प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों इजरायल के दौरे पर हैं. यरुशलम में उन्होंने एक टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी का दौरा किया. इस प्रदर्शनी में इजरायल की कई स्टार्टअप और टेक कंपनियों ने अपने नए प्रोडक्ट और रिसर्च दिखाए.
यहां AI, हेल्थ-टेक, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम कंप्यूटिंग, एग्री-टेक और वॉटर मैनेजमेंट से जुड़ी टेक्नोलॉजी रखी गई थी. मोदी ने अलग-अलग स्टॉल पर जाकर डेमो देखे और कंपनियों के फाउंडर्स से बातचीत की.
इजरायल लंबे समय से टेक और स्टार्टअप के लिए जाना जाता है. साइबर सिक्योरिटी और डिफेंस टेक में इजरायल की कंपनियों की पकड़ मानी जाती है. भारत पहले से इन सेक्टर में इजरायल के साथ काम कर रहा है.
ऐसे में इस तरह की प्रदर्शनी में जाना एक संकेत है कि भारत नई टेक्नोलॉजी को समझना और अपनाना चाहता है. खासकर AI और हेल्थ-टेक जैसे सेक्टर भारत के लिए आने वाले सालों में अहम होने वाले हैं.
पीएम मोदी ने वहां मौजूद कंपनियों से कहा कि वे भारत में अपने सॉल्यूशन लाने पर विचार करें. भारत में डिजिटल हेल्थ, स्मार्ट एग्रीकल्चर और साइबर सिक्योरिटी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है.
गांवों में हेल्थ सर्विस पहुंचाने के लिए AI टूल्स और रिमोट मॉनिटरिंग जैसे समाधान काम आ सकते हैं. खेती में डेटा और सेंसर्स के जरिए पानी और खाद का सही इस्तेमाल भी एक बड़ा मुद्दा है. प्रदर्शनी में दिखाए गए कई प्रोडक्ट इन समस्याओं से जुड़े थे.
हालांकि इस दौरे के दौरान अब तक AI और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ा कोई बड़ा करार या डील सामने नहीं आई है. अभी तक सिर्फ बातचीत और संभावनाओं की बात हुई है. सरकारी बयान में भी किसी MoU या एग्रीमेंट का जिक्र नहीं है.
इसका मतलब यह है कि फिलहाल यह एक शुरुआती कदम है. असली टेस्ट तब होगा जब इन कंपनियों के साथ भारत में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होंगे या कोई ठोस पार्टनरशिप सामने आएगी. पहले भी कई टेक डेमो दिखाए गए हैं, लेकिन वे जमीन पर उतरने में वक्त लेते हैं या कभी-कभी फाइलों में ही अटक जाते हैं.
गौरतलब है कि भारत और इजरायल के रिश्ते बीते कुछ सालों में मजबूत हुए हैं. डिफेंस और टेक्नोलॉजी में दोनों देशों का सहयोग बढ़ा है. सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की पोस्ट से यह साफ है कि वे इस दौरे को इनोवेशन और युवाओं से जोड़कर दिखा रहे हैं.
उन्होंने इजरायल के युवाओं के काम की तारीफ की और कहा कि इस तरह की टेक्नोलॉजी भविष्य की जरूरतों से जुड़ी है. लेकिन जमीन पर सवाल यह है कि क्या भारत इन टेक्नोलॉजी को अपने सिस्टम में तेजी से अपना पाएगा. भारत में रेगुलेशन, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और डेटा पॉलिसी जैसे मुद्दे अक्सर किसी विदेशी टेक को अपनाने में देरी करते हैं.
कुल मिलाकर यह दौरा एक संकेत देता है कि भारत टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर इजरायल जैसे देशों से सीखना चाहता है. अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे तुरंत कोई बड़ा बदलाव आएगा. फिलहाल यह एक शोकेस विजिट है. असली कहानी तब बनेगी जब इन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भारत के अस्पतालों, खेतों और डिजिटल सिस्टम में दिखने लगेगा. तभी यह दौरा केवल तस्वीरों और बयानों से आगे बढ़कर असली असर दिखा पाएगा.
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