्रम नहीं है. भारत में OnePlus, Nothing, Redmi, Realme, Motorola और कई दूसरे ब्रांड्स ने चुपचाप अपने फोन की कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं.

कुछ फोन्स पर 2 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, तो कुछ फ्लैगशिप मॉडल सीधे 5 से 6 हजार रुपये महंगे हो गए हैं. और एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है. आने वाले महीनों में स्मार्टफोन्स की कीमतें आसमान छू सकती हैं.

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क्या RAMageddon?

सवाल यह है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि भारत में स्मार्टफोन की कीमतें तेजी से ऊपर जाने लगीं? इस पूरी कहानी के पीछे एक ऐसा शब्द है जो आम यूजर शायद पहली बार सुन रहा है वो है RAMageddon.

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टेक इंडस्ट्री में इस समय RAM और स्टोरेज चिप्स की भारी कमी चल रही है. वही RAM और NAND चिप्स जो हर स्मार्टफोन, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल और सर्वर में इस्तेमाल होते हैं. लेकिन अब इन चिप्स के लिए सबसे बड़ी लड़ाई मोबाइल कंपनियों और AI कंपनियों के बीच चल रही है.

दरअसल OpenAI, Google, Microsoft, Meta और दूसरी AI कंपनियां दुनिया भर में बड़े-बड़े AI डेटा सेंटर बना रही हैं. इन डेटा सेंर्स को चलाने के लिए भारी मात्रा में हाई-एंड मेमोरी चिप्स चाहिए.

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AI महंगाई की वजह बन रहा है

पहले जो फैक्ट्रियां स्मार्टफोन के लिए RAM और स्टोरेज बनाती थीं, अब उनका बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेेंस इंडस्ट्री की तरफ जा रहा है. नतीजा यह हुआ कि स्मार्टफोन कंपनियों के लिए जरूरी चिप्स महंगे होने लगे.

Nothing के CEO Carl Pei ने कुछ महीने पहले खुलकर कहा था कि DRAM और NAND मेमोरी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और कंपनियों के पास इसका बोझ कस्टमर्स पर डालने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ मेमोरी चिप्स की कीमतें पिछले साल के मुकाबले कई गुना तक बढ़ चुकी हैं.

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इसका असर अब सीधे भारत के बाजार में दिखने लगा है. OnePlus 15 जब लॉन्च हुआ था तो इसकी शुरुआती कीमत करीब 72,999 रुपये थी. अब वही फोन 77,999 रुपये तक पहुंच गया है. यानी कुछ ही महीनों में 5 हजार रुपये की बढ़ोतरी. OnePlus 15R भी लॉन्च प्राइस से लगभग 5 हजार रुपये महंगा हो चुका है.

Nothing Phone 4a Pro की कीमत भी 39,999 रुपये से बढ़कर लगभग 44,999 रुपये तक पहुंच गई. Redmi और Realme के कई मॉडल भी 2 हजार से 5 हजार रुपये तक महंगे हुए हैं.

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फ्लैगशिप से लेकर मिड रेंज तक हो रहे हैं महंगे

सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब सिर्फ फ्लैगशिप फोन ही नहीं, मिड-रेंज और बजट फोन भी प्रभावित हो रहे हैं. पहले 20 से 30 हजार रुपये वाले सेगमेंट में काफी आक्रामक प्राइसिंग देखने को मिलती थी, लेकिन अब कंपनियों के लिए वही कीमत बनाए रखना मुश्किल हो रहा है.

हिस्ट्री देखें तो भारत में स्मार्टफोन लगातार सस्ते होते गए थे. 2016 से 2023 के बीच कम कीमत में ज्यादा RAM, ज्यादा स्टोरेज और बेहतर कैमरा मिलने लगे थे. 10 हजार रुपये वाले फोन में भी 5G और 8GB RAM मिलने लगी थी. लेकिन अब वह दौर शायद खत्म होता दिख रहा है.

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काउंटर प्वाइंट रिसर्च के मुताबिक 2026 में स्मार्टफोन का एवरेज सेल वैल्यू करीब 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. यानी कंपनियां धीरे-धीरे हर सेगमेंट में कीमतें ऊपर ले जा रही हैं.

इसका असर सिर्फ नई लॉन्चिंग पर नहीं पड़ेगा. आने वाले महीनों में पुराने मॉडल भी महंगे हो सकते हैं क्योंकि स्टॉक खत्म होने के बाद नया स्टॉक ज्यादा कीमत पर आएगा. कई रिटेलर्स पहले से कह रहे हैं कि कंपनियां नई सप्लाई ज्यादा कीमत पर भेज रही हैं.

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50% तक महंगे हो सकते हैं स्मार्टफोन्स

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या फोन 40 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं? कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अगर RAM और NAND की कमी लंबी चली, तो अगले एक-दो साल में कई डिवाइसेज की कीमतों में 20 से 40 प्रतिशत तक का असर दिख सकता है.

खासकर वे फोन जिनमें ज्यादा RAM और स्टोरेज होता है. क्योंकि आज फ्लैगशिप स्मार्टफोन में 12GB, 16GB RAM और 512GB तक स्टोरेज आम हो गया है. यही सबसे महंगे कंपोनेंट बन चुके हैं.

सैमसंग के मोबाइल हेड TM Roh भी कह चुके हैं कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से स्मार्टफोन कंपोनेंट्स की कीमतें बढ़ रही हैं. यानी अब AI सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं बदल रहा, बल्कि आपके अगले फोन की कीमत भी तय कर रहा है.

एक और बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि कंपनियां अब सस्ते मॉडल कम बनाएं. क्योंकि कम मार्जिन वाले बजट फोन में बढ़ती लागत को संभालना मुश्किल हो रहा है. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां ज्यादा प्रीमियम फोन पर फोकस करेंगी और बजट सेगमेंट कमजोर हो सकता है.

बजट सेग्मेंट हुआ खराब

यानी वह दौर जहां हर साल कम दाम में ज्यादा फीचर्स मिलते थे, अब धीमा पड़ सकता है. इसका असर भारत जैसे बाजार में ज्यादा दिखेगा क्योंकि यहां ज्यादातर लोग 15 से 30 हजार रुपये वाले फोन खरीदते हैं.

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अगर इसी सेगमेंट में 4-5 हजार रुपये की बढ़ोतरी होती है, तो खरीदने का फैसला टल सकता है. शायद यही वजह है कि रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के स्मार्टफोन बाजार में बिक्री भी धीमी पड़ रही है.

अब कई लोग अपने पुराने फोन ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं. रीफर्बिश्ड फोन का बाजार भी तेजी से बढ़ सकता है क्योंकि नए फोन लगातार महंगे हो रहे हैं.

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि यह संकट जल्दी खत्म होता नहीं दिख रहा. मेमोरी कंपनियां नई फैक्ट्रियां बना रही हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सप्लाई सामान्य होने में 2027 या उससे ज्यादा समय लग सकता है.

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