जासूसी के आपने अब तक कई केस सुने होंगे, लेकिन हाल ही में जासूसी का एक बेहद ही हैरान कर देने वाला केस सामने आया है. दरअसल, नाटो देशों के बेड़े में डच का युद्धपोत HNLMS Evertsen (एयर-डिफेंस फ्रिगेट) भी शामिल है, जिसकी लोकेशन को सुरक्षा के मद्देनजर सीक्रेट रखा है.
वॉरशिप HNLMS Evertsen (एयर-डिफेंस फ्रिगेट) की लोकेशन छिपाने के लिए रक्षा मंत्रालय बहुत सी सावधानी बरतता है. मगर एक छोटे से पोस्ट कार्ड ने वॉरशिप की लोकेशन उजागर कर दी. पोस्टकार्ड के अंदर एक ब्लूटूथ बेस्ड लोकेशन ट्रैकर छिपाकर जहाज पर सेंड किया था. ये जानकारी मीडिया रिपोर्टस से मिली है.
क्या है पूरा मामला?
डच की सरकार ने हाल ही में एक सुविधा शुरू की थी ताकि सैनिक का परिवार और उनके दोस्त पोस्टकार्ड भेज सकें. पोस्टकार्ड की वजह से एक बड़ी गलती हो गई.
एक पत्रकार ने मजाकिया अंदाज में या टेस्ट के तौर पर एक पोस्टकार्ड लिया. इसके बाद उस पोस्टकार्ड के अंदर एक छोटा सा ब्लूटूथ ट्रैकर छिपाकर जहाज पर सेंड कर दिया. मार्केट में ऐपल एयरटैग समेत कई ट्रैकर मौजूद हैं.
फिर पूरे जहाज की लाइव लोकेशन उजागर हो गई. फिर उन्होंने देखा कि जहाज क्रीट से निकलकर साइप्रस की तरफ जा रहा है.
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आखिर इतना खतरनाक क्यों है?
पत्रकार द्वारा भेजा गया छोटू ट्रैकर, असल में एक बड़ी खामी है, जो नौसेना जहाज और उसपर मौजूद सैनिकों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. पोस्ट कार्ड में ट्रैकर छिपाकर दुश्मन देश वॉरशिप की जानकारी हासिल कर सकता है. इससे आसानी से उस पर निगरानी या हमला हो सकता है.
आखिर में बंद कर दिया ट्रैकर
फिर 24 घंटे के अंदर के ट्रैकर को डिटेक्ट कर लिया गया है और फिर उसको बंद कर दिया गया है. अब डच नेवी ने इलेक्ट्रोनिक ग्रीटिंग कार्ड्स बैन कर दिए हैं.
आज के समय में छोटी सी टेक्नोलॉजी जैसे Apple Airtag आदि भी खतरनाक साबित हो सकते हैं. सोशल मीडिया पोस्ट या पोस्टकार्ड तक की वजह से लोकेशन लीक हो सकती है.
वॉरशिप क्या होते हैं?
वॉरशिप, असल में एक ऐसा बड़ा जहाज होता है जिसको खासतौर से नौसेना (Navy) युद्ध, सुरक्षा और सैन्य ऑपरेशन के लिए यूज किया जाता है. वॉरशिप भी कई तरह होते हैं, जिनमें एयरक्राफ्ट कैरियर , डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, पनडुब्बी जैसे नाम शामिल हैं.
रोहित कुमार