हर हाथ में स्मार्टफोन, हर जगह क्रिएटर, इंडिया की Creator Economy कितनी बड़ी हो चुकी है, जानें

AI Impacts Summit 2026: इस मेगा टेक इवेंट में क्रिएटर इकॉनमी की भी झलक देखने को मिल रही है. WAVES Creator Corner के नाम से यहां एक खास पेवेलियन भी तैयार किया गया है.

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India AI Impact Summit 2026 India AI Impact Summit 2026

सम्राट शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:25 PM IST

AI Impact Summit 2026 इस बार इंडिया में हो रहा है और इसके बीच एक खास पवेलियन भी बनाया गया है जिसे WAVES Creators Corner नाम दिया गया है.

सरकार ने क्रिएटर्स और Creator Economy के लिए अलग से स्पेस रखा है. इस बजट में भी क्रिएटर इकॉनमी पर काफी बात हुई है. 

मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में पिछले कुछ सालों से काफी बदलाव आया है. आज लगभग हर हाथ में स्मार्टफोन है. लोग टीवी और अखबार से ज्यादा वक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिता रहे हैं.

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कंटेंट देखने और बनाने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. डिजिटल मीडिया ने रीच और एंगेजमेंट के मामले में बाकी सभी प्लेटफॉर्म को पीछे छोड़ दिया है.

डिजिटल मीडिया से हुई 80 हजार करोड़ की कमाई

2024 में भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का कुल साइज करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये था. इसमें से करीब एक-तिहाई हिस्सा सिर्फ डिजिटल मीडिया से आया. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में डिजिटल मीडिया से करीब 80 हजार करोड़ रुपये की कमाई हुई.

टीवी से करीब 67 हजार करोड़ रुपये आए. प्रिंट से करीब 26 हजार करोड़ रुपये और ऑनलाइन गेमिंग से करीब 23 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू आया. यह दिखाता है कि डिजिटल अब सपोर्टिंग रोल में नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा बन चुका है.

रिपोर्ट यह भी बताती है कि आज किसी देश की ताकत सिर्फ फैक्ट्री और सड़कों से नहीं मापी जाती. अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, कंटेंट, आईपी और कल्चर भी इकॉनमी का बड़ा हिस्सा हैं. आज आइडिया तेजी से फैलते हैं. स्टोरी मार्केट को मूव करती है. क्रिएटिव इकोसिस्टम यह तय करता है कि दुनिया किसी देश को कैसे देखती है और उससे कैसे जुड़ती है.

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बढ़ेंगी डिजिटल मीडिया की हिस्सेदारी

डेटा यह भी इशारा करता है कि आने वाले सालों में डिजिटल मीडिया की हिस्सेदारी और बढ़ेगी. 2024 से 2027 के बीच डिजिटल मीडिया का शेयर सबसे ज्यादा बढ़ने वाला है.लाइव इवेंट्स प्रिंट मीडिया की हिस्सेदारी में भी सेंध लगा सकते हैं. 

जहां ऑडियंस जा रही है, वहीं पैसा भी जा रहा है. एडवरटाइजर्स अब तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो रहे हैं. 2025 में भारत के कुल एड स्पेंड का करीब आधा हिस्सा डिजिटल पर गया. एक तरफ लोग ओटीटी की तरफ जा रहे हैं. दूसरी तरफ केबल और डीटीएच सब्सक्राइबर भी कम हो रहे हैं.

डिजिटल मीडिया में पैसा तो बढ़ रहा है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों के पास जा रहा है. मेटा और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म भारत के डिजिटल ऐड मार्केट पर हावी हैं. इसका मतलब यह है कि भारत में बना कंटेंट और यहां के क्रिएटर्स से जुड़ी वैल्यू काफी हद तक देश के बाहर चली जाती है.

इसी वजह से एक्सपर्ट्स और रिपोर्ट्स यह कह रही हैं कि इंडिया को अपने लोकल डिजिटल प्लेटफॉर्म मजबूत करने होंगे, ताकि डिजिटल इकोनॉमी से आने वाला पैसा देश के अंदर रह सके और भारत अपनी डिजिटल फ्यूचर को खुद शेप कर सके.

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