इंडिया टुडे AI समिट 2026 में कई दिग्गजों ने हिस्सा लिया है. नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने भी AI को लेकर खास बातचीत की है. उन्होंने AI इम्पैक्ट इवेंट में मिसमैनेजमेंट पर भी बात की है. अमिताभ कांत ने कहा, 'उस इवेंट में मैं दो दिनों से था. वहां बहुत सारे लोग इकट्ठा हुए खासकर युवा वहां पहुंचे थे.'
'पहले दिन थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन दूसरे दिन से सभी चीजें सामान्य थी. मेरा विचार है कि एग्जीबिशन को सभी के लिए ओपन करना चाहिए. वहीं बिजनेस-टू-बिजनेस मीटिंग को टाइट रखना चाहिए. लेकिन ये भी देखना चाहिए इतने लोगों की रुचि AI में है, जो इस इवेंट में पहुंचे हैं.'
'मैं इस विचार से सहमत हूं कि AI क्रांति सिविल सर्वेंट या राजनेताओं से नहीं बल्कि कटिंग एज आंत्रोप्रेन्योर से आएगी. AI क्रांति के लिए ग्रेट टैलेंट, ग्रेट डेटा सेट और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है. Sarvam की बात करें, तो सरकार ने उन्हें कंप्यूटिंग पावर और AI डेटा कोष काम करने के लिए दिया. सरकार का काम साधन देना है, लेकिन क्रांति इन आंत्रोप्रेन्योर से ही आएगी.'
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चीन और अमेरिका दोनों ने ही अपने AI मॉडल्स तैयार कर लिए हैं. ऐसे में भारत का मौडल किसके जैसा होगा. इस सवाल पर उन्होंने बताया, 'भारत का मॉडल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर बेस्ड होगा. पश्चिमी देशों को देखेंगे, तो आप पाएंगे कि उन्होंने एक बड़ा गैप क्रिएट किया है. आप ऐसा नहीं होने दे सकते हैं. भारत का फोकस अफोर्डेबल और एक्सेसबल मॉडल तैयार करना है, जो मल्टी लैंग्वेल हो.'
'अगर आपका AI लो बैंडवेथ पर काम ना करें और सिर्फ इंग्लिश तक सीमित है, तो वो फिट नहीं है. इसलिए भारत को ऐसे सेफगार्ड तैयार करने होंगे, जिससे AI सभी के लिए अलग-अलग भाषा में उपलब्ध हो.'
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नीति आयोग के पूर्व CEO ने बताया, 'भारत के पास ऐसा कर पाने की क्षमता है. भारत एक मात्र देश है, जिसे पास 260 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी है. भारत ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर को प्राइवेट सेक्टर्स से लिए खोल दिया है. आज AI जापान से ज्यादा एनर्जी यूज कर रहा है. कोई दूसरा देश भारत से बेहतर तरीके से इसे मैनेज नहीं कर सकता है.'
'टेक्नोलॉजी की जंग लंबे समय में लड़ी जाती है. शुरुआत करने वाला ही जीतेगा ये तय नहीं है. AI के सेक्टर में लड़ाई डेटा और स्किल की है. इसलिए हमें लॉन्ग टर्म पर देखना चाहिए. भारत 10 LLM तैयार कर रहा है, जिसे सरकार सपोर्ट कर रही है. साथ ही कई छोटे ऐप्लिकेशन भी तैयार किए जा रहे हैं.'
नौकरी पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि इसकी वजह से कुछ नौकरियां जाएंगी. लेकिन बहुत सी नौकरियां आएंगी. चुनौती नए बच्चों को कोडिंग सिखाना है. हमारे इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट इंस्टीट्स के पाठ्यक्रम में बदलाव की जरूरत है.
अमिताभ कांत ने माना है कि सरकार हर मामले में बेहतर नहीं हो सकती है. खासकर जब बात टेक्नोलॉजी की हो, तो आंत्रोप्रेन्योर को आगे रखना चाहिए. उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री के 30 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की इकोनॉमी के लक्ष्य को सिर्फ फ्री एंटरप्राइसेस से ही हासिल किया जा सकता है.'
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