स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और कोई भी गैजेट हो, जिसको चलाने के लिए बैटरी की जरूरत होती है. एक खास डिवाइस तैयार हुआ है, जो बिना बैटरी के काम कर सकता है. अमेरिकी की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने खास डिवाइस तैयार किया है.
वियरेबल बैटरी-फ्रीन स्वेट सेंसर डेवलप किया है, जो कई बायोमार्कर्स को लगाटतार ट्रैक करता है. यह सेंसर अपनी सेंसिंग सतह को खुद रीजनरेट करता है, फिर स्मार्टफोन या वायरलेस तरीके से पावर लेकर काम करता है. यह लंबे समय तक हेल्थ मॉनिटरिंग कर सकेगा.
डिवाइस का नाम IREM-W2MS3 है और यह एक लचीला स्किन पैच है. यह पैच रियल टाइम पसीने को एनालाइज करने और शरीर से जुड़े जरूरी हेल्थ मॉलीक्युल को मापने के लिए डिजाइन किया गया है.
मौजूदा वियरेबल स्किन पैच समय-समय के साथ अपनी परफॉर्मेंस डाउन कर देते हैं. जबकि ये न्यू डिवाइस बिना परफॉर्मेंस डाउन किए अपनी सटीकता को बनाए रखता है.
NFC की मदद से करता है काम
यह सिस्टम नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) की मदद से वायरलेस माध्यम से स्मार्टफोन या कलाई में पहनने वाले रीडर से कनेक्ट होता है. इसमें पारंपरिक बैटरी का इस्तेमाल किया गया है और यह रीडर से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड से पावर रिसीव करता है.
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सेल्फ-क्लीनिंग की काबिलियत रखता है
इस डिवाइस में रीजनरेट होने वाली सेंसिंग सतह है. यह डिवाइस कम वोल्टेज का उपयोग करके अपनी सेंसिंग लेयर को रिफ्रेश रखने की काबिलियत रखा है, जिसकी मदद से जमा हुए मॉलेक्यूल्स हट जाते हैं.
आमतौर पर बार-बार माप लेने के बाद मॉलेक्यूल्स सेंसिंग लेयर पर चिपके रह जाते हैं, जिससे सेंसर की परफॉर्मेंस घट जाती है. हालांकि इस न्यू डिवाइस में ऐसा देखने को नहीं मिलेगा.
एक साथ चार बायोमार्कर्स को ट्रैक करता है?
यह सिस्टम एक साथ पसीने में मौजूद चार बायोमार्कर्स को ट्रैक करता है, जिसमें कॉर्टिसोल, ग्लूकोज, लैक्टेट और यूरिया के नाम शामिल हैं. ये बायोमार्कर्स तनाव, मेटाबॉलिज्म, शारीरिक मेहनत और किडनी फंक्शन से कनेक्टेड होते हैं. इससे समय के साथ स्वास्थ्य की व्यापक जानकारी मिल सकती है.
लोगों की डेली हेल्थ ट्रेकिंग के लिए इस डिवाइस का यूज किया जा सकेगा. इसके लिए क्लिनिक विजिट या ब्लड टेस्ट की जरूरत नहीं होगी.
मल्टी-सिग्नल हेल्थ ट्रैकिंग फीचर
यह पैच मॉलिक्यूलर सेंसिंग में ऐसी स्पेशल टेक्नोलॉजी का यूज करता है, जो तापमान, नमी और pH जैसी बदलती परिस्थितियों में भी आसानी से काम कर सकेगा. इसको 21 दिन तक लगातार टेस्ट किया गया है.
रिसर्च टीम ने यूसी इरवाइन बील एप्लाइड इनोवेशन के जरिए इस तकनीक के लिए पेटेंट फाइल किया है, अब इसके आगे के लिए डेवलप किया जा सकता है और इसके कमर्शियल यूज पर फोकस किया जाएगा.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क