उत्तर प्रदेश सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप पूछ एआई (Puch AI) के साथ किया गया 25,000 करोड़ रुपये का MoU कैंसिल कर दिया है. सरकार ने कहा है कि कंपनी इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं करा सकी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया.
गौरतलब है कि हाल ही में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के X पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया था. दरअसल उस पोस्ट में योगी ने लिखा था कि उत्तर प्रदेश सरकार राज्य AI इनिशिएटिव्स के लिए PuchAI के साथ 25 हजार करोड़ रुपये का MoU कर रही है. इसके बाद लोगों ने जब PuchAI के बारे में खंगाला तो पता चला कि ये महज एक साल पुराना स्टार्टअप है और इसका रेवेन्यू 50 लाख रुपये भी नहीं है.
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सवाल उठने लगे कि 25 हजार करोड़ की डील यूपी सरकार एक ऐसी कंपनी को क्यों दे रही है जिसने कभी इस स्केल का काम ही नहीं किया. ना इस कंपनी के पास इस तरह के काम करने का एक्सपीरिएंस है.
योगी को देनी पड़ी थी सफाई
X पर मचे बवाल के बाद सीएम योगी को एक दूसरा पोस्ट करके सफाई देनी पड़ी. पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ये सिर्फ एक ऐलान है और समझौता अभी हुआ नहीं है. डील तभी होगी जब कंपनी हर पैमाने पर खरी उतरेगी.
बता दें कि PuchAI के फाउंडर इससे पहले भी विवादों में रहे हैं. उन्होंने 100 बिलियन डॉलर्स में Perplexity खरीदने की बात कही थी. इसके लिए भी उनकी जम कर ट्रोलिंग हुई थी, क्योंकि कंपनी की वैल्युशन ही इतनी नहीं है.
कैंसिल हो गई डील
सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 23 मार्च 2026 को साइन किए गए इस MoU की तय प्रक्रिया के तहत समीक्षा की गई थी. इस दौरान कंपनी से जरूरी फिनांशियल डिटेल्स और दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए. ड्यू डिलिजेंस में यह भी सामने आया कि कंपनी के पास इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पर्याप्त नेटवर्थ और क्रेडिबल फिनांशियल लिंकेज नहीं हैं.
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InvestUP के X हैंडल से पोस्ट करके सरकार की तरफ से कहा गया है कि अब ये MoU कैंसिल किया जा रहा है. पोस्ट में लिखा गया है कि ट्रांसपेरेंसी और सुशासन के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है और अब इस समझौते से जुड़े किसी भी पक्ष पर कोई लाइब्लिटी नहीं रहेगा.
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बड़े MoU का ऐलान किया था. इस समझौते को उत्तर प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया था.
इस डील के तहत AI पार्क, बड़े डेटा सेंटर, AI कॉमन्स प्लेटफॉर्म और एक AI यूनिवर्सिटी बनाने जैसे बड़े प्लान शामिल थे, जिन्हें राज्य के टेक्नोलॉजी हब बनने की दिशा में अहम माना जा रहा था. लेकिन यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर सवाल उठने शुरू हो गए.
सोशल मीडिया पर उठा विवाद
जैसे ही 25,000 करोड़ के इस समझौते की जानकारी पब्लिक हुई, कई यूजर्स और विपक्षी नेताओं ने कंपनी की कैपेब्लिटी पर सवाल उठाए. आरोप लगे कि जिस कंपनी के साथ इतनी बड़ी डील की जा रही है, उसका रेवेन्यू बेहद कम है और वह इतनी बड़ी परियोजना को कैसे पूरा करेगी.
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि इतनी छोटी कंपनी के साथ इतना बड़ा समझौता सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है.
Puch AI की तरफ से क्या कहा गया
Puch AI के को-फाउंडर सिद्धार्थ भाटिया ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर आधारित था और इसमें सरकार के पैसे का इस्तेमाल नहीं होना था. उन्होंने यह भी कहा कि यह निवेश फेज में किया जाना था और इसमें बाहरी इन्वेस्टर्स की भूमिका होती.
कंपनी और फाउंडर को लेकर विवाद
Puch AI को लेकर टेक कम्युनिटी में भी कई सवाल उठे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी खुद का कोई बड़ा AI मॉडल डेवेलप नहीं करती, बल्कि ओपन सोर्स मॉडल्स पर आधारित सर्विसेज देती है. कुछ एक्सपर्ट्स ने इसे AI रैपर तक बताया, यानी ऐसी सर्विस जो मौजूदा AI टेक्नोलॉजी पर बनी हो, न कि खुद के टेक पर.
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