दिल्ली के विवेक विहार में हुई आग की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे घर सच में सुरक्षित हैं. सुबह के वक्त एक रिहायशी इमारत में आग लगी और देखते ही देखते 9 लोगों की जान चली गई.
शुरुआती जांच में AC ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट को वजह माना जा रहा है. लेकिन इस हादसे में एक और चीज सामने आई, जिसने चिंता और बढ़ा दी है, और वह है स्मार्ट डोर लॉक का फेल होना.
क्या है स्मार्ट डोर लॉक?
इन दिनों मार्केट में स्मार्ट डोर लॉक्स खूब बिक रहे हैं. स्मार्ट डोर लॉक ट्रेडिशनल गेट लॉक की जगह पर ही लगाए जाते हैं. ई-कॉमर्स वेबसाइट से लेकर दुकानों पर ये मिलते हैं. स्मार्ट डोर लॉक्स को ऐप के जरिए भी ओपन किया जा सकता है. आम तौर पर इसमें कीज होती हैं और ये कार्ड से खोला जा सकता है. पिन सेट करके पिन से भी इसे ओपन किया जा सकता है.
कुछ स्मार्ट डोर लॉक्स फिंगरप्रिंट बेस्ड भी होते हैं और ओटीपी के जरिए भी खुलते हैं. इन डोर लॉक्स में सेफ्टी के लिए फीचर्स तो दिए जाते हैं, लेकिन भारत में कई ऐसे भी स्मार्ट डोर लॉक्स हैं जो आग लगने की स्थिति में खराब हो जाते हैं.
जहां लगी आग, वहां इलेक्ट्रोनिक स्मार्ट डोर लॉक था!
बताया जा रहा है कि जिस फ्लोर पर आग शुरू हुई, वहां इलेक्ट्रॉनिक स्मार्ट डोर लॉक सिस्टम काम करना बंद कर गया. जैसे ही बिजली गई और आग फैली, दरवाजे जाम हो गए. लोग अंदर फंस गए और बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया.
कुछ लोग दरवाजा खोलने की कोशिश करते रहे, लेकिन सिस्टम रिस्पॉन्ड नहीं कर रहा था. इसी वजह से कई लोग धुएं और आग के बीच फंस गए. यह हादसा सिर्फ एक इलेक्ट्रिकल फायर नहीं था, बल्कि कई छोटी-छोटी चूकों का मिला-जुला नतीजा था.
बिल्डिंग में खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल लगी हुई थी, जिससे लोग बाहर नहीं निकल पाए. छत का दरवाजा भी बंद था, जो इमरजेंसी एग्जिट बन सकता था. पूरी इमारत में एक ही एंट्री और एग्जिट था. जब आग फैली, तो धुआं तेजी से ऊपर गया और लोगों के पास बचने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा.
स्मार्ट डोर लॉक कितना सेफ?
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्मार्ट डोर लॉक जैसी टेक्नोलॉजी इस तरह की स्थिति में खतरा बन सकती है. आजकल शहरों में स्मार्ट लॉक तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं.
बिना चाबी के दरवाजा खोलना, मोबाइल से कंट्रोल करना, फिंगरप्रिंट या पासकोड से एंट्री देना, यह सब सुविधाएं लोगों को अट्रैक्ट करती हैं. चोरी से बचाव के लिए भी इन्हें सेफ और सिक्योर भी माना जाता है.
लेकिन आग जैसी इमरजेंसी में तस्वीर बदल जाती है. ज्यादातर स्मार्ट लॉक बिजली या बैटरी पर चलते हैं. अगर शॉर्ट सर्किट हो जाए, सिस्टम हैंग हो जाए या बैटरी फेल हो जाए, तो दरवाजा खुलना मुश्किल हो सकता है. कुछ लॉक में मैनुअल ओवरराइड होता है, लेकिन कई बार घबराहट में लोग उसे इस्तेमाल नहीं कर पाते या वह सही से काम नहीं करता.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
फायर सेफ्टी से जुड़े एक्सपर्ट्स मानते हैं कि किसी भी घर या बिल्डिंग में टेक्नोलॉजी के साथ बेसिक सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर दरवाजा इलेक्ट्रॉनिक है, तो उसमें मैनुअल लॉक जरूर होना चाहिए. इमरजेंसी में बिना बिजली के भी दरवाजा खुल सके, यह सबसे जरूरी है. इसके अलावा एक से ज्यादा एग्जिट होना भी जरूरी है.
अगर घर में स्मार्ट लॉक है, तो यह जरूर जांच लें कि उसमें मैनुअल चाबी का विकल्प है या नहीं. क्या बिजली जाने पर वह खुल सकता है. क्या घर में दूसरा एग्जिट है. क्या खिड़कियों से बाहर निकलने का रास्ता है. यह छोटे सवाल ही बड़े हादसों से बचा सकते हैं.
दिल्ली की इस घटना ने यह भी दिखाया कि सिर्फ स्मार्ट लॉक ही नहीं, बल्कि पूरी बिल्डिंग की प्लानिंग भी अहम होती है. अगर खिड़कियों पर ग्रिल लगी हो, छत बंद हो और सीढ़ियों का रास्ता ही एकमात्र ऑप्शन हो, तो आग के समय हालात बहुत जल्दी बिगड़ जाते हैं. धुआं सबसे बड़ा खतरा होता है और कुछ ही मिनटों में लोगों को बेहोश कर सकता है.
पिछले कुछ सालों में AC ब्लास्ट और इलेक्ट्रिकल फायर के मामले बढ़े हैं. गर्मियों में लोड ज्यादा होने की वजह से वायरिंग गर्म होती है और खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में अगर घर में कई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगे हों, तो रिस्क और बढ़ जाता है.
मुन्ज़िर अहमद