राहुल गांधी का भरोसा नए चेहरों पर

विधानसभा चुनावों में प्रदेश कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के चुनाव हार जाने से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए नई युवा टीम को आगे बढ़ाना आसान हो गया है.

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नए तेवर चुनाव प्रचार के दौरान राहुल के साथ अमित चावड़ा नए तेवर चुनाव प्रचार के दौरान राहुल के साथ अमित चावड़ा

मंजीत ठाकुर / संध्या द्विवेदी

  • नई दिल्ली,
  • 18 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 3:08 PM IST

पिछले साल दिसंबर में भाजपा को कड़ी टक्कर देने से उत्साहित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का मिशन लगता है कि देर से ही सही, अगले आम चुनावों के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य में पार्टी को नए सिरे से खड़ा करना है. गुजरात ने 2014 में सभी 26 लोकसभा सीटें भाजपा को सौंप दी थीं.

कांग्रेस के ज्यादातर दिग्गज जैसे शक्ति सिंह गोहिल, पूर्व मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल के बेटे सिद्धार्थ पटेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री तुषार अमर सिंह चौधरी विधानसभा चुनाव हार गए हैं, जिससे राहुल गांधी का पार्टी में युवा चेहरों को आगे बढ़ाने का काम आसान हो गया है. इससे उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर युवा नेताओं को नियुक्त करने का मौका मिल गया है, जिसकी वे लगातार वकालत करते रहे हैं.

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42 साल के ओजस्वी ओबीसी नेता अमित चावड़ा को भरत सिंह सोलंकी की जगह राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का फैसला किया गया है. भाजपा नेता भवकुभाई उनहाद को हराकर अमरेली विधानसभा सीट जीतने वाले 41 साल के परेश धनानी को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) का नेता चुना गया है.

पिछले महीने 43 साल के एआइसीसी सचिव राहुल सताव को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है. सताव महाराष्ट्र की हिंगोली लोकसभा सीट से सांसद हैं और संसद में काफी मुखर कांग्रेसी नेता माने जाते हैं. वे नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटेकर के प्रबल समर्थक हैं.

सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 138 मीटर करने के खिलाफ चलाए जा रहे नर्मदा बचाओ आंदोलन के अभियान का भी वे समर्थन करते रहे हैं. राहुल के करीबी माने जाने वाले सताव ने पिछले साल मेधा पाटकर को पत्र लिखकर बताया था कि नर्मदा बांध परियोजना विकास के नाम पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है.

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उन्होंने इस पत्र की प्रति ट्विटर पर भी पोस्ट की थी. अब गुजरात का प्रभारी बनने के बाद जब इस ट्वीट को लेकर उनकी बदनामी होने लगी तो इसे हटा दिया गया. भाजपा के नेता कांग्रेस और सताव को 'नर्मदा विरोधी' तथा 'गुजरात विरोधी' बताते हुए आलोचना करने लगे थे.

हालांकि धनानी ने इसके बावजूद मेधा पाटकर का समर्थन करना नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि पाटकर के द्वारा बनाए गए दबाव की वजह से ही बांध निर्माण से विस्थापित हुए लोगों का समुचित पुनर्वास हो सका और सरकार के लिए बांध की ऊंचाई बढ़ा पाना संभव हुआ. राहुल गांधी ने गुजरात में युवा टीम को आगे करने का अहम फैसला किया है. नए चेहरो पर कांग्रेस का भरोसा शायद भविष्य के लिए निवेश है.

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