आईएसआईएस ने ऐलान किया है कि उसके लोग दुनिया के हर उस हिस्से में पहुंचेंगे जहां-जहां सूरज उगता और डूबता है. उसने भारत के पड़ोस बांग्लादेश तक में पहुंच जाने का दावा किया है. उधर आईएस के इन्हीं तमाम दावों के बीच गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट भी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि अब तक कुल छह भारतीय नौजवान आईएस की तरफ से लड़ते हुए मारे जा चुके हैं, जबकि 20 अभी भी लड़ रहे हैं.
ISIS का रुख कर रहे हैं भारतीय युवा
पिछले एक साल में अचानक ऐसा बदलाव आया है कि हिंदुस्तानी नौजवान तालिबान, लश्कर या अल-कायदा की बजाए आईएसआईएस का रुख करने लगे हैं. गृह मंत्रालय ने भारत में आईएस के असर पर एक रिपोर्ट तैयार की है. इसमें आईएसआईएस ज्वॉइन कर चुके भारतीयों का ब्यौरा है. इस रिपोर्ट के मुताबिक अब तक कुल 23 भारतीय युवक आईएस से जुड़े हैं. इनमें से 6 नौजवनों की आईएस की तरफ से लड़ते हुए मौत भी हो चुकी है.
ISIS के लिए लड़ते हुए दी जान
आईएस के लिए लड़ते हुए, जिन नौजवानों की मौत हुई है उनके नाम हैं-
मोहम्मद उमर सुब्हान, शिवाजीनगर, बैंगलुरु
आतिफ वसीम मोहम्मद, आदिलाबाद, तेलंगाना
मौलाना अब्दुल कादिर सुल्तान, भटकल, कर्नाटक
शमीम फारूक टंकी, कल्याण, ठाणे, महाराष्ट्र
फैज मसूद, कोक टाउन, बैंगलुरु
मोहम्मद साजिद, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश
इंटरनेट के जरिए IS से जुड़े
दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक के नौजवान आईएस से प्राभावित होकर उसके साथ हो लिए थे. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी को इंटरनेट के जरिए आईएस से जोड़ा गया था. भारतीय सेना की खुफिया रिपोर्ट भी बताती है कि बीते एक साल में कश्मीर घाटी से 80 से ज्यादा नौजवान सीमापार गए. ये तालिबान से नहीं बल्कि आईएसआईएस से प्रभावित हो रहे हैं.
ताकि कम हो अरब आतंकियों की मौत
आईएसआईएस का भारतीय युवाओं में असर भले बढ़ रहा हो, लेकिन भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आईएस के साथ जुड़े इन युवाओं की वहां कोई कद्र नहीं है. गृह मंत्रालय को इंटेलिजेंस शेयर से मिली जानकारी बताती है कि भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान से गए युवाओं को निचले दर्जे का काम मिलता है. सीनियर पदों पर अरब और सीरिया के आतंकी रहते हैं, जिन्हें बेहतर हथियार, सुरक्षित काम और बढ़िया वेतन मिलता है. भारतीय उपमहाद्वीप और अफ्रीकी मूल के आतंकियों से भेड़-बकरियों सा बर्ताव होता है, साथ ही लड़ाई के मैदान में उन्हें आगे रखा जाता है, ताकि अरब आतंकियों की मौत कम हो.
पूरी दुनिया में राज करने का दावा
अपनी ऑनलाइन मैगजीन दबिक में आईएसआईएस ने आनेवाले वक्त में ना सिर्फ पूरी दुनिया में राज करने का दावा किया है, बल्कि ये भी कहा है कि आईएस के तार अब ट्यूनिशिया से लेकर बांग्लादेश तक फैल चुके हैं.
फ्रांस में हुआ हमला लीड स्टोरी
आईएसआईएस ने इस बार अपनी ऑनलाइन मैगजीन 'दबिक' के 12वें एडिशन में वो खूनी इबारत लिखी है, जो दुनिया के साथ-साथ हिंदुस्तान के लिए भी एक नई चुनौती बन सकती है. आईएसआईएस ने ना सिर्फ फ्रांस में हुए हमले और उसके पीछे की साजिश को अपनी लीड स्टोरी बनाया है, बल्कि ये भी बताया है कि किस तरह ट्यूनिशिया से लेकर बांग्लादेश यानी अफ्रीका से लेकर बंगाल की खाड़ी तक उसके तार जुड़े हुए हैं.
जेहाद को फिर से किया जिंदा
इस मैग्जीन में बांग्लादेश में जमातुल मुजाहिदीन के नाम से फल-फूल रहे एक आतंकवादी संगठन का भी जिक्र है और ये मैगजीन लिखता है कि इस संगठन ने बंगाल की खाड़ी में जेहाद को फिर से जिंदा कर दिया है और जल्द ही इसके खौफनाक नतीजे देखने को मिलेंगे. अब चूंकि बांग्लादेश हिंदुस्तान का पड़ोसी मुल्क है, ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं आईएसआईएस बांग्लादेश के रास्ते ही हिंदुस्तान के और करीब तो नहीं पहुंच गया है?
मैग्जीन ने पेज नंबर 36 में 'द रिवाइवल ऑफ जेहाद इन बंगाल विद द स्प्रेड ऑफ द लाइट ऑफ द खलीफा' के नाम से एक स्टोरी पब्लिश करते हुए बांग्लादेश में आईएसआईएस के तर्ज पर बेगुनाहों को मौत के घाट उतारनेवाले आतंकवादी संगठन और आतंकियों की शान में कसीदे पढ़े हैं.
पूरी दुनिया में इस्लामी हुकूमत का ख्वाब
बांग्लादेशी आतंकवादी शेख अब्दुर्रहमान को जेहादियों की पहली कतार में बताता हुआ दबिक लिखता है कि अपने जीते जी उसने सबको एक ही झंडे के नीचे लाने की पुरजोर कोशिश की और अब यही संगठन इंसानों के बनाए गैर इस्लामी कायदे-कानून के खिलाफ बांग्लादेश की सरजमीन पर जेहाद का झंडा उठाए अपनी जंग लड़ रहा है. आईएसआईएस कहता है कि अब इस संगठन की पहुंच बांग्लादेश के तमाम दूसरे ठिकानों के साथ-साथ वहां के छोटे-छोटे मदरसों तक है और उसके आका अबु बकर अल बगदादी ने पूरी दुनिया में इस्लामी हुकूमत का जो ख्वाब देखा है, उसके लिए ये एक बड़ी बात है.
बांग्लादेश की सरकार का दावा गलत
आईएसआईएस ने इसी पत्रिका के जरिए ये भी ऐलान किया है कि उसके जेहादियों पर दुनिया चाहे कितने भी हमले कर ले, पूरी दुनिया में उसके फैलाव की कोशिश जारी रहेगी. बांग्लादेश के हालात के बारे में आईएसआईएस की ये मैगजीन लिखती है कि वहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी और जमायत ए इस्लामी बांग्लादेश जैसे सियासी धड़ों ने ये सोच लिया था कि कुछ दक्षिणपंथी बुद्धिजीवियों की तथाकथित शहादत से जेहाद रुक जाएगी, लेकिन ना तो ऐसा होना था और ना ही ऐसा हुआ. उसने बांग्लादेश की आवामी लीग सरकार के उस दावे को भी गलत करार दिया है, जिसमें सरकार ने वहां आईएसआईएस की मौजूदगी से इनकार किया है.
ISIS को 'गुमनाम' चैलेंज
फ्रांस में हुए आईएसआईएस के हमले के बाद एनॉनिमस यानी गुमनाम के नाम से हैकर्स के एक ग्रुप ने इंटरनेट पर आईएसआईएस का नामो-निशान मिटा देने की कसम खाई है. यानी अब ये ग्रुप आईएसआईएस के उसी प्रोपेगैंडा टूल को टार्गेट करना चाहता है, जिसके जरिए आईएस कत्ल-ए-आम की तस्वीरें जारी कर सबसे खौफनाक आतंकवादी संगठन बन गया.
ISIS को वेब की दुनिया में सजा
एनानिमस का कहना है कि अब वो इंटरनेट पर मौजूद आईएसआईएस के तमाम ठिकानों को ढूंढ़ कर उन्हें खत्म करने के काम में लग गया है और जल्द ही आईएसआईएस को वेब की दुनिया में उसके किए की सजा मिलेगी. इस ग्रुप का कहना है कि बेनागुनाहों को मारनेवालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जा सकता. ऐसे में आईएसआईएस को अब पूरी दुनिया से होने वाले साइबर हमलों के लिए तैयार हो जाना चाहिए.
ISIS के प्रोपेगैंडा पर निशाना
एनानिमस ने अपने वीडियो में ये भी बताया है कि किस तरह इसी साल फ्रैंच मैगजीन शार्ली अब्दो पर हुए हमले के बाद उसने आईएसआईएस से नाता रखने वाले संदिग्धों की 39 हजार ट्विटर प्रोफाइल की पहचान की और किस तरह 25 हजार ऐसे प्रोफाइल को बंद करवा दिया. इतना ही नहीं अब तक एनानिमस ने एमएनबीआर.इनफो, एनएसएचआर.मी जैसे कई प्लेटफॉर्म पर आईएसआईएस के प्रोपेगैंडा को निशाना बनाने में कामयाबी हासिल की है.
यूट्यूब वीडियो में अपने हक में एनानिमस ने लोगों की ओर से किए गए दो ट्विट भी दिखाए हैं, जिसमें एनॉनिमस के काम को दावे पर खरा उतरने वाला बताते हुए सराहा गया है. इसके बाद ये वीडियो कहता है, हम ना तो भूलते हैं और ना माफ करते हैं.
परवेज़ सागर