जन्नत जाने के लिए नौजवान बनते हैं आतंकी और करते हैं बेगुनाहों का कत्ल...

आतंकवादी संगठन और उसके आका जन्नत के नाम पर मुसलमानों को गुमराह कर उनकी जिंदगी जहन्नुम से भी बदतर बना देते हैं. मुंबई हमले में इकलौता जिंदा पकड़ा गया कसाब पाकिस्तान के एक गरीब परिवार से था. उसके दिल-दिमाग में जन्नत और आखिरत की बातें ऐसे ठूंस दी गईं कि वो सबको मार कर खुद मरने पाकिस्तान से मुंबई चला आया.

Advertisement
आतंकी की राह पर निकले युवा आतंकी की राह पर निकले युवा

परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 25 नवंबर 2015,
  • अपडेटेड 12:37 PM IST

आतंकवादी संगठन और उसके आका जन्नत के नाम पर मुसलमानों को गुमराह कर उनकी जिंदगी जहन्नुम से भी बदतर बना देते हैं. मुंबई हमले में इकलौता जिंदा पकड़ा गया कसाब पाकिस्तान के एक गरीब परिवार से था. बेहद कम पढ़ा-लिखा. उसके दिल-दिमाग में जन्नत और आखिरत की बातें ऐसे ठूंस दी गईं कि वो सबको मार कर खुद मरने पाकिस्तान से मुंबई चला आया और पकड़े जाने के बाद भी उसे यही गुमान था कि वो तो अब जन्नत में जाएगा.

Advertisement

कसाब को ले जाया गया मुर्दाघर
अजमल कसाब ने जब पुलिस हिरासत में ये बातें कही थीं, तब अगले ही दिन मुंबई पुलिस के एक सीनियर अफसर कसाब को उस अस्पताल के मुर्दाघर ले गए थे, जहां उसके बाकी नौ साथी आतंकवादियों की लाशें रखी हुई थीं. लाशों से बदबू आ रही थी. कहते हैं कि कसाब तब अपनी नाक बंद करने लगा था. मगर उस पुलिस अफसर ने उसका हाथ पकड़ कर उसे मजबूर किया कि वो उस बदबू को महसूस करे.

कसाब को पहली बार हुआ पछतावा
इसके बाद उसने कसाब से पूछा कि तुम्हारे आका ने तो कहा था कि मरने के बाद जन्नत मिलेगी और बदन से खुशबू आएगी. फिर तुम क्यों अपनी नाक बंद कर रहे हो? कहते हैं मुर्दा घर से लौटने के बाद कसाब को पहली बार अपने किए पर पछतावा हुआ और वो बहुत रोया. कसाब को तो अहसास हो चुका था कि उससे झूठ बोला गया था. लेकिन इसी एक झूठ के सहारे आज भी ऐसे सैकड़ों-हजारों कसाब पैदा किए जा रहे हैं.

Advertisement

बगदादी ने भी अपनाया जन्नत का हथकंडा
बगदादी ने भी आईएस का काला झंडा पूरी दुनिया में लहराने के लिए जन्नत के हथकंडे को अपनाया हुआ है. जन्नत के नाम पर वो दुनिया भर के मुस्लिम नौजवानों, खास कर जो कम पढ़े लिखे, बेरोजगार, कम उम्र और गरीब घरानों से हैं, उन्हें ही अपने जाल में फांसता है. उन्हें जन्नत का लालच देता है और फिर मरने के लिए छोड़ देता है. असल में बगदादी दुनिया भर के मुस्लिम नौजवानों के सामने लालच का चांदी फेंकता है और अपनी जान की कीमत चुका कर वो लोग बगदादी की आतंकी बादशाहत को बचाते हैं.

खुफिया एजेंसी कर रही मामले की जांच
अमेरिका में अब तक आईएस से जुड़े 82 लोगों की गिरफ्तारी हुई हैं, खुफिया एजेंसी एफबीआई आईएस के संबंध में एक हजार मामलों की जांच कर रही है. रूस से सीरिया और इराक में लड़ने के लिए 1700 नागरिक जा चुके हैं. जर्मनी में आईएस में 760 लोग शामिल हुए, जिनमें अब तक 120 के मारे जाने की खबर है. हालांकि सीरिया इराक में बगदादी का नरक देखकर 200 जर्मन घर लौट आए.

ब्रिटेन में अब तक 1600 नौजवान आईएस में शामिल हो चुके हैं. आईएस के ताजा हमले से जख्मी फ्रांस में 1400 लोग बगदादी के आतंकी बन चुके हैं, जिनमें 70 लोग मारे जा चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया से 100 नौजवान आईएस में आए, जिनमें तीस के मारे जाने की खबर है. भारत में ही 23 नौजवानों के आईएसआईएस से जुड़ने की जानकारी आई है, जिनमें से 6 आतंकी मार गिराए गए.

Advertisement

आतंकवादियों को मिलती हैं तमाम सुविधाएं
बगदादी के जहन्नुम को अपनी किस्मत का जन्नत समझकर कई देशों से नई पीढ़ी अपने भविष्य की कलम आतंक में लगा रही है. सीरिया-इराक में बगदादी का आतंकी बनकर लड़ने वालों को बाकायदा डॉलर में तनख्वाह मिलती है. आईएसआईएस खुद ही अपना करेंसी एक्सचेंज चलाता है. उन्हें बेगुनाहों का खून बहाने के लिए अतिरिक्त पैसे मिलते हैं. इसके अलावा घर, बिजली की सुविधा मुफ्त में, साथ ही पत्नी, बच्चों और माता पिता का पूरा ख्याल रखा जाता है. इनके अलावा आतंकवादियों के लिए मौज-मस्ती की तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement